Shardiya Navratri 2026 Maa Kalaratri Vahan: शारदीय नवरात्रि के सातवें दिन मां कालरात्रि की पूजा की जाती है। नवदुर्गा के इस स्वरूप को भय, नकारात्मक शक्तियों और अज्ञान का नाश करने वाली देवी माना जाता है। मां कालरात्रि का स्वरूप अन्य देवी रूपों से काफी अलग है। उनका रंग श्याम, केश खुले और स्वरूप अत्यंत उग्र बताया गया है। लेकिन उनके स्वरूप की एक खास बात सबसे ज्यादा आकर्षित करती है-मां कालरात्रि का वाहन सिंह नहीं, बल्कि गधा है।
ऐसे में सवाल उठता है कि मां कालरात्रि गधे पर ही क्यों सवार होती हैं? इसके पीछे क्या धार्मिक मान्यता है और उनके वाहन का आध्यात्मिक अर्थ क्या माना जाता है? आइए जानते हैं।
नवरात्रि के सातवें दिन होती है मां कालरात्रि की पूजा
शारदीय नवरात्रि के सातवें दिन यानी सप्तमी तिथि को मां कालरात्रि की पूजा की जाती है। नवदुर्गा में उनका स्थान सातवां है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां कालरात्रि भक्तों के भय को दूर करने और उन्हें विपरीत परिस्थितियों से लड़ने का साहस देने वाली देवी हैं।
मां कालरात्रि का स्वरूप देखने में अत्यंत उग्र बताया गया है। उनका वर्ण अंधकार के समान श्याम है, उनके केश खुले रहते हैं और उनके तीन नेत्र हैं। उनके गले में विद्युत के समान चमकने वाली माला का वर्णन मिलता है। माना जाता है कि उनका स्वरूप भले ही भयावह दिखाई देता हो, लेकिन वे अपने भक्तों के लिए कल्याणकारी हैं। इसी वजह से उन्हें ‘शुभंकरी’ नाम से भी जाना जाता है।
मां कालरात्रि का वाहन गधा ही क्यों है?
मां कालरात्रि के वाहन के रूप में गधे का उल्लेख नवदुर्गा की धार्मिक परंपरा में मिलता है। आमतौर पर देवी दुर्गा के स्वरूप को सिंह की सवारी से जोड़ा जाता है। सिंह शक्ति, साहस और पराक्रम का प्रतीक माना जाता है। ऐसे में मां कालरात्रि का गधे पर सवार होना अपने आप में विशेष प्रतीकात्मक महत्व रखता है।
धार्मिक व्याख्याओं में गधे को सहनशीलता, धैर्य और कठिन परिस्थितियों में लगातार आगे बढ़ने के भाव से जोड़ा जाता है। इसी आधार पर मां कालरात्रि के वाहन को यह संदेश देने वाला माना जाता है कि वास्तविक शक्ति केवल बाहरी वैभव या राजसी सामर्थ्य में नहीं, बल्कि कठिन परिस्थितियों का सामना करने की क्षमता में भी होती है।
हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि गधे को ही मां कालरात्रि का वाहन चुनने के पीछे किसी एक निश्चित पौराणिक कथा या कारण का उल्लेख प्रमुख प्राचीन ग्रंथों में स्पष्ट रूप से नहीं मिलता। इसलिए इससे जुड़ी प्रतीकात्मक व्याख्याओं को धार्मिक परंपरा और लोकमान्यताओं के संदर्भ में समझना अधिक उचित है।
क्या दुर्गा सप्तशती में मां कालरात्रि के वाहन का वर्णन है?
मां दुर्गा की महिमा से जुड़े प्रमुख ग्रंथों में मार्कण्डेय पुराण का देवी माहात्म्य, जिसे दुर्गा सप्तशती या चंडी पाठ भी कहा जाता है, महत्वपूर्ण है। इसमें देवी की महिमा, असुरों के साथ उनके युद्ध और धर्म की रक्षा के लिए उनके विभिन्न रूपों का वर्णन मिलता है।
हालांकि, मां कालरात्रि के गधे पर सवार होने की बात को सीधे दुर्गा सप्तशती का कथन बताना उचित नहीं है। नवदुर्गा के नौ स्वरूपों और उनके ध्यान आदि से जुड़ी परंपराएं बाद की धार्मिक उपासना-पद्धतियों और स्तोत्र-परंपराओं में भी विकसित हुई हैं। इसलिए मां कालरात्रि के वाहन से जुड़ी लोकप्रचलित मान्यताओं और प्रतीकात्मक व्याख्याओं को सीधे मार्कण्डेय पुराण या दुर्गा सप्तशती का मूल कथन मानने से बचना चाहिए।
मां कालरात्रि के स्वरूप से क्या मिलती है सीख?
मां कालरात्रि का स्वरूप भक्तों को भय पर विजय पाने और मुश्किल परिस्थितियों में साहस बनाए रखने का संदेश देता है। उनका उग्र रूप बुराई और नकारात्मक शक्तियों के विनाश का प्रतीक माना जाता है, जबकि ‘शुभंकरी’ नाम उनके कल्याणकारी स्वरूप को दर्शाता है।
उनका गधे पर सवार होना भी धार्मिक प्रतीकवाद के स्तर पर महत्वपूर्ण माना जाता है। गधा सामान्य और साधारण जीवन से जुड़ा पशु है। इसलिए इसकी सवारी को इस भाव से भी देखा जाता है कि ईश्वर की शक्ति को बाहरी आडंबर या राजसी वैभव की आवश्यकता नहीं होती।
मां कालरात्रि की पूजा का महत्व
नवरात्रि की सप्तमी तिथि पर मां कालरात्रि की विधि-विधान से पूजा की जाती है। भक्त उनसे भय, संकट और नकारात्मकता से मुक्ति की प्रार्थना करते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार मां कालरात्रि की आराधना से मन में साहस और आत्मविश्वास का भाव बढ़ता है।
मां का स्वरूप हमें यह संदेश देता है कि जीवन में आने वाली कठिन परिस्थितियों से भागने के बजाय उनका दृढ़ता से सामना करना चाहिए। यही मां कालरात्रि के उग्र और कल्याणकारी दोनों रूपों का आध्यात्मिक संदेश माना जाता है।
Disclaimer: यह लेख मां कालरात्रि से जुड़ी धार्मिक मान्यताओं, परंपराओं और प्रचलित व्याख्याओं पर आधारित है। विभिन्न धार्मिक ग्रंथों, संप्रदायों और परंपराओं में देवी के स्वरूप एवं वाहन से संबंधित मान्यताओं में अंतर हो सकता है। लेख में दी गई प्रतीकात्मक व्याख्याओं को किसी एक शास्त्रीय ग्रंथ का निश्चित कथन नहीं माना जाना चाहिए।
कंटेंट राइटर एवं रिपोर्टर, खबर मन्त्र। झारखंड के स्थानीय समाचार, महिला विकास, कला और लाइफस्टाइल खबरों की विशेष रिपोर्टिंग।









