mahashivratri का पावन पर्व 15 फरवरी को मनाया जाएगा। यह दिन भगवान शिव की आराधना का सबसे बड़ा अवसर माना जाता है। भक्त व्रत रखकर शिवलिंग का अभिषेक करते हैं और महादेव की कृपा पाने की कामना करते हैं।
लेकिन क्या आप जानते हैं कि शिवलिंग पर चढ़ाई जाने वाली कुछ वस्तुएं शास्त्रों में वर्जित मानी गई हैं? अनजाने में की गई एक छोटी सी गलती आपके व्रत के पुण्य को प्रभावित कर सकती है।
आइए जानते हैं—शिवलिंग पर क्या चढ़ाना चाहिए और क्या नहीं।
शिवलिंग पर क्या चढ़ाएं? (Shivling Puja Samagri List)
- जल और गंगाजल
शिवलिंग पर साधारण जल या गंगाजल से अभिषेक करना सबसे श्रेष्ठ माना गया है। जलाभिषेक से मानसिक शांति, पापों से मुक्ति और कष्टों का निवारण होता है।
- दूध
दूध से अभिषेक करना अत्यंत शुभ माना जाता है। दूध चंद्र तत्व से जुड़ा है और शिव को प्रिय है। इससे स्वास्थ्य लाभ और मनोकामना पूर्ति की मान्यता है।
- पंचामृत
दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से बना पंचामृत शिवलिंग पर चढ़ाने का विशेष विधान है। यह सुख-समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है।
- बेलपत्र
तीन पत्तियों वाला बेलपत्र भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है। मान्यता है कि इससे गृह दोष शांत होते हैं और इच्छाएं शीघ्र पूर्ण होती हैं।
- भस्म (विभूति)
भस्म वैराग्य और सत्य का प्रतीक है। इसे अर्पित करने से अहंकार का नाश और मानसिक शुद्धि होती है।
- सफेद फूल
सफेद आक, कनेर और धतूरा शिव को प्रिय माने जाते हैं। इन्हें चढ़ाने से तामसिक दोष शांत होते हैं।
शिवलिंग पर क्या न चढ़ाएं?
- तुलसी के पत्ते
तुलसी भगवान विष्णु को प्रिय है। पौराणिक कथा के अनुसार, जालंधर वध के बाद वृंदा के श्राप के कारण शिव पूजा में तुलसी वर्जित मानी जाती है।
- केतकी का फूल
केतकी पुष्प शिव पूजा में निषिद्ध है। कथा है कि भगवान शिव ने इसे अपनी पूजा से वर्जित कर दिया था।
- सिंदूर और रोली
शिवलिंग पुरुष तत्व का प्रतीक है। सिंदूर और रोली देवी पूजन में उपयोगी माने जाते हैं, शिव पूजा में नहीं।
- टूटे या सूखे बेलपत्र
खंडित, सूखे या काले धब्बों वाले बेलपत्र अर्पित नहीं करने चाहिए। इससे पूजा का पूर्ण फल नहीं मिलता।
क्यों जरूरी है सही पूजन विधि?
mahashivratri पर की गई पूजा विशेष फलदायी मानी जाती है। इसलिए शास्त्रों के अनुसार पूजन सामग्री का चयन करना जरूरी है। सही विधि से अभिषेक करने पर जीवन में सुख, शांति और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।













