Patna: बिहार की राजधानी पटना के पारस अस्पताल में गुरुवार को कुख्यात अपराधी चंदन मिश्रा की गोली मारकर हत्या कर दी गई। बक्सर के सोनबरसा गांव निवासी चंदन मिश्रा वर्ष 2011 के चर्चित राजेंद्र केसरी हत्याकांड में उम्रकैद की सजा काट रहा था। वह जेल से पैरोल पर बाहर आकर इलाज करा रहा था।
14 साल पुराने हत्याकांड ने बनाया था कुख्यात
21 अगस्त 2011 को बक्सर जिला मुख्यालय के मेन रोड पर दिनदहाड़े भोजपुर चूना भंडार के मालिक राजेंद्र केसरी की हत्या कर दी गई थी। वे अपनी दुकान का शटर खोल रहे थे, तभी बदमाशों ने उन पर ताबड़तोड़ गोलियां बरसाईं। इस घटना ने पूरे जिले में सनसनी मचा दी थी।
मामले में चंदन मिश्रा समेत ओंकारनाथ सिंह उर्फ शेरू सिंह, सुरेंद्र मिश्रा उर्फ छोटू मिश्रा और निलंबित पुलिसकर्मी दीनबंधु सिंह पर हत्या, रंगदारी और आपराधिक षड्यंत्र का मुकदमा दर्ज किया गया था।
कुख्यात बनने की शुरुआत इसी हत्याकांड से
यह वारदात चंदन और शेरू के आपराधिक जीवन की पहली बड़ी घटना थी। दोनों ने व्यवसायियों में खौफ फैलाने के लिए हत्या को अंजाम दिया था। पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए दोनों को जल्द गिरफ्तार कर लिया और मामले की स्पीडी ट्रायल के जरिए सुनवाई हुई।
2013 में हुई उम्रकैद की सजा, पैरोल पर था बाहर
तीन अक्टूबर 2013 को बक्सर जिला एवं सत्र न्यायाधीश हरेन्द्र तिवारी ने चंदन मिश्रा, दीनबंधु सिंह और छोटू मिश्रा को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। इससे पहले चंदन को भारतीय दंड संहिता की धारा 302, 120बी, 386 और आर्म्स एक्ट की धारा 27 के तहत दोषी ठहराया गया था।
हालांकि, सजा के खिलाफ अपील के कारण कुछ समय तक सुनवाई रुकी रही। लेकिन हाईकोर्ट से अनुमति मिलने के बाद फिर से सुनवाई हुई और उम्रकैद की सजा बरकरार रखी गई।
शेरू सिंह की फांसी और बाद में उम्रकैद में बदली सजा
मामले का प्रमुख आरोपी शेरू सिंह कोर्ट में पेशी के दौरान पुलिसकर्मी को गोली मारकर फरार हो गया था, लेकिन बाद में गिरफ्तार हुआ। प्रारंभ में उसे फांसी की सजा सुनाई गई थी। हाईकोर्ट में अपील के बाद उसकी सजा को उम्रकैद में बदल दिया गया।













