दुनिया भर में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, खासकर मिडिल ईस्ट में चल रहे संघर्ष का असर अब आम लोगों की रसोई तक पहुंच चुका है। पेट्रोलियम उत्पादों की सप्लाई पर असर पड़ने से एलपीजी (LPG) की उपलब्धता कई जगहों पर प्रभावित हुई है। भारत जैसे बड़े उपभोक्ता देश में भी इसका असर धीरे-धीरे दिखने लगा है, जहां कुछ इलाकों में सिलेंडर की सप्लाई में देरी, ब्लैक मार्केटिंग और बढ़ती चिंता जैसी स्थिति बनती नजर आ रही है।
हालांकि भारत सरकार लगातार यह दावा कर रही है कि देश में एलपीजी का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है, लेकिन जमीनी स्तर पर कई जगहों से उपभोक्ताओं को समय पर सिलेंडर नहीं मिलने की शिकायतें सामने आ रही हैं। होटल और छोटे ढाबों तक में गैस की सप्लाई बाधित होने की खबरें मिल रही हैं, जिससे खाने-पीने की व्यवस्था भी प्रभावित हो रही है।
आखिर क्यों हो रहा है LPG संकट?
मिडिल ईस्ट दुनिया के सबसे बड़े तेल और गैस उत्पादक क्षेत्रों में से एक है। यहां किसी भी तरह का युद्ध या तनाव सीधे तौर पर कच्चे तेल और गैस की सप्लाई को प्रभावित करता है।
- सप्लाई चेन बाधित होती है
- शिपिंग लागत बढ़ जाती है
- अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें उछल जाती हैं
यूरोप और एशिया के कई देशों में पहले से ही ऊर्जा संकट की स्थिति बनी हुई है। कई देश वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं, लेकिन फिलहाल एलपीजी जैसी चीजों की मांग बनी हुई है।
भारत में क्या है स्थिति?
भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में हलचल का सीधा असर यहां पड़ता है।
- कुछ राज्यों में सिलेंडर की डिलीवरी में देरी
- ग्रामीण इलाकों में ज्यादा परेशानी
- कालाबाजारी की शिकायतें
- होटल और छोटे व्यवसाय प्रभावित
हालांकि स्थिति हर जगह एक जैसी नहीं है, लेकिन डर और अनिश्चितता ने लोगों को पहले से ही विकल्प तलाशने पर मजबूर कर दिया है।

ऐसे में सामने आया ‘चार्जेबल चूल्हा’
रांची के बाजार में इन दिनों एक अनोखा चूल्हा तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। यह चूल्हा गैस का विकल्प बनकर उभर रहा है, खासकर उन लोगों के लिए जो एलपीजी की कमी से जूझ रहे हैं।
यह चूल्हा लकड़ी, गोबर के गोइठे और कोयले से चलता है, लेकिन इसकी खास बात यह है कि इसमें एक बैटरी और मोटर सिस्टम लगा है, जो आग को नियंत्रित करता है।
कैसे करता है काम?
इस चूल्हे में एक छोटा पंखा (फैन) लगा होता है, जो हवा को नियंत्रित करता है।
- हवा ज्यादा देंगे तो आग तेज जलेगी
- कम हवा देंगे तो धीमी आंच मिलेगी
- बहुत कम ईंधन में भी लगातार जलता रहता है
इसका डिजाइन ऐसा है कि धुआं काफी कम निकलता है और राख नीचे गिराने का भी सिस्टम मौजूद है।
बैटरी और परफॉर्मेंस
- 6 वोल्ट की बैटरी
- 4 घंटे में फुल चार्ज
- एक बार चार्ज होने पर 4 दिन तक उपयोग
- छोटे परिवार के लिए 5–7 दिन तक भी चल सकता है
यह खासियत इसे सामान्य चूल्हों से अलग बनाती है।
कीमत और डिमांड
- ₹2500 से ₹3000 तक कीमत
- बाजार में तेजी से बढ़ रही मांग
- लोग वीडियो देखकर खरीदने पहुंच रहे
कुछ विक्रेता होम डिलीवरी की सुविधा भी दे रहे हैं, जिससे इसकी पहुंच और बढ़ रही है।
शहर बनाम गांव—कहां कितना उपयोगी?
ग्रामीण इलाकों में जहां लकड़ी और गोइठा आसानी से मिल जाते हैं, वहां यह चूल्हा ज्यादा कारगर है।
वहीं शहरों में लोग इसे बालकनी या खुले स्थान में कोयले के साथ इस्तेमाल कर रहे हैं।
लोगों की क्या राय है?
खरीदारों का कहना है कि गैस की अनिश्चितता के बीच यह एक भरोसेमंद विकल्प है।
- कम खर्च
- जल्दी खाना बनता है
- गैस पर निर्भरता कम
कई लोगों ने इसे “इमरजेंसी किचन सॉल्यूशन” तक बता दिया है।
LPG संकट ने यह साफ कर दिया है कि सिर्फ एक ही ईंधन पर निर्भर रहना जोखिम भरा हो सकता है। ऐसे में यह चार्जेबल चूल्हा जैसे विकल्प लोगों को राहत दे रहे हैं। आने वाले समय में अगर ऊर्जा संकट गहराता है, तो ऐसे इनोवेटिव और सस्ते समाधान की मांग और भी तेजी से बढ़ सकती है।











