Ranchi: राज्य में करीब 36 महीनों के लंबे अंतराल के बाद नगर निकाय चुनाव 2026 की घोषणा होते ही Ranchi Nagar Nigam (RMC) की गतिविधियां अचानक तेज़ हो गई हैं। शहर में निरीक्षण, बैठकों और वर्षों से अधूरे पड़े कामों को जल्द पूरा करने के दावे किए जा रहे हैं। लेकिन आम लोगों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है कि जो काम तीन साल तक नहीं हुए, वे अब चुनाव से ठीक पहले ही क्यों याद आए?
तीन वर्षों तक शहर जलजमाव, गंदगी और बदहाल बुनियादी सुविधाओं से जूझता रहा, जबकि अब अचानक नगर निगम की सक्रियता को जनता चुनावी मजबूरी के तौर पर देख रही है।
टैक्स वसूली में Ranchi Nagar Nigam आगे, सुविधाओं में पीछे
Ranchi Nagar Nigam की आय को देखें तो संसाधनों की कभी कमी नहीं रही। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार—
- वित्तीय वर्ष 2024–25 में ₹80 करोड़ से अधिक होल्डिंग टैक्स की वसूली
- वर्ष 2025–26 की पहली तिमाही में ही करीब ₹39 करोड़ का राजस्व संग्रह
- जल कर, ट्रेड लाइसेंस, विज्ञापन शुल्क और अन्य मदों से करोड़ों की अतिरिक्त आमदनी
इतनी भारी वसूली के बावजूद शहर की सड़कें, नालियां और ड्रेनेज सिस्टम आज भी बदहाली की तस्वीर पेश कर रहे हैं। लोग सवाल कर रहे हैं कि टैक्स तो समय पर लिया गया, लेकिन सुविधाएं क्यों नहीं मिलीं?
सीवरेज–ड्रेनेज पर सैकड़ों करोड़ खर्च, नतीजा शून्य!
Ranchi Nagar Nigam द्वारा सबसे ज्यादा खर्च सीवरेज और ड्रेनेज सिस्टम के नाम पर दिखाया गया है। दस्तावेज़ों के मुताबिक—
- अब तक ₹350 से ₹400 करोड़ से अधिक की राशि सीवरेज और ड्रेनेज योजनाओं पर खर्च
- कई इलाकों में नाले ढकने, नए ड्रेनेज चैनल और जल निकासी सुधार परियोजनाएं स्वीकृत
लेकिन ज़मीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट है। आज भी शहर के कई हिस्सों में खुले नाले हैं, हल्की बारिश में ही सड़कें तालाब बन जाती हैं और गंदा पानी घरों तक पहुंच जाता है। नागरिक पूछ रहे हैं—
“अगर सैकड़ों करोड़ खर्च हो चुके हैं, तो बारिश में रांची क्यों डूब जाती है?”
नालियों का पानी क्यों बहता है सड़कों पर?
स्थानीय लोगों और मोहल्ला वासियों का कहना है कि नालियों के ओवरफ्लो होने की सबसे बड़ी वजह नियमित सफाई का अभाव है। उनका आरोप है कि—
- नालियों में कचरा और गाद महीनों तक जमा रहती है
- नगर निगम द्वारा समय पर सफाई नहीं कराई जाती
- प्लास्टिक, पॉलिथीन और निर्माण मलबा नालियों को पूरी तरह जाम कर देता है
नतीजा यह होता है कि थोड़ी सी बारिश में ही नालियों का पानी बाहर आकर सड़कों पर बहने लगता है। लोगों का साफ कहना है कि कागज़ों में सफाई दिखती है, लेकिन ज़मीन पर नहीं।
‘Ramnik Ranchi’ पर करोड़ों, बुनियादी जरूरतें गायब
Ranchi Nagar Nigam की ‘Ramnik Ranchi / रमणीक रांची’ योजना भी सवालों के घेरे में है। इस अभियान के तहत—
- दीवारों पर पेंटिंग
- चौराहों का सौंदर्यीकरण
- सजावटी लाइटिंग और अभियान
पर करोड़ों रुपये खर्च किए गए, जबकि सीवरेज, ड्रेनेज और सड़क जैसी मूलभूत समस्याएं जस की तस बनी रहीं। आरोप है कि दिखावटी विकास को प्राथमिकता दी गई और ज़रूरी कामों को नजरअंदाज किया गया।
चुनाव आते ही बदली तस्वीर
नगर निकाय चुनाव की घोषणा होते ही शहर में अचानक—
- नालियों की सफाई
- सड़कों की त्वरित मरम्मत
- और “जल्द सुधार” के दावे
दिखने लगे हैं। जनता इसे सीधे तौर पर चुनावी दिखावा मान रही है। लोगों का कहना है कि अगर चुनाव नहीं होते, तो यही बदहाली आगे भी जारी रहती।
जनता का सवाल: विकास या चुनावी मजबूरी?
रांची की जनता आज गुस्से और अविश्वास के बीच खड़ी है। उनका कहना है कि—
- टैक्स की वसूली नियमित रही
- खर्च के आंकड़े बड़े बताए गए
- लेकिन सुविधाएं ज़मीनी स्तर पर नहीं मिलीं
करोड़ों की वसूली और सैकड़ों करोड़ के खर्च के बावजूद रांची की ज़मीनी हकीकत नहीं बदली।
अब 36 महीने बाद चुनाव की घोषणा ने नगर निगम को हरकत में तो ला दिया है, लेकिन जनता के मन में यह सवाल और भी तेज़ हो गया है— यह विकास है या सिर्फ़ चुनावी मजबूरी?

विशेष संवाददाता | Khabar Mantra
विकाश कुमार झारखंड के रांची के रहने वाले और यहीं जन्मे पत्रकार एवं डिजिटल मीडिया प्रोफेशनल हैं। झारखंड में लंबे समय से रहने और काम करने के कारण उन्हें राज्य के गांवों, शहरों, स्थानीय समाज, प्रशासन और जमीनी मुद्दों की गहरी समझ है।
5+ वर्षों के पत्रकारिता अनुभव के साथ उन्होंने Gandiva, Lagatar.in, News11 Digital और Prabhat Khabar Digital जैसे मीडिया संस्थानों में काम किया है। वर्तमान में Khabar Mantra Digital में Digital Media Manager-cum-Executive एवं विशेष संवाददाता के रूप में कार्यरत हैं।
वे विशेष रूप से कोयलांचल, BCCL, कोलियरियों, औद्योगिक क्षेत्रों, स्थानीय प्रशासन और जनहित के मुद्दों पर रिपोर्टिंग करते हैं।
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