भारतीय क्रिकेटर रिंकू सिंह (Rinku Singh) के परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। रिंकू सिंह के पिता खानचंद सिंह (Khanchand Singh) का शुक्रवार सुबह करीब 4:36 बजे निधन हो गया। वे 60 वर्ष के थे और लंबे समय से लिवर कैंसर (फोर्थ स्टेज) से जूझ रहे थे। पिता के निधन की खबर मिलते ही रिंकू टी-20 वर्ल्ड कप छोड़कर अलीगढ़ पहुंचे।
Rinku Singh father Death: ग्रेटर नोएडा के अस्पताल में थे भर्ती
मिली जानकारी के अनुसार, कुछ दिन पहले Rinku Singh के पिता खानचंद सिंह की तबीयत ज्यादा बिगड़ गई थी। उन्हें अलीगढ़ से ग्रेटर नोएडा के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहाँ वे वेंटिलेटर सपोर्ट पर थे। इलाज के दौरान शुक्रवार को उन्होंने अंतिम सांस ली।
अलीगढ़ में हुआ अंतिम संस्कार
रिंकू सिंह चेन्नई से सीधे अलीगढ़ अपने घर पहुंचे और पिता की अंतिम यात्रा में शामिल हुए। अलीगढ़ के शंकर विहार स्थित श्मशान घाट पर उनका अंतिम संस्कार किया गया। रिंकू के बड़े भाई सोनू ने पिता को मुखाग्नि दी। रिंकू ने नम आंखों से अपने पिता की अर्थी को कंधा दिया।
देश के लिए कर्तव्य और पिता का प्यार
Rinku Singh पिछले कुछ दिनों से काफी मुश्किल दौर से गुजर रहे थे:
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पिता की हालत नाजुक होने पर रिंकू प्रैक्टिस सेशन छोड़ मंगलवार को नोएडा पहुंचे थे।
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पिता की स्थिति में थोड़ा सुधार देख वे 25 फरवरी को वापस चेन्नई में टीम इंडिया से जुड़े।
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26 फरवरी को जिम्बाब्वे के खिलाफ सुपर-8 मैच में वे प्लेइंग इलेवन का हिस्सा नहीं थे, लेकिन सब्स्टीट्यूट फील्डर के रूप में मैदान पर उतरे।
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शुक्रवार को पिता के निधन की खबर मिलते ही वे दोबारा अलीगढ़ के लिए रवाना हुए।
क्रिकेट जगत में शोक की लहर
Rinku Singh की मंगेतर और मछलीशहर सांसद प्रिया सरोज के पिता तूफानी सरोज ने बताया की प्रिया कई दिनों से रिंकू के परिवार के साथ हैं। वो लेग भी रात में गए थे। वापस आते वक्त रास्ते में निधन की सूचना मिली। रिंकू सिंह के पिता के निधन पर विराट कोहली समेत भारतीय टीम के कई खिलाड़ियों और IPL फ्रेंचाइजियों ने गहरा शोक व्यक्त किया है। रिंकू अक्सर अपनी सफलता का श्रेय अपने पिता के संघर्षों को देते आए हैं, जो सिलेंडर डिलीवरी का काम करके परिवार का पालन-पोषण करते थे।
KKR को दिए एक इंटरव्यू में Rinku Singh ने अपनी जिंदगी के बारे में बात की थी। उन्होंने बताया था कि परिवार में 5 भाई हैं। पापा सिलेंडर डिलीवरी का काम करते थे। हम पांचों भाइयों से भी काम करवाते थे। हम बाइक पर 2-2 सिलेंडर रखकर होटलों और घरों में डिलीवर करने जाते थे। मैच खेलने के लिए पैसे लगते थे। घरवालों से मांगो तो कहते कि पढ़ाई करो। पापा खेलने के लिए मना करते थे, मम्मी सपोर्ट करती थीं।












