Dhanbad: धनबाद सदर अस्पताल की बाउंड्री वॉल तोड़कर अधिवक्ताओं को रास्ता देने के प्रशासनिक निर्णय ने जिले में बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। इस फैसले के विरोध में शनिवार को जिलेभर के सैकड़ों स्वास्थ्यकर्मी सड़कों पर उतर आए। अस्पताल परिसर से रणधीर वर्मा चौक तक निकाले गए विशाल मौन जुलूस ने प्रशासन को साफ संदेश दे दिया कि स्वास्थ्यकर्मी अस्पताल की सुरक्षा से कोई समझौता स्वीकार नहीं करेंगे।
मौन जुलूस में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA), झारखंड स्वास्थ्य संघ समेत लगभग सभी स्वास्थ्य संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए। प्रदर्शन के दौरान माहौल पूरी तरह शांत रहा, लेकिन आक्रोश साफ नजर आया।
“सुरक्षा से समझौता नहीं”
झारखंड स्वास्थ्य संघ के सदस्य संजय सहाय ने कहा कि सदर अस्पताल की बाउंड्री वॉल मरीजों और स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा को ध्यान में रखकर बनाई गई है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का हवाला देते हुए कहा कि अस्पताल परिसर की सुरक्षा किसी भी स्थिति में कमजोर नहीं की जा सकती।
वहीं, सदर अस्पताल की चिकित्सक डॉ. रेखा नायक ने स्पष्ट किया कि अधिवक्ताओं को पहले ही वैकल्पिक भूमि आवंटित की जा चुकी है। इसके बावजूद अस्पताल परिसर से रास्ता लेने की मांग नियमों और कानून के खिलाफ है।
आपात सेवाएं जारी
IMA अध्यक्ष डॉ. ए.के. सिंह ने कहा कि स्वास्थ्यकर्मियों का आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण है। मरीजों की सुविधा को देखते हुए आपातकालीन सेवाएं प्रभावित नहीं की गई हैं। केवल नियमित सेवाओं से जुड़े स्वास्थ्यकर्मी ही विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए हैं।
वकीलों की हड़ताल से चुनाव प्रक्रिया ठप
इधर, अधिवक्ताओं की हड़ताल का सीधा असर नगर निकाय चुनाव की नामांकन प्रक्रिया पर पड़ रहा है। 29 जनवरी से शुरू हुई नामांकन प्रक्रिया के पहले दो दिनों में जिले में सिर्फ तीन प्रत्याशियों ने ही नामांकन दाखिल किया है।
शपथ-पत्र और अन्य कानूनी दस्तावेज तैयार न हो पाने के कारण कई प्रत्याशी निराश होकर लौट रहे हैं। नामांकन की अंतिम तिथि 4 फरवरी है, ऐसे में समय तेजी से निकल रहा है।
प्रशासन के सामने दोहरी चुनौती
एक ओर अस्पताल की सुरक्षा को लेकर स्वास्थ्यकर्मियों का विरोध, दूसरी ओर चुनावी प्रक्रिया पर पड़ता असर—प्रशासन के लिए दोनों के बीच संतुलन बनाना बड़ी चुनौती बन गया है। यदि जल्द समाधान नहीं निकला, तो जिले में हालात और बिगड़ सकते हैं।












