Salman Khan की फिल्म ‘मातृभूमि’ (Battle of Galwan) की रिलीज डेट अभिनेता प्रशांत तमांग के निधन और शूटिंग अधूरी रहने की वजह से रिलीज की डेट आगे बढ़ा दी गई है।
क्यों टली Salman Khan की फिल्म ‘मातृभूमि‘ की रिलीज?
बॉलीवुड सुपरस्टार सलमान खान (Salman Khan) की मच-अवेटेड फिल्म ‘मातृभूमि: मे वॉर रेस्ट इन पीस’ (पूर्व नाम: बैटल ऑफ गलवान) की रिलीज को लेकर बड़ी खबर आ रही है। फिल्म के मुख्य खलनायक (Main Villain) और ‘इंडियन आइडल 3’ के विजेता प्रशांत तमांग (Prashant Tamang) के अचानक निधन की वजह से फिल्म की शूटिंग और रिलीज डेट लटक गई है।
प्रशांत तमांग का अधूरा किरदार
प्रशांत तमांग फिल्म में एक बेहद अहम खलनायक की भूमिका निभा रहे थे। रिपोर्ट्स के अनुसार प्रशांत ने फिल्म की 50% शूटिंग पूरी कर ली थी। जनवरी में उनके निधन के कारण कई महत्वपूर्ण एक्शन सीक्वेंस और क्लोज-अप शॉट्स अधूरे रह गए हैं। मेकर्स के लिए किरदार को बदलना (Recast) आर्थिक और लॉजिस्टिक रूप से काफी महंगा साबित हो रहा है।
क्या AI और VFX का सहारा लेंगे मेकर्स?
इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रोडक्शन टीम अब वैकल्पिक समाधानों पर विचार कर रही है:
- AI और VFX तकनीक: प्रशांत तमांग के अधूरे दृश्यों को पूरा करने के लिए परिवार की अनुमति के बाद उनके चेहरे को डिजिटल रूप से रिक्रिएट किया जा सकता है।
- रीशूट की समस्या: सलमान खान की व्यस्तता और उनके ‘लुक की कंटिन्यूटी’ की वजह से दोबारा शूटिंग करना फिलहाल मुश्किल नजर आ रहा है।
फिल्म का निर्देशन अपूर्व लाखिया कर रहे हैं और इसे सलमान खान फिल्म्स के बैनर तले बनाया जा रहा है।
‘मातृभूमि‘ की नई रिलीज डेट क्या है?
पहले यह फिल्म 17 अप्रैल को सिनेमाघरों में दस्तक देने वाली थी। लेकिन वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए फिल्म की रिलीज को आगे बढ़ाने की खबरें आ रही है।
सूत्रों का दावा है कि फिल्म के विषय (देशभक्ति और गलवान युद्ध) को देखते हुए मेकर्स इसे स्वतंत्रता दिवस (15 अगस्त) के मौके पर रिलीज करने की योजना बना रहे हैं। हालांकि मेकर्स की ओर से अभी नई तारीख का औपचारिक ऐलान होना बाकी है।
फिल्म का नाम क्यों बदला गया?
पहले इस प्रोजेक्ट का नाम ‘बैटल ऑफ गलवान’ रखा गया था। हालांकि, मेकर्स ने बाद में इसे बदलकर ‘मातृभूमि: मे वॉर रेस्ट इन पीस’ (Matrubhumi: May War Rest in Peace) कर दिया। प्रोडक्शन टीम का मानना है कि नया शीर्षक फिल्म की कहानी के गहरे जज्बातों और युद्ध के बीच छिपे ‘इंसानियत के संदेश’ को ज्यादा मजबूती से पेश करता है। यह फिल्म सिर्फ एक जंग की गाथा नहीं, बल्कि शांति और मातृभूमि के प्रति संवेदनाओं की कहानी है।













