National News: देशभर के 11 सरकारी बैंकों ने पिछले 5 वर्षों में ग्राहकों से करीब ₹9,000 करोड़ की पेनल्टी वसूली है, वह भी सिर्फ सेविंग अकाउंट में मिनिमम एवरेज बैलेंस (MAB) मेंटेन नहीं करने के कारण. ये जानकारी वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने राज्यसभा में एक लिखित जवाब के दौरान दी.
कुछ बैंकों ने यह पेनल्टी मासिक आधार पर ली, जबकि अन्य ने तिमाही आधार पर वसूली की है.
किन खातों को मिली है छूट?
हालांकि, सरकार की ओर से यह स्पष्ट किया गया है कि प्रधानमंत्री जनधन योजना के खाते, बेसिक सेविंग बैंक डिपॉजिट अकाउंट (BSBDA) और सैलरी अकाउंट इस पेनल्टी से छूट प्राप्त खाते हैं. इन पर मिनिमम बैलेंस मेंटेन करने की कोई अनिवार्यता नहीं है.
निजी बैंक नहीं मान रहे DFS की सलाह
डिपार्टमेंट ऑफ फाइनेंशियल सर्विसेज (DFS) ने सभी बैंकों को सलाह दी है कि वे ग्राहकों से ली जाने वाली पेनल्टी को तर्कसंगत बनाएं, खासकर ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों के लोगों को राहत देने पर जोर दिया गया है.
हालांकि, रिपोर्ट के मुताबिक केवल 7 सरकारी बैंकों ने इस सलाह का पालन किया है, जबकि बाकी 4 बैंकों ने जल्द पालन करने का आश्वासन दिया है.
निजी बैंक अब भी इस गाइडलाइन की अनदेखी कर मिनिमम बैलेंस चार्ज वसूल रहे हैं.
क्या कहती है RBI की गाइडलाइन?
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की गाइडलाइंस के अनुसार:
- बैंक अपनी बोर्ड द्वारा मंजूर नीति के अनुसार पेनल्टी तय कर सकते हैं.
- यह जुर्माना खाते के न्यूनतम आवश्यक बैलेंस और वास्तविक बैलेंस के बीच के अंतर पर एक निश्चित प्रतिशत के रूप में वसूला जा सकता है.













