रांची: झारखंड की राजधानी में मानसून की पहली बारिश ने ही रिम्स (राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान) की पोल खोल दी है. गुरुवार को रुक-रुक कर हुई बारिश के बाद रिम्स परिसर के बेसमेंट और ग्राउंड फ्लोर में भीषण जलजमाव हो गया, जिससे अस्पताल की सामान्य कार्यप्रणाली बुरी तरह प्रभावित हुई.
इलाज पर असर, संक्रमण का खतरा
जलभराव की सबसे गंभीर मार अस्थि एवं जोड़ रोग विभाग के ऑपरेशन थिएटर, इनडोर वार्ड, त्वचा रोग विभाग और आइसोलेशन यूनिट पर पड़ी है. गंदे पानी के बीच मरीजों, तीमारदारों और मेडिकल स्टाफ को आना-जाना पड़ रहा है. फर्श पर पानी भरने से संक्रमण का खतरा बढ़ गया है, वहीं महंगे उपकरणों की सुरक्षा भी दांव पर लग गई है.
रिम्स निदेशक का फूटा गुस्सा
रिम्स निदेशक प्रो. डॉ. राजकुमार ने इस हालत को लेकर पीएचईडी विभाग पर नाराजगी जताई है. उन्होंने कहा कि “कई बार चेताया गया, लेकिन विभाग की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया. यह लापरवाही केवल अव्यवस्था नहीं, बल्कि हजारों मरीजों के जीवन से खिलवाड़ है.”
हर साल दोहराई जाती है वही कहानी
अस्पताल प्रशासन के अनुसार, हर मानसून में रिम्स में जलजमाव की स्थिति बनती है. यह समस्या पीएचईडी विभाग की लंबे समय से चली आ रही उपेक्षा और खराब इंफ्रास्ट्रक्चर का परिणाम है.
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अस्पताल जैसी संवेदनशील जगह पर जलजमाव न केवल स्वच्छता और सुरक्षा मानकों की अनदेखी है, बल्कि यह इमरजेंसी सेवाओं और इलाज की प्रक्रिया में भी गंभीर बाधा बन रहा है.
अब देखना यह होगा कि क्या रिम्स प्रशासन और पीएचईडी विभाग इस समस्या का स्थायी समाधान खोजने की दिशा में कोई ठोस कदम उठाते हैं या मरीजों की परेशानी यूं ही हर साल बारिश के साथ बढ़ती रहेगी.
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