रांची: खुद खाएं तो मलाई, दूसरों के हिस्से में आए तो भ्रष्टाचार और जगहंसाई । हालांकि यह व्यंग है लेकिन झारखंड में इसकी चर्चा खूब हो रही है। दरअसल राज्य की सियासत में एक बार फिर धर्म और आस्था को लेकर राजनीतिक पारा चढ़ गया है। फिलहाल यह मलाई कौन खा रहे थे और दूसरों के हिस्से में आने के बाद यह भ्रष्टाचार की मलाई कैसे बन गई। यह आप खुद ब खुद जान जाएंगे और स्वंय ही इसका विश्लेषण कर लेंगे।
श्रद्धालुओं से वसूले जा रहे 5 रुपए का शुल्क
दरअसल भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने मंगलवार को प्रेस वार्ता कर दलमा स्थित शिव मंदिर में श्रद्धालुओं से वसूले जा रहे 5 रुपए के शुल्क को लेकर हेमंत सरकार पर हमला बोला। उन्होंने इसे तुगलकी फरमान बताते हुए सरकार पर आस्था के साथ खिलवाड़ का आरोप लगाया। प्रतुल शाहदेव ने कहा कि सावन के महीने में हजारों श्रद्धालु दलमा स्थित शिव मंदिर में दर्शन के लिए पहुंचते हैं, और वहां उनसे 5 रुपए की जबरन वसूली की जा रही है। भाजपा ने इसे धार्मिक भावनाओं पर प्रहार बताया।
लेकिन जब इस मामले पर खबर मंत्र ने दलमा के डीएफओ सबा आलम से बात की, तो उन्होंने साफ किया कि यह शुल्क नया नहीं है। उनसे बात चीत के दौरान यह जानकारी मिली कि पूर्ववर्ती भाजपा शासनकाल के दौरान भी श्रद्धालुओं से यह शुल्क लिया जाता था। बल्कि पहले पैदल यात्रियों से 10 रुपए वसूले जाते थे, लेकिन सावन को देखते हुए अब मात्र 5 रुपए लिए जा रहे हैं।
“कफन पर टैक्स लगाने वाले आज कर रहे हैं आस्था की बात”
इस पर झारखंड मुक्ति मोर्चा ने पलटवार किया है। पार्टी प्रवक्ता विनोद पांडेय ने कहा, भाजपा को जब सत्ता में रहने के दौरान यही टैक्स सही लगता था, तो अब इसमें राजनीति क्यों की जा रही है? भाजपा जानबूझकर धार्मिक भावनाओं को भड़का रही है, जबकि हेमंत सरकार श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए लगातार कार्य कर रही है। दलमा क्षेत्र में रास्तों का विकास, पानी और स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाएं सुनिश्चित की गई हैं। उन्होंने ने भाजपा पर तीखा हमला बोलते हुए कहा, जिन्होंने शासनकाल में कफन और पूजा सामग्री तक पर टैक्स लगाया, वे आज आस्था के नाम पर राजनीति कर रहे हैं। यह हास्यास्पद है।
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