Jharkhand: भारत सरकार द्वारा गठित सोलहवें वित्त आयोग ने वित्तीय सुझावों और ज्ञापन प्रस्तुत करने की प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करने के लिए विस्तृत दिशानिर्देश जारी किए हैं। यह आयोग भारतीय संविधान के अनुच्छेद 280 के तहत गठित एक संवैधानिक निकाय है जिसका मुख्य उद्देश्य केंद्र और राज्यों के बीच करों के बंटवारे, अनुदानों, और वित्तीय हस्तांतरण की प्रक्रिया को पारदर्शी और न्यायपूर्ण बनाना है।
आयोग की मुख्य जिम्मेदारियां
ऊर्ध्वगामी और क्षैतिज हस्तांतरण
आयोग केंद्र शासित प्रदेशों और राज्यों को मिलने वाली कर संचित निधि का वितरण करता है। इसमें राज्यों के बीच जनसंख्या, भौगोलिक क्षेत्रफल, प्रति व्यक्ति आय, और प्रशासनिक क्षमता जैसे मापदंडों को ध्यान में रखकर अनुपात तय किया जाता है।
2015-16 से 2019-20 तक की अवधि में यह हिस्सा 42% था, जिसे सोलहवें वित्त आयोग (2020-21 से 2025-26) में बढ़ाकर 41% कर दिया गया है।
सहायता अनुदान
स्थानीय निकायों के विकास और राज्यों की आपदा प्रबंधन क्षमताओं को सुदृढ़ करने के लिए आयोग विभिन्न प्रकार के अनुदान भी प्रदान करता है। इनमें शामिल हैं:
- सामान्य सहायता अनुदान
- ग्राम और शहरी निकायों के लिए अनुदान
- आपदा प्रबंधन हेतु अनुदान
- शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्रीय अनुदान
ज्ञापन प्रस्तुत करने के दिशा-निर्देश
सोलहवें वित्त आयोग के समक्ष ज्ञापन देने वाले व्यक्तियों और संस्थानों को निम्नलिखित दिशा-निर्देशों का पालन करना आवश्यक है:
- बैठक से पूर्व TOR (Terms of Reference) को ध्यानपूर्वक पढ़ें।
- अपनी प्रस्तुति लिखित रूप में तैयार करें।
- आयोग से संपर्क के लिए SPOC (विशिष्ट संपर्क अधिकारी) की पहचान करें।
- समय पर बैठक स्थल पर पहुँचें और पंजीकरण कराएं।
- बैठक के दौरान मोबाइल बंद रखें और विषय से संबंधित मुद्दों पर ही बोलें।
क्या न करें?
- अपनी बारी का धैर्यपूर्वक इंतजार करें।
- यदि बैठक शुरू हो चुकी हो तो हॉल में प्रवेश न करें।
- किसी भी असुविधा की स्थिति में शांति बनाए रखें।
- नकारात्मकता या अनुशासनहीनता का प्रदर्शन न करें।
आयोग के लिए संदर्भ की शर्तें
वित्त आयोग निम्नलिखित विषयों पर सुझाव देगा:
- केंद्र और राज्यों के बीच करों का विभाजन
- राज्यों के लिए सहायता अनुदान की प्रक्रिया
- स्थानीय निकायों के लिए धनराशि का आवंटन
- आपदा प्रबंधन की वित्तीय योजना
सोलहवां वित्त आयोग एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है जो भारत के संघीय ढांचे में वित्तीय न्याय को सुनिश्चित करता है। सभी व्यक्तियों और संस्थाओं से अपेक्षा की जाती है कि वे आयोग के समक्ष विषयवस्तु से संबंधित, तथ्यात्मक और सार्थक सुझाव प्रस्तुत करें, जिससे देश की आर्थिक योजना और नीतियों को मजबूती मिले।












