गिरिडीह: देशभर में मज़दूरों के हक और अधिकारों की लड़ाई को लेकर एक बार फिर से मज़दूर संगठनों ने हुंकार भरी है। गिरिडीह में 20 मई को प्रस्तावित राष्ट्रव्यापी हड़ताल को लेकर व्यापक तैयारियाँ चल रही हैं। मज़दूर संगठनों ने मोदी सरकार की मज़दूर-विरोधी नीतियों के खिलाफ चक्का जाम, मशाल जुलूस और विरोध कार्यक्रमों की घोषणा की है।
यह आंदोलन भाकपा (माले) और असंगठित मज़दूर मोर्चा के नेतृत्व में आयोजित किया जा रहा है। संगठन के नेताओं ने जानकारी दी कि जिले के मुफ्फसिल क्षेत्र समेत सभी प्रखंडों में विरोध-प्रदर्शन किए जाएंगे।
मज़दूर नेता राजेश सिन्हा और कन्हाई पांडेय ने कहा कि सरकार लेबर कोड के नाम पर मज़दूरों पर गुलामी थोप रही है। सार्वजनिक संपत्तियों को कॉरपोरेट घरानों, खासकर अडाणी समूह, को बेचा जा रहा है। इसके चलते छंटनी, ठेका प्रथा और बेरोज़गारी जैसे मुद्दे लगातार बढ़ रहे हैं। आंदोलन में किसानों की ज़मीन जबरन छीने जाने और शिक्षा के निजीकरण के खिलाफ भी आवाज़ बुलंद की जाएगी।
हाल ही में महुआ टॉड में हुई एक अहम बैठक में दर्जनों ग्रामीण मज़दूरों ने भाग लिया और आंदोलन को सफल बनाने का संकल्प लिया। सभी ने एकजुट होकर सरकार की नीतियों का विरोध करने की बात कही और मजदूर एकता को मजबूत करने पर ज़ोर दिया।
20 मई को गिरिडीह में यह हड़ताल मज़दूरों के संघर्ष और सरकार की जनविरोधी नीतियों के खिलाफ एक बड़ा संदेश बन सकती है।












