New Delhi: 9 अगस्त को मनाए जाने वाले विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर इस वर्ष भारत के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और विपक्ष के नेता द्वारा देश के 15 करोड़ से अधिक आदिवासियों को कोई बधाई संदेश नहीं दिया गया। इस पर देशभर के आदिवासी समुदाय ने गहरी नाराज़गी जताई है।
राष्ट्रीय आदिवासी समन्वय समिति भारत के देवकुमार धान ने कहा कि यह बेहद दुखद और निंदनीय है कि आदिवासी समुदाय से आने वाली देश की वर्तमान राष्ट्रपति महामहिम द्रौपदी मुर्मू ने भी इस अवसर पर आदिवासियों को शुभकामनाएं देना जरूरी नहीं समझा।
उन्होंने याद दिलाया कि पूर्व राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल, जो आदिवासी नहीं थीं, ने 9 अगस्त 2011 को छत्तीसगढ़ में आयोजित विश्व आदिवासी दिवस के मौके पर आदिवासी समाज को हार्दिक शुभकामनाएं दी थीं। लेकिन आज, एक आदिवासी राष्ट्रपति होते हुए भी ऐसा नहीं हुआ।
देवकुमार धान ने कहा कि यह चुप्पी आदिवासी समाज के आत्मसम्मान पर आघात है और देशभर का आदिवासी समुदाय इस पर अपनी नाराज़गी व्यक्त करता है।
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