Ranchi: राजधानी रांची के रातू रोड स्थित आरआर स्पोर्टिंग क्लब दुर्गा पूजा पंडाल को लेकर भारी विवाद खड़ा हो गया है। इस साल समिति ने करीब 78 लाख रुपये की लागत से वेटिकन सिटी थीम पर भव्य पंडाल तैयार किया था। लेकिन पंडाल में ईसाई धर्म के प्रतीक और मूर्तियां देखने के बाद स्थानीय लोग और हिंदू संगठनों ने तीखी आपत्ति जताई। मामला इतना बढ़ा कि विश्व हिंदू परिषद (विहिप) ने इसे हिंदुओं की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने और धर्मांतरण को बढ़ावा देने की साजिश करार दिया।
विरोध के बाद हुए बदलाव
विरोध बढ़ने पर समिति ने पंडाल में तत्काल कुछ बदलाव किए। जहां पहले जीसस और रोमन-ग्रीक देवताओं की तस्वीरें लगी थीं, वहां अब भगवान कृष्ण की तस्वीरें लगा दी गईं। हालांकि, सवाल अब भी बाकी हैं – आखिर पंडाल को वेटिकन सिटी की थीम पर बनाने की ज़रूरत क्यों पड़ी?
अध्यक्ष और सलाहकार के बयानों में टकराव
दिलचस्प बात यह है कि क्लब के अध्यक्ष विक्की यादव और मुख्य सलाहकार के बयान आपस में मेल नहीं खाते।
- अध्यक्ष विक्की यादव का कहना है कि “हम हर साल किसी खास थीम पर पंडाल बनाते हैं। इस बार हमने 2022 में कोलकाता के श्रीभूमि स्पोर्टिंग क्लब की तर्ज़ पर वेटिकन सिटी थीम दोहराई है। हमारा मकसद विभिन्न धर्मों का सम्मान करना है।”
- वहीं, मुख्य सलाहकार ने विवाद के पहले दिन हमारे संवाददाता से बातचीत में कहा था – “हम उस देश के वासी हैं, जहां आदिवासी रहते हैं। पंडाल देखकर आदिवासी खुश होंगे।” जब उनसे पूछा गया कि क्या आदिवासी चर्च जाकर पूजा करते हैं, तो उन्होंने तंज भरे अंदाज़ में जवाब दिया – “इससे हमें क्या करना है?”
इन दोनों बयानों ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। अध्यक्ष जहां धार्मिक सौहार्द की बात कर रहे हैं, वहीं सलाहकार आदिवासियों को खुश करने की दलील दे रहे हैं। आखिर सच कौन बोल रहा है?
विहिप का कड़ा रुख
विहिप के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने कहा – “पूजा पंडाल में ईसाई प्रतीक और मदर मैरी की तस्वीरें लगाना हिंदुओं की भावनाओं को आहत करने जैसा है। अगर समिति धर्मनिरपेक्षता दिखाना चाहती है, तो क्या चर्च या मदरसे के कार्यक्रम में हिंदू देवी-देवताओं की तस्वीरें लगाई जाएंगी?” उन्होंने पंडाल से ईसाई प्रतीकों को पूरी तरह हटाने की मांग की है।
सवाल बरकरार
हालांकि पंडाल में बदलाव कर दिए गए हैं, लेकिन विवाद थमा नहीं है। बड़ा सवाल ये है कि –
- क्या आयोजकों का मकसद सौहार्द दिखाना था या आदिवासियों को लुभाना?
- अध्यक्ष और सलाहकार के विरोधाभासी बयान क्या किसी बड़े एजेंडे की ओर इशारा कर रहे हैं?
- और क्या दुर्गा पूजा जैसे धार्मिक उत्सव में दूसरी धर्म की थीम सही ठहराई जा सकती है?
फिलहाल, रातू रोड का यह पंडाल सिर्फ पूजा का नहीं, बल्कि राजनीति और धर्म की बहस का भी केंद्र बन गया है।

विशेष संवाददाता | Khabar Mantra
विकाश कुमार झारखंड के रांची के रहने वाले और यहीं जन्मे पत्रकार एवं डिजिटल मीडिया प्रोफेशनल हैं। झारखंड में लंबे समय से रहने और काम करने के कारण उन्हें राज्य के गांवों, शहरों, स्थानीय समाज, प्रशासन और जमीनी मुद्दों की गहरी समझ है।
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