Jharkhand : दशहरा पर देशभर में अलग-अलग मान्यताएं मानी जाती है। झारखंड के संथाल में भी महिषासुर को मानने की अनोखी परंपरा चली आ रही रही है। परंपरा के अनुसार संथाल के आदिवासी समाज मां दुर्गा के बजाय महिषासुर को पूजते हैं।
संथाल आदिवासी समाज के लोग पूजा पंडालों में जाते हैं
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार गोड्डा में विजयदशमी के दिन संथाल आदिवासी समाज के लोग पूजा पंडालों में जाते हैं। इस दौरान वो पंडाल में उपस्थित लोगों से पूछते हैं कि बताओ बताओ मेरा राजा महिषा कहां गया। उनका मानना है कि उनके राजा महिषासुर का वध छल से कर दिया गया है।
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“महिषासुर का असली नाम महिषा सोरेन है”
संथाल के आदिवासियों का मानना है कि महिषासुर का असली नाम महिषा सोरेन है और वे उनके पुरखे और पूर्वज हैं। महिषासुर का वध छल से मां दुर्गा द्वारा कर दिया गया है। इससे आदिवासी नाराज होकर आते हैं और महिषासुर की तलाश करते हैं। पूजा पंडाल में पुजारी उन्हें गंगाजल और तुलसी देकर शांत करवाते हैं।












