Jharkhand: जंगलों की अंधाधुंध कटाई के कारण मनुष्य और जंगली जानवरों के बीच संघर्ष लगातार बढ़ता जा रहा है। फसलों, मकानों और कभी-कभी जानमाल की हानि तक होने लगी है। यह बातें झारखंड की कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने बेड़ो में आयोजित जंगली जानवरों से हुए फसल एवं मकान क्षति के मुआवजा वितरण सह पर्यावरण जागरूकता कार्यक्रम के दौरान कहीं।
कार्यक्रम का आयोजन रांची वन रोपण प्रक्षेत्र, बेड़ो के तहत किया गया था। इस दौरान बेड़ो, इटकी और लापुंग प्रखंड के कई भुक्तभोगी परिवारों को मुआवजा राशि से संबंधित डिमांड ड्राफ्ट सौंपे गए।
मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने कहा कि, “कटते जंगलों के कारण जंगली जानवर अपने आवास से बेघर हो रहे हैं और अब रिहायशी इलाकों की ओर रुख कर रहे हैं। इससे न सिर्फ फसल और संपत्ति का नुकसान हो रहा है, बल्कि कई बार जानें भी जा रही हैं। सरकार की ओर से दी जाने वाली मुआवजा राशि इस दर्द को कम करने का प्रयास है।”
उन्होंने आगे कहा कि “जंगल है तो जमीन है, जमीन है तो जीवन है। जीवन के साथ परंपरा और संस्कृति जुड़ी हुई है। जहां आदिवासी समाज है, वहीं जंगल सुरक्षित हैं। इसलिए हमें जंगलों और ग्रामीणों दोनों की सुरक्षा के लिए मिलकर काम करना होगा।”
मंत्री ने वन विभाग के अधिकारियों से आग्रह किया कि वे आदिवासी समाज की रीति-रिवाज और पर्यावरणीय परंपराओं को समझें। उन्होंने कहा कि कई बार केवल पेड़ की टहनियाँ लाने पर ग्रामीणों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर दिया जाता है, जो ग्रामीण जनता के साथ अन्याय है।
कार्यक्रम में रांची वन प्रमंडल पदाधिकारी श्रीकांत वर्मा, उप प्रमुख मुद्दसिर हक, प्रखंड अध्यक्ष करमा उरांव, रमेश महली, संतोष तिर्की, संजय कच्छप, नवल सिंह, पंचू मिंज, अब्दुल्ला गोरख नाथ यादव, बेड़ो प्रखंड पदाधिकारी और अंचलाधिकारी सहित कई जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।

विशेष संवाददाता | Khabar Mantra
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