Jharkhand News: झारखंड में धान अधिप्राप्ति योजना के तहत हो रही अनियमितताओं के मुद्दे को लेकर नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने गुमला जिले में लैम्पस के माध्यम से धान खरीद में हुए कथित भ्रष्टाचार की जांच रिपोर्ट के आधार पर दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों पर FIR दर्ज करने की मांग की है।
बाबूलाल मरांडी ने अपने पत्र में कहा है…
मरांडी ने अपने पत्र में कहा है कि पिछले वर्ष गुमला जिले में किसानों के हित में चलाई जा रही धान अधिप्राप्ति योजना में बड़े पैमाने पर अनियमितता हुई। जिला आपूर्ति पदाधिकारी, प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी, लैम्पस अध्यक्ष व सचिव और राज्य खाद्य निगम में कार्यरत कंप्यूटर ऑपरेटर की मिलीभगत से वास्तविक किसानों को लाभ नहीं मिला, बल्कि बिचौलियों और अपने परिचितों को फायदा पहुंचाया गया। आरोप है कि ई-उपार्जन पोर्टल पर पंजीकृत किसानों का अंचल स्तर पर भूमि सत्यापन किए बिना ही भुगतान कर दिया गया।
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जांच रिपोर्ट में धान खरीद में भारी अनियमितता की पुष्टि
उन्होंने बताया कि किसानों की शिकायत पर उपायुक्त गुमला ने अपर समाहर्ता की अध्यक्षता में एक जांच समिति गठित की थी। जांच रिपोर्ट में धान खरीद में भारी अनियमितता की पुष्टि हुई और दोषी अधिकारियों व कर्मचारियों को निलंबित करने व कार्रवाई की अनुशंसा की गई। बावजूद इसके अब तक किसी पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है, जो बेहद गंभीर विषय है।
प्रति क्विंटल 600 से 700 रुपये तक का गबन
मरांडी ने आरोप लगाया कि पालकोट अंचल सहित विभिन्न लैम्पसों में किसानों की वास्तविक जमीन से अधिक रकबा दिखाकर धान की खरीद दर्शाई गई और प्रति क्विंटल 600 से 700 रुपये तक का गबन किया गया। उन्होंने कहा कि राज्यभर से किसानों से ऐसी ही शिकायतें मिल रही हैं, जिससे यह एक संगठित घोटाले की ओर इशारा करता है।
उन्होंने मुख्यमंत्री से मांग की कि गुमला मामले में दोषियों को सेवा से बर्खास्त किया जाए और पूरे राज्य में धान खरीद प्रक्रिया की सख्त निगरानी सुनिश्चित की जाए, ताकि वास्तविक किसानों को लाभ मिले और बिचौलियों की भूमिका समाप्त हो सके।












