Ranchi: Ranchi Nagar Nigam में इस बार लड़ाई पोस्टर, बैनर और नारों से कहीं आगे निकल चुकी है। बाहर से देखने पर मामला मेयर और डिप्टी मेयर का लगता है, लेकिन अंदरखाने सियासत की असली पटकथा वार्डों के अंकगणित से लिखी जा रही है। यही वजह है कि बड़े दावों और सार्वजनिक बयानों के बीच राजनीतिक दल भीतर ही भीतर जोड़-घटाव में जुटे हुए हैं।
सियासी गलियारों में चर्चा है कि Ranchi Nagar Nigam के कुल वार्डों में से करीब आधे वार्डों में भाजपा समर्थित पार्षदों की स्थिति मजबूत मानी जा रही है, जबकि शेष वार्डों में कांग्रेस और झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) मुकाबले को त्रिकोणीय बना रहे हैं। ऐसे में यह चुनाव किसी एक चेहरे से ज्यादा संख्याबल और रणनीति का इम्तिहान बनता दिख रहा है।
वार्ड तय करेंगे मेयर और डिप्टी मेयर की दिशा
Ranchi Nagar Nigam चुनाव की सबसे अहम सच्चाई यही है कि मेयर और डिप्टी मेयर का चुनाव सीधे पार्षदों के समर्थन से जुड़ा होता है। यही कारण है कि हर पार्टी की नजर वार्ड स्तर पर है। सियासी विश्लेषकों के मुताबिक, जिस दल या गठबंधन के पास कम से कम 27 पार्षदों का भरोसा होगा, उसकी स्थिति निर्णायक मानी जाएगी।
भाजपा को लेकर माना जा रहा है कि शहरी इलाकों के कई वार्डों में उसकी पकड़ पहले से मजबूत रही है। वहीं कांग्रेस ग्रामीण और आदिवासी प्रभाव वाले इलाकों में अपने पुराने आधार के सहारे वापसी की कोशिश में जुटी है। झामुमो की भूमिका सीमित वार्डों तक भले हो, लेकिन सत्ता संतुलन में उसका समर्थन अहम माना जा रहा है।
मेयर पद को लेकर पुराने नाम, नई रणनीति
मेयर पद को लेकर राजनीतिक चर्चाओं में एक बार फिर आशा लकड़ा का नाम सामने आ रहा है। माना जा रहा है कि उनका पिछला कार्यकाल और संगठनात्मक पकड़ भाजपा के लिए मजबूत आधार बन सकता है। हालांकि पार्टी की ओर से अब तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
दूसरी ओर कांग्रेस खेमे में समा खलखो को लेकर चर्चाएं तेज हैं। पार्टी से जुड़े सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस इस बार सिर्फ चुनाव लड़ने नहीं, बल्कि सत्ता समीकरण बदलने के इरादे से मैदान में उतर सकती है। यही वजह है कि पार्टी मेयर और डिप्टी मेयर दोनों पदों पर संतुलित रणनीति पर काम कर रही है।
डिप्टी मेयर: असली ‘पावर सेंटर’?
इस चुनाव में डिप्टी मेयर का पद भी उतना ही अहम माना जा रहा है जितना मेयर का। सियासी जानकारों का कहना है कि यदि किसी पार्टी को मेयर पद पर स्पष्ट बढ़त नहीं मिलती, तो डिप्टी मेयर की कुर्सी सत्ता संतुलन का केंद्र बन सकती है। यही कारण है कि कई वार्डों में अंदरूनी समीकरण और व्यक्तिगत रिश्ते भी बड़ी भूमिका निभा सकते हैं।
एक ही वार्ड में आमने-सामने हो सकते हैं दिग्गज
Ranchi Nagar Nigam की नियमावली और आरक्षण व्यवस्था के चलते इस बार कुछ वार्डों में एक ही पार्टी के कई कद्दावर नेता आमने-सामने चुनाव लड़ते नजर आ सकते हैं। इससे न सिर्फ मुकाबला रोचक होगा, बल्कि पार्टी के भीतर की राजनीति भी खुलकर सामने आ सकती है। ऐसे हालात में क्रॉस वोटिंग और अप्रत्याशित नतीजों की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
फिलहाल सस्पेंस कायम, लेकिन तस्वीर धीरे-धीरे साफ
हालांकि किसी भी दल ने अभी तक अपने पत्ते पूरी तरह नहीं खोले हैं, लेकिन इतना साफ है कि Ranchi Nagar Nigam चुनाव आखिरी वक्त तक सस्पेंस बनाए रख सकता है। वार्डों के आंकड़े इशारा कर रहे हैं कि यह मुकाबला आसान नहीं होगा और हर पार्षद की भूमिका निर्णायक साबित हो सकती है।
अंततः यह कहना गलत नहीं होगा कि इस बार Ranchi Nagar Nigam चुनाव चेहरों से ज्यादा गणित, रणनीति और गठजोड़ की परीक्षा है—जहां जीत उसी की होगी, जिसने वार्डों की चाल सही समय पर समझ ली।













