Big Breaking : उन्नाव रेप केस में एक बार फिर न्याय की उम्मीद मजबूत होती दिखी है। सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व भाजपा विधायक कुलदीप सिंह सेंगर की जमानत पर फिलहाल रोक लगा दी है। अदालत ने साफ किया कि जब तक इस मामले की पूरी सुनवाई नहीं हो जाती, तब तक सेंगर जेल से बाहर नहीं आएगा। शीर्ष अदालत इस मामले की अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद करेगी।
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सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान देश की सर्वोच्च अदालत ने दिल्ली हाईकोर्ट के उस आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी, जिसमें सेंगर की उम्रकैद की सजा को निलंबित कर जमानत दी गई थी। यह फैसला सुनाते हुए मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि मामला बेहद गंभीर है और इसमें गहन कानूनी विचार की जरूरत है।
Big Breaking : यह केवल एक अपराध नहीं-सुप्रीम कोर्ट का कड़ा रुख
सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि यह केवल एक अपराध नहीं, बल्कि कानून और समाज दोनों के लिए गंभीर चुनौती है। उन्होंने कहा कि रेप और पॉक्सो जैसे मामलों में न्यूनतम सजा 20 साल तय है, जो उम्रकैद तक जा सकती है। अदालत ने इस बिंदु पर सवाल उठाते हुए यह भी स्पष्ट किया कि पीड़िता की उम्र और आरोपी की हैसियत दोनों ही इस केस को और संवेदनशील बनाते हैं।
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कोर्ट ने यह भी चिंता जताई कि पॉक्सो कानून में ‘लोक सेवक’ की परिभाषा को लेकर असमानता क्यों दिखाई देती है। अदालत ने पूछा कि जब एक पुलिसकर्मी को लोक सेवक माना जाता है, तो एक निर्वाचित जनप्रतिनिधि इस दायरे से बाहर कैसे हो सकता है।
Big Breaking : दिल्ली हाईकोर्ट ने सेंगर को दी थी जमानत
इस बीच, दिल्ली में पीड़िता के समर्थन में प्रदर्शन कर रही महिला कांग्रेस कार्यकर्ताओं की पुलिस से झड़प हो गई। कई महिलाओं को हिरासत में लिया गया। सामाजिक कार्यकर्ता योगिता भयाना ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट से न्याय की पूरी उम्मीद है और हाईकोर्ट के आदेश में हुई गलती को सुधारा जाएगा।
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गौरतलब है कि 23 दिसंबर को दिल्ली हाईकोर्ट ने सेंगर की सजा सस्पेंड करते हुए कुछ शर्तों के साथ जमानत दी थी। इसके खिलाफ CBI ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। अब शीर्ष अदालत ने स्पष्ट कर दिया है कि पीड़िता के अधिकारों और कानून की गंभीरता से कोई समझौता नहीं होगा।













