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Aravalli पर सुप्रीम कोर्ट की नई परिभाषा से बवाल, जानिए विवाद की जड़ क्या है?

दिसम्बर 23, 2025
in Breaking News, देश National News
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Aravalli Hills पर सुप्रीम कोर्ट की नई परिभाषा से बवाल, जानिए विवाद की जड़ क्या है?
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समय: ~8 मिनट•हिंदी बुलेटिन

National News: Aravalli पहाड़ियों को लेकर सुप्रीम कोर्ट द्वारा नई परिभाषा स्वीकार किए जाने के बाद उत्तर भारत के कई हिस्सों में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए हैं। Aravalli दुनिया की सबसे पुरानी पर्वत श्रृंखलाओं में से एक है, जो राजस्थान, हरियाणा, गुजरात और दिल्ली तक फैली हुई है। केंद्र सरकार की सिफारिशों के बाद अदालत ने अरावली की नई परिभाषा को मान्यता दी है, जिसे लेकर अब देशभर में बहस छिड़ गई है।

Table of Contents

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  • खनन बढ़ने की आशंका, विशेषज्ञों की चेतावनी
  • राजस्थान में विरोध प्रदर्शन, जनयात्रा का ऐलान
  • 90% से अधिक अरावली क्षेत्र रहेगा सुरक्षित: केंद्रीय मंत्री
  • विवाद की जड़ क्या है?
  • Aravalli Hills: उत्तर भारत की प्राचीन पर्यावरणीय ढाल

नई परिभाषा के अनुसार, आसपास की जमीन से कम से कम 100 मीटर ऊंची किसी भी भूमि को Aravalli Hills माना जाएगा। इसके साथ ही यदि 500 मीटर के दायरे में दो या उससे अधिक ऐसी पहाड़ियां हों और उनके बीच की जमीन हो, तो उसे अरावली पर्वत श्रृंखला का हिस्सा माना जाएगा।

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खनन बढ़ने की आशंका, विशेषज्ञों की चेतावनी

Aravalli की इस नई परिभाषा को लेकर पर्यावरणविदों और विशेषज्ञों ने गंभीर चिंता जताई है। उनका कहना है कि 100 मीटर ऊंचाई और 500 मीटर के दायरे का फॉर्मूला लागू होने से बड़े पैमाने पर खनन को बढ़ावा मिल सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अरावली पर्वतमाला को नुकसान पहुंचा, तो इसका सीधा असर उत्तर भारत के पर्यावरण, जलस्तर और जलवायु पर पड़ेगा। वहीं सरकार का दावा है कि इस परिभाषा को लेकर भ्रम फैलाया जा रहा है और इसका उद्देश्य अवैध खनन को बढ़ावा देना नहीं है।

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राजस्थान में विरोध प्रदर्शन, जनयात्रा का ऐलान

अरावली को लेकर बढ़ते विवाद के बीच राजस्थान के कई शहरों में विरोध प्रदर्शन किए गए हैं। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया है कि नई परिभाषा के जरिए अरावली को कमजोर किया जा रहा है। इसके खिलाफ 24 दिसंबर से जनयात्रा निकालने का भी ऐलान किया गया है।

90% से अधिक अरावली क्षेत्र रहेगा सुरक्षित: केंद्रीय मंत्री

केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने अरावली पर्वत श्रृंखला को लेकर फैलाए जा रहे भ्रम पर स्पष्टता देते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा दी गई अरावली की परिभाषा कोई नई नहीं है। यह वही परिभाषा है जो राजस्थान में वर्ष 2002 में तत्कालीन गहलोत सरकार के कार्यकाल में गठित समिति की रिपोर्ट के आधार पर पहले से लागू है। इस परिभाषा के अनुसार स्थानीय भूमि स्तर से 100 मीटर से अधिक ऊंचाई वाली पहाड़ियां अरावली मानी जाती हैं और वहां खनन पर प्रतिबंध है। मंत्री ने बताया कि ऐसी पहाड़ी केवल शिखर तक सीमित नहीं मानी जाएगी, बल्कि शिखर से लेकर उसके आधार तक का पूरा क्षेत्र अरावली पर्वत का हिस्सा होगा।

इसके अलावा यदि दो ऐसी पहाड़ियां 500 मीटर की दूरी के भीतर स्थित हैं, तो उनके बीच की पूरी भूमि भी अरावली रेंज में शामिल होगी। उन्होंने कहा कि यह दावा पूरी तरह निराधार है कि नई परिभाषा से 90 प्रतिशत अरावली नष्ट हो जाएगी, जबकि वास्तविकता यह है कि इस परिभाषा के तहत 90 प्रतिशत से अधिक अरावली क्षेत्र सुरक्षित रहेगा। केंद्रीय मंत्री ने साफ शब्दों में कहा कि अरावली के कुल 1.44 लाख वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में से केवल 0.19 प्रतिशत हिस्से में ही खनन की पात्रता बनती है, शेष पूरी अरावली संरक्षित और सुरक्षित है।

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विवाद की जड़ क्या है?

इस पूरे विवाद की जड़ सुप्रीम कोर्ट का वह आदेश है, जिसमें अदालत ने अरावली क्षेत्र में अवैध खनन को लेकर केंद्र सरकार से जवाब मांगा था। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा था कि Aravalli Hills को लेकर अब तक कोई स्पष्ट और एक समान परिभाषा नहीं है। अलग-अलग राज्य अपने-अपने नियमों के अनुसार यह तय करते हैं कि किस भूभाग को पहाड़ी माना जाए और कहां खनन की अनुमति दी जाए।

खबर मन्त्र एक्सक्लूसिव पड़ताल एवं विश्लेषण
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अदालत का उद्देश्य एक स्पष्ट परिभाषा तय करना था, लेकिन अब इसी परिभाषा को लेकर राजनीतिक और पर्यावरणीय बहस तेज हो गई है। सवाल सिर्फ एक कानूनी परिभाषा का नहीं, बल्कि उत्तर भारत के पर्यावरणीय भविष्य का बन गया है।

Aravalli Hills: उत्तर भारत की प्राचीन पर्यावरणीय ढाल

अरावली पहाड़ियाँ (Aravalli Hills) दुनिया की सबसे प्राचीन पर्वत श्रृंखलाओं में से एक मानी जाती हैं। यह पर्वतमाला भारत के उत्तर-पश्चिमी भाग में फैली हुई है और मुख्य रूप से गुजरात, राजस्थान, हरियाणा और दिल्ली से होकर गुजरती है। लगभग 800 किलोमीटर लंबी अरावली श्रृंखला राजस्थान के माउंट आबू से लेकर दिल्ली तक फैली है। ये पहाड़ियाँ Western Thar Desert और पूर्वी उपजाऊ मैदानों के बीच प्राकृतिक दीवार की तरह काम करती हैं, जिससे Desert का फैलाव रोका जाता है। अरावली पहाड़ियाँ उत्तर भारत के पर्यावरण संतुलन में अहम भूमिका निभाती हैं, क्योंकि ये भूजल संरक्षण (Groundwater conservation), वर्षा पैटर्न (Rainfall patterns) और जैव विविधता(Biodiversity) को बनाए रखने में सहायक हैं। इसके साथ ही यह क्षेत्र कई दुर्लभ वनस्पतियों और वन्य जीवों का प्राकृतिक आवास भी है, इसलिए अरावली पहाड़ियाँ (Aravalli Hills) पर्यावरण की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती हैं।

Ayushika Verma
Ayushika Verma

संवाददाता, खबर मन्त्र। रांची और आसपास के ग्रामीण अंचलों की नागरिक समस्याएं, मौसम, सड़क हादसे और स्थानीय हलचल की ग्राउंड रिपोर्टिंग।

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