Jharkhand News: केन्द्र सरकार के द्वारा मनरेगा कानून और इसके नाम में प्रस्तावित बदलाव के विरोध में प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने व्यापक आंदोलन की घोषणा की है। 5 जनवरी को राजधानी रांची में “मनरेगा बचाओ संग्राम” के तहत बापू वाटिका, मोराबादी से लोक भवन तक पैदल मार्च निकाला जाएगा। इस आंदोलन का उद्देश्य ग्रामीण रोजगार से जुड़े मुद्दों को जनता के सामने लाना बताया गया है।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष केशव महतो कमलेश ने संवाददाता सम्मेलन में जानकारी देते हुए बताया कि इसके अलावा अखिल भारतीय स्तर पर मनरेगा बचाओ संग्राम के तहत प्रथम चरण में 8 जनवरी को राज्य स्तर के कांग्रेस नेताओं कि राज्य प्रभारी के साथ तैयारी बैठक का आयोजन किया जाएगा।
Jharkhand News: 11 जनवरी को एक दिवसीय उपवास
10 जनवरी को जिला स्तर पर प्रेस कॉन्फ्रेंस वहीं 11 जनवरी को एक दिवसीय उपवास एवं धरना गांधी प्रतिमा या अंबेडकर प्रतिमा के समक्ष द्वितीय चरण में 12 जनवरी से 30 जनवरी तक पंचायत स्तर पर चौपाल, सभी ग्राम प्रधान, पूर्व ग्राम प्रधान रोजगार सेवक एवं मनरेगा कार्यकर्ताओं के बीच कांग्रेस अध्यक्ष एवं नेता विपक्ष के पत्र का वितरण किया जाएगा।
विधानसभा स्तरीय नुक्कड़ सभा एवं पंपलेट वितरण 30 जनवरी शहीद दिवस पर मनरेगा कार्यकर्ता और आंदोलनकारी के साथ बैठक होगी। तीसरे चरण में 31 जनवरी से 6 फरवरी तक जिला स्तरीय मनरेगा बचाओ धरना दिया जाएगा। 7 फरवरी से 15 फरवरी तक राज्य स्तरीय विधानसभा या लोक भवन घेराव 16 फरवरी से 25 फरवरी के बीच देश में क्षेत्रीय स्तर पर चार मनरेगा बचाओ रैली का आयोजन किया जाएगा।
संवाददाताओं को संबोधित करते हुए केशव महतो कमलेश ने कहा कि मनरेगा का नाम बदलना ग्रामीण भारत पर हमला है,मनरेगा के तहत योजनाओं का चयन पहले गांव में होता था अब केंद्र योजना पंचायत और गांव का चुनाव करेगा। वर्तमान भी भीबी-जीरामजी योजना से क्षेत्रीय असंतुलन पैदा होगा जो देश के लिए हितकर नहीं होगा।
मनरेगा ग्रामीण अर्थव्यवस्था का रीढ़ था जिसे केंद्र सरकार ने तोड़ दिया, कोरोना काल में मनरेगा ने गांव में संजीवनी का काम किया था जो आपात स्थिति में किसी योजना के महत्व को दर्शाता है, नरेंद्र मोदी इसे मिटाना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी ने 10 वर्षों पूर्व मनरेगा की आलोचना करते हुए मनरेगा को यूपीए सरकार का स्मारक कहा था, मनरेगा में हर पंचायत को राशि मिलता था लेकिन अब सिर्फ चुनिंदा पंचायतों को राशि मिलेगी इससे ग्रामीण क्षेत्र में रोजगार के अवसर घटेंगे।
वित्त मंत्री राधा कृष्ण किशोर ने कहा कि भाजपा की विचारधारा गांधी जी के विपरीत है यही वजह है कि महात्मा गांधी के नाम को हटाकर नई योजना लाई गई। बीजेपी नहीं चाहती कि ग्रामीण क्षेत्र में लोगों को रोजगार मिले, आर्थिक संपन्नता हो, क्रय शक्ति बढ़े इससे भाजपा की पूंजीवादी सोच झलकती है। नाम में बदलाव भाजपा की मानसिकता को दर्शाता है, हिंदू धर्म को योजना में भावनात्मक रूप से जोड़कर राजनीतिक मंसूबा साधने की कोशिश की गई है। सरकार 125 दिन रोजगार देने की बात करती है लेकिन सभी निबंधित मजदूरों को रोजगार दिया गया तो बड़ी राशि की आवश्यकता पड़ेगी जिसका प्रावधान बजट में नहीं,सरकार मजदूरों के साथ छलावा कर रही है।
Jharkhand News: बीजेपी ने 60 दिनों के लिए रोजगार बंद कर दिया
पूर्व वित्त मंत्री डॉ रामेश्वर उरांव ने कहा कि जिस समय मनरेगा लागू हुआ था उस समय विपक्ष ने भी इसकी सराहना की थी इससे ग्रामीण भारत का नक्शा बदलेगा जो सही साबित भी हुआ। हमारे मौलिक अधिकार में रोजगार का अधिकार नहीं है लेकिन मनरेगा में रोजगार की कानून गारंटी थी। भाजपा ने वर्तमान कानून में बरसात के दिनों में 60 दिनों के लिए रोजगार बंद कर दिया जबकि मनरेगा के तहत बरसात में भी अनेक कार्य हुए और कई कार्य किया जा सकते हैं।
रोजगार के मामले में केंद्र ने राज्यों की उपेक्षा की,केंद्र ने नई योजना में केंद्र और राज्य का अंशदान 60- 40 का रखा है जिससे झारखंड जैसे गरीब राज्यों को अपना अंशदान देने में कठिनाई होगी केंद्र मनरेगा में गड़बड़ी की बात करती है लेकिन भाजपा की सरकार में ही झारखंड में मनरेगा घोटाला हुआ अगर मनरेगा में कमी थी तो उसमें सुधार किया जा सकता था।
संवाददाता सम्मेलन में मीडिया प्रभारी राकेश सिन्हा, सोनाल शांति, कमल ठाकुर, राजन वर्मा भी उपस्थित थे।












