आगामी नगर निकाय चुनाव से पहले राज्य निर्वाचन आयोग ने ऐसे सख्त नियम लागू कर दिए हैं, जिनका सीधा असर मेयर और पार्षद पद के उम्मीदवारों पर पड़ने वाला है। अब कोई भी प्रत्याशी नामांकन दाखिल करने से पहले एक अलग और व्यक्तिगत बैंक खाता खोले बिना चुनावी मैदान में नहीं उतर सकेगा। यह व्यवस्था नगरपालिका निर्वाचन नियमावली 2026 के तहत लागू की गई है, जिसका उद्देश्य चुनावी प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और निष्पक्ष बनाना है।
निर्वाचन आयोग का मानना है कि बीते चुनावों में बेहिसाब खर्च और नकद लेन-देन की शिकायतें लगातार सामने आई थीं। इन्हीं कमियों को दूर करने के लिए अब प्रत्याशियों के हर चुनावी खर्च को बैंकिंग सिस्टम से जोड़ दिया गया है, ताकि हर लेन-देन पर निगरानी रखी जा सके।
नियमावली 2026 क्या कहती है?
नियमावली के अनुसार, प्रत्याशी को नामांकन से एक दिन पहले तक बैंक खाता खोलना अनिवार्य होगा। यह खाता पूरी तरह व्यक्तिगत होना चाहिए और संयुक्त खाता मान्य नहीं होगा। चुनाव से जुड़े सभी खर्च इसी खाते से किए जाएंगे और किसी अन्य खाते या नकद खर्च को नियमों के खिलाफ माना जाएगा।
आयोग ने साफ किया है कि यह खाता केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि पूरे चुनावी खर्च की निगरानी का मुख्य आधार होगा।
चुनावी खर्च पर कैसे रहेगी नजर?
अब प्रत्याशी को अपने चुनावी खर्च को लेकर अतिरिक्त सावधानी बरतनी होगी। प्रचार से लेकर यात्रा तक, हर खर्च का रिकॉर्ड रखना अनिवार्य होगा। विशेष रूप से इन मदों पर आयोग की पैनी नजर रहेगी—
- प्रचार सामग्री, पोस्टर और बैनर
- वाहन और यात्रा खर्च
- जनसभा, लाउडस्पीकर और प्रचार कार्यक्रम
- कार्यालय व अन्य प्रशासनिक खर्च
नकद लेन-देन पर कड़ी निगरानी रखी जाएगी और संदिग्ध खर्च की जांच की जा सकती है।
व्यय लेखा पंजी क्यों है जरूरी?
इस बार चुनाव में प्रत्याशियों को व्यय लेखा पंजी भी भरनी होगी, जो नामांकन के समय ही उपलब्ध करा दी जाएगी। इस पंजी में प्रत्याशी को प्रतिदिन अपने खर्च का विवरण दर्ज करना होगा। यदि किसी दिन कोई खर्च नहीं होता है, तो भी संबंधित कॉलम में “निल” लिखना अनिवार्य रहेगा।
इस व्यवस्था से यह सुनिश्चित किया जाएगा कि कोई भी खर्च छिपाया न जा सके और चुनाव के बाद खर्च का मिलान आसानी से किया जा सके।
नामांकन के समय कौन-सी जानकारी देनी होगी?
नामांकन दाखिल करते वक्त प्रत्याशी को अपने बैंक खाते से जुड़ी पूरी जानकारी देनी होगी, ताकि उसका सत्यापन किया जा सके। इसमें शामिल हैं—
- बैंक खाता नंबर
- बैंक का नाम
- शाखा का नाम
- खाते में उपलब्ध बैलेंस की राशि
निर्वाचन अधिकारियों को इन विवरणों की जांच करने और आवश्यकता पड़ने पर कार्रवाई करने का अधिकार दिया गया है।
नियम नहीं माने तो क्या होगा?
यदि कोई प्रत्याशी निर्धारित नियमों का पालन नहीं करता है, तो उसके खिलाफ सख्त कदम उठाए जा सकते हैं। इसमें नामांकन रद्द होने से लेकर कानूनी कार्रवाई तक शामिल है। आयोग का साफ संदेश है कि चुनावी प्रक्रिया में किसी भी तरह की लापरवाही या नियम उल्लंघन को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
नगर निकाय चुनाव कब हो सकते हैं?
सूत्रों के अनुसार, राज्य में नगर निकाय चुनाव 2026 की पहली छमाही में कराए जाने की संभावना है। आरक्षण रोस्टर और कानूनी प्रक्रियाएं पूरी होते ही राज्य निर्वाचन आयोग चुनाव कार्यक्रम की घोषणा कर सकता है। नए नियमों को देखते हुए आयोग इस बार चुनाव से पहले सभी व्यवस्थाओं को मजबूत करने में जुटा हुआ है।
क्यों जरूरी समझी गई यह सख्ती?
पिछले चुनावों में चुनावी खर्च को लेकर कई सवाल उठे थे। कहीं खर्च छिपाने के आरोप लगे, तो कहीं नकद लेन-देन ने निष्पक्षता पर सवाल खड़े किए। इन्हीं अनुभवों के आधार पर आयोग ने इस बार सख्त नियम लागू कर दिए हैं, ताकि लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर जनता का भरोसा बना रहे।
आयोग का साफ संदेश
राज्य निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट कर दिया है कि आने वाले निकाय चुनावों में पैसे की ताकत नहीं, नियमों की ताकत चलेगी। हर प्रत्याशी को अपने खर्च का पूरा हिसाब देना होगा, तभी वह चुनावी मैदान में टिक पाएगा।

विशेष संवाददाता | Khabar Mantra
विकाश कुमार झारखंड के रांची के रहने वाले और यहीं जन्मे पत्रकार एवं डिजिटल मीडिया प्रोफेशनल हैं। झारखंड में लंबे समय से रहने और काम करने के कारण उन्हें राज्य के गांवों, शहरों, स्थानीय समाज, प्रशासन और जमीनी मुद्दों की गहरी समझ है।
5+ वर्षों के पत्रकारिता अनुभव के साथ उन्होंने Gandiva, Lagatar.in, News11 Digital और Prabhat Khabar Digital जैसे मीडिया संस्थानों में काम किया है। वर्तमान में Khabar Mantra Digital में Digital Media Manager-cum-Executive एवं विशेष संवाददाता के रूप में कार्यरत हैं।
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