Jharkhand: झारखंड के गुमला जिले के भरनो थाना क्षेत्र के पांच गांवों में हाथियों की सक्रियता के चलते जिला प्रशासन ने 15 फरवरी तक धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू कर दी है। सुपा, मालगांव, मोरगांव, बुढीपाट और महुआटोली गांवों में 18 जंगली हाथियों का एक झुंड लगातार घूम रहा है, जिससे मानव-हाथी संघर्ष की आशंका गहराती जा रही है।
लोगों की भीड़ से बिगड़ रही थी स्थिति
वन विभाग के अनुसार, हाथियों को देखने के लिए ग्रामीणों की भीड़ उनके आसपास जमा हो रही थी और कई लोग झुंड का पीछा भी कर रहे थे। गुमला के संभागीय वन अधिकारी अहमद बिलाल ने बताया कि बार-बार समझाने के बावजूद लोग नहीं मान रहे थे, जिससे किसी बड़े हादसे का खतरा बढ़ गया था। इसी कारण प्रशासन से निषेधाज्ञा लगाने का अनुरोध किया गया।
निषेधाज्ञा में क्या-क्या रहेगा प्रतिबंध
प्रशासन द्वारा जारी आदेश के तहत प्रभावित इलाकों में पांच या उससे अधिक लोगों के एकत्र होने पर रोक लगाई गई है। इसके अलावा सड़कों को अवरुद्ध करने, लाइसेंसी हथियार, आग्नेयास्त्र या किसी भी प्रकार की विस्फोटक सामग्री ले जाने पर भी प्रतिबंध रहेगा। प्रशासन का उद्देश्य लोगों और हाथियों के बीच किसी भी प्रकार के टकराव को रोकना है।
तीन जिलों को जोड़ने वाला संवेदनशील इलाका
वन विभाग ने बताया कि भरनो क्षेत्र से होकर रांची, गुमला और लोहरदगा को जोड़ने वाले मार्ग गुजरते हैं और हाथियों का झुंड इन्हीं रास्तों से तीनों जिलों के बीच आवाजाही करता है। बीते छह महीनों में यह तीसरी बार है जब इसी इलाके में हाथियों की गतिविधियों के कारण निषेधाज्ञा लागू करनी पड़ी है।
झारखंड में बढ़ रहा मानव-हाथी संघर्ष
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इस वर्ष एक जनवरी से अब तक झारखंड में हाथियों के हमलों में 25 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं पश्चिम सिंहभूम जिले में एक हाथी अकेले 20 लोगों की जान ले चुका है। वर्ष 2019-20 से अब तक राज्य में मानव-हाथी संघर्ष की घटनाओं में कुल 474 मौतें दर्ज की गई हैं।
प्रशासन की लोगों से अपील
प्रशासन और वन विभाग ने स्थानीय लोगों से अपील की है कि वे हाथियों के नजदीक न जाएं, अफवाहों से बचें और जारी निर्देशों का पालन करें, ताकि किसी भी अप्रिय घटना से बचा जा सके।












