Deoghar News: महाशिवरात्रि से पहले झारखंड के देवघर स्थित विश्वप्रसिद्ध बाबा बैद्यनाथ धाम में सदियों पुरानी परंपरा के तहत विशेष धार्मिक अनुष्ठान संपन्न हुआ। मंगलवार को मंदिर के प्रधान पुजारी गुलाबनंद ओझा के नेतृत्व में पंचशूलों की विधिवत पूजा-अर्चना की गई और इसके बाद बाबा बैद्यनाथ, मां पार्वती सहित सभी 22 मंदिरों के शिखरों पर पंचशूलों को पुनः स्थापित किया गया।
पूरे मंदिर परिसर में ‘बोल बम’ के जयकारों के बीच श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। भक्तों ने पंचशूलों को सिर से छूकर आशीर्वाद लिया और इस पावन क्षण के साक्षी बने।
क्या है पंचशूल परंपरा?
महाशिवरात्रि से पहले देवघर के मंदिरों में स्थापित पंचशूलों को उतारकर उनकी पारंपरिक सफाई और विशेष पूजा की जाती है। यह परंपरा सदियों से चली आ रही है और इसे अत्यंत शुभ माना जाता है।
इस बार:
- बाबा बैद्यनाथ और मां पार्वती मंदिर के पंचशूल मंगलवार को उतारे गए
- अन्य मंदिरों के पंचशूल पहले ही उतारे जा चुके थे
- विशेष पूजा के बाद बाबा और पार्वती मंदिर के पंचशूलों का पारंपरिक मिलन कराया गया
पहले उतरा पार्वती मंदिर का पंचशूल, फिर हुआ मिलन
सोमवार को धार्मिक विधि-विधान के तहत पहले पार्वती मंदिर का पंचशूल उतारकर बाबा मंदिर की छत पर लाया गया। इसके बाद बाबा मंदिर का पंचशूल उतारा गया और दोनों का पारंपरिक मिलन कराया गया।
पंचशूलों को बाद में मंदिर कार्यालय में सुरक्षित रखा गया। जब मंदिर के भंडारी पंचशूल लेकर नीचे उतरे तो श्रद्धालुओं की लंबी कतार लग गई। भक्त पंचशूल को स्पर्श कर स्वयं को धन्य मानते दिखे।
Read More: महाशिवरात्रि से पहले क्यों उतारा जाता है पंचशूल?
पुनर्स्थापना के साथ शुरू हुई ‘गठबंधन’ प्रक्रिया
पंचशूलों की पुनर्स्थापना के बाद बाबा बैद्यनाथ और मां पार्वती मंदिर के प्रतीकात्मक ‘गठबंधन’ की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई, जो महाशिवरात्रि की तैयारियों का अहम हिस्सा मानी जाती है।
देवघर में महाशिवरात्रि को लेकर आध्यात्मिक उत्साह चरम पर है और प्रशासन भी भीड़ प्रबंधन को लेकर अलर्ट मोड में है।












