Jharkhand LPG Crisis: देश में बढ़ रही एलपीजी (LPG) किल्लत ने झारखंड राज्य सरकार और आम जनता की चिंता बढ़ा दी है। सोमवार को झारखंड विधानसभा में संसदीय कार्य मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने सरकार का पक्ष रखते हुए बताया कि केंद्र सरकार द्वारा कमर्शियल गैस की आपूर्ति में 80 प्रतिशत की कटौती किए जाने से राज्य में हालात गंभीर हो गए हैं।
Jharkhand LPG Crisis की पूरी रिपोर्ट
- कमर्शियल गैस की आपूर्ति 80% घटाकर केवल 20% कर दी गई है।
- राज्य में इंडियन ऑयल, हिंदुस्तान पेट्रोलियम और भारत पेट्रोलियम के 3,27,630 रिफिल लंबित हैं।
- घरेलू गैस की डिलीवरी में लगने वाला समय 48 घंटे से बढ़कर अब 3 से 4 दिन हो गया है।
कमर्शियल गैस संकट: होटल और उद्योगों पर पड़ेगा बुरा असर
मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने बताया कि झारखंड को हर महीने औसतन 2273.11 मीट्रिक टन कमर्शियल गैस की आवश्यकता होती है। केंद्र की कटौती के बाद अब राज्य को केवल 454.6 मीट्रिक टन गैस ही मिल पाएगी।
इसका सीधा असर होटल और रेस्टोरेंट पर पड़ेगा, जिससे खाद्य पदार्थों की कीमतों में बढ़ोत्तरी और संचालन में दिक्कत आएगी। बड़े उद्योगों की कैंटीन में हजारों श्रमिकों का भोजन गैस पर निर्भर है। साथ ही उत्पादन प्रभावित होने से GST कलेक्शन गिरेगा, जिससे राज्य की वित्तीय स्थिति प्रभावित होगी।
वैश्विक तनाव और केंद्र की नीति पर सवाल
संसदीय कार्य मंत्री ने एलपीजी संकट का संबंध पश्चिमी एशिया के संघर्ष से जोड़ते हुए केंद्र सरकार की विदेश नीति पर भी कटाक्ष किया। “यह हास्यास्पद है कि रूस से तेल लेने की अनुमति अमेरिका (डोनाल्ड ट्रंप) दे रहा है। भारत सरकार इस संकट पर मौन है। यदि यह युद्ध लंबा खिंचा, तो देश की फिस्कल पॉलिसी (राजकोषीय नीति) चरमरा जाएगी।” — राधाकृष्ण किशोर
उन्होंने भाजपा विधायकों की टोकाटोकी पर चुटकी लेते हुए कहा कि “भारत नहीं, बल्कि डोनाल्ड ट्रंप विश्व गुरु बन गए हैं,” क्योंकि तेल खरीद की शर्तें और डिस्काउंट अब वैश्विक शक्तियों के नियंत्रण में दिख रहे हैं।
Jharkhand LPG Crisis क्या बढ़ सकती हैं कीमतें?
झारखंड में 1818.51 मीट्रिक टन कमर्शियल गैस की मासिक कमी एक बड़े आर्थिक संकट की ओर इशारा कर रही है। तेल कंपनियों (IOCL, HPCL, BPCL) के साथ हुई बैठक में यह स्पष्ट हो गया है कि यदि आपूर्ति बहाल नहीं हुई, तो आने वाले दिनों में किल्लत और बढ़ सकती है।












