Ranchi जिले में जनगणना-2027 के प्रथम चरण की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। जिला जनसम्पर्क कार्यालय द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, 1 मई 2026 से जनगणना का पहला चरण शुरू होगा, जिसमें मकानों की गणना और सूचीकरण का कार्य किया जाएगा।
इस महत्वपूर्ण अभियान को सफल बनाने के लिए प्रशासन ने व्यापक स्तर पर तैयारी की है और नागरिकों से सक्रिय भागीदारी की अपील की गई है।
दो चरणों में होगा पूरा सर्वे
जनगणना के पहले चरण को दो भागों में बांटा गया है:
- 1 मई से 15 मई 2026: Self Enumeration (स्व-गणना)
- 16 मई से 14 जून 2026: घर-घर जाकर मकान सूचीकरण और गणना
इस दौरान जिले के हर घर और मकान का विस्तृत डेटा इकट्ठा किया जाएगा।
Self Enumeration क्या है और कैसे करें?
Self Enumeration एक ऑनलाइन प्रक्रिया है, जिसमें नागरिक खुद अपनी जानकारी दर्ज कर सकते हैं।
- पोर्टल: se.census.gov.in
- अवधि: 1 मई से 15 मई 2026
- प्रक्रिया:
- वेबसाइट पर जाकर अपना विवरण भरें
- सबमिट करने के बाद SE-ID प्राप्त करें
- प्रगणक के आने पर यह ID दिखानी होगी
यह प्रक्रिया ऐच्छिक (Optional) है। अगर कोई व्यक्ति इसे नहीं करता, तो भी प्रगणक घर-घर जाकर जानकारी जुटाएंगे।
4200 से अधिक कर्मी होंगे तैनात
Ranchi जिले में इस कार्य के लिए 4232 पदाधिकारियों और कर्मचारियों की तैनाती की गई है।
- कुल प्रगणक और पर्यवेक्षक: 4134
- महिला कर्मी: 1727
- पुरुष कर्मी: 2407
सभी कर्मियों को प्रशिक्षण भी दिया जा चुका है।
घर-घर जाकर होगा मकान सर्वे
16 मई से 14 जून 2026 के बीच प्रगणक हर घर का दौरा करेंगे। इस दौरान निम्न जानकारी दर्ज की जाएगी:
- मकान की स्थिति
- उपलब्ध सुविधाएं
- परिवार से जुड़ी बुनियादी जानकारी
प्रशासन का लक्ष्य है कि हर परिवार का सही और पूरा डेटा दर्ज किया जाए।
डेटा रहेगा पूरी तरह गोपनीय
जनगणना से जुड़ी सभी जानकारी जनगणना अधिनियम, 1948 के तहत सुरक्षित और गोपनीय रखी जाएगी।
- डेटा एन्क्रिप्टेड सर्वर पर स्टोर होगा
- व्यक्तिगत जानकारी सार्वजनिक नहीं होगी
- केवल सामूहिक आंकड़े ही जारी किए जाएंगे
- टैक्स या जांच एजेंसियों के साथ डेटा साझा नहीं किया जाएगा
प्रशासन की अपील
प्रधान जनगणना पदाधिकारी-सह-उपायुक्त मंजूनाथ भजन्त्री ने जिलेवासियों से अपील की है कि वे जनगणना में बढ़-चढ़कर हिस्सा लें और सही जानकारी उपलब्ध कराएं।
क्यों जरूरी है जनगणना?
जनगणना देश के विकास की नींव मानी जाती है। इसके जरिए:
- सरकारी योजनाओं की सही योजना बनती है
- संसाधनों का बेहतर वितरण होता है
- विकास कार्यों को दिशा मिलती है








