भारत में अब प्रीमियम पेट्रोल के बाद प्यास बुझाना भी महंगा हो गया है। मिडिल ईस्ट (Middle East Crisis) में बढ़ते तनाव और ईरान युद्ध की आहट के बीच देश की प्रमुख पैकेज्ड ड्रिंकिंग वाटर कंपनियों ने कीमतों में 11% तक की बढ़ोतरी का ऐलान किया है।
Middle East Crisis: क्यों महंगा हुआ पीने का पानी?
भारत में बोतलबंद पानी की कीमतों में इस उछाल के पीछे सबसे बड़ी वजह कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में अस्थिरता है। इसका सीधा संबंध प्लास्टिक पैकेजिंग से है:
- प्लास्टिक बोतल बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाले पॉलिमर की कीमत 50% तक बढ़कर 170 रुपये प्रति किलो पहुंच गई है।
- पिछले दो हफ्तों में पैकेजिंग सामग्री की लागत में 70% से ज्यादा का इजाफा हुआ है।
- बोतल के कैप (ढक्कन) की कीमत दोगुनी से ज्यादा होकर 45 रुपये प्रति पीस हो गई है।
- कोरुगेटेड बॉक्स, लेबल और टेप की लागत बढ़ने से कंपनियों पर दबाव बढ़ा है।
Bisleri और अन्य बड़े ब्रांड्स की नई price
भारत के $5 बिलियन डॉलर के बोतलबंद पानी बाजार में Bisleri की हिस्सेदारी लगभग एक-तिहाई है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार:
- Bisleri: कंपनी ने कीमतों में 11% की बढ़ोतरी की है। अब 1 लीटर की 12 बोतलों का बॉक्स 216 रुपये के बजाय 240 रुपये में मिलेगा। बिस्लेरी के सीईओ एंजेलो जॉर्ज के मुताबिक, प्रति लीटर पानी की कीमत अब 20 रुपये तक पहुंच गई है।
- Parle Agro (Bailley): पार्ले एग्रो ने भी अपने ब्रांड ‘बेली’ की कीमतों में करीब 11% का इजाफा किया है।
- Clear Premium Water: छोटे और मध्यम लेवल के ब्रांड्स ने भी दाम 8% से 11% तक बढ़ा दिए हैं।
| विवरण | पुरानी कीमत (अनुमानित) | नई कीमत (11% वृद्धि के बाद) |
| 1 लीटर (12 बोतल बॉक्स) | ₹216 | ₹240 |
| प्रति लीटर दाम | ₹18 | ₹20 |
टैक्स कटौती का फायदा हुआ ‘बेअसर‘
हैरानी की बात यह है कि कुछ समय पहले ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बोतलबंद पानी पर GST को 18% से घटाकर 5% किया था। सरकार के इस कदम का उद्देश्य आम जनता को राहत देना था, लेकिन वैश्विक भू-राजनीतिक (Geo-political) तनाव और कच्चे माल की बढ़ती कीमतों ने इस टैक्स कटौती के फायदे को पूरी तरह खत्म कर दिया है।
भारत में शुद्ध पानी की चुनौती
भारत की 1.4 अरब आबादी के लिए साफ पानी एक गंभीर मुद्दा है। एक रिसर्च के मुताबिक, देश के 70% भूजल (Groundwater) में प्रदूषण पाया जाता है। यही वजह है कि मध्यम वर्ग और शहरी आबादी पूरी तरह से पैकेज्ड ड्रिंक वॉटर पर निर्भर है, जिससे Bisleri, Coca-Cola, PepsiCo, Reliance और Tata Group जैसे दिग्गजों के बीच श्रेष्ठ होने का प्रयास बढ़ा हुआ है।
मिडिल ईस्ट में तनाव जब तक कम नहीं होता, कच्चे तेल और प्लास्टिक की कीमतों में नरमी आने की उम्मीद कम है। ऐसे में आने वाले दिनों में अन्य FMCG प्रोडक्ट्स की कीमतों में भी उछाल देखा जा सकता है।












