Jharkhand: रांची के टीटोस बार में 1 मार्च 2026 को हत्या की योजना बनाई गई थी। पुलिस के मुताबिक, आरोपी अमन, जो प्रिंस खान गिरोह का सदस्य और गिरोह का ‘अकाउंटेंट’ था, बार में हत्या के इरादे से गया, लेकिन रेस्टोरेंट बंद होने के कारण उसे पीछे हटना पड़ा।
हालांकि 7 मार्च को हुई गोलीबारी में बार के वेटर मनीष को गोली लगी और उसकी मौत हो गई। रांची पुलिस के अनुसार, यह हमला बार संचालक द्वारा रंगदारी न देने के कारण अंजाम दिया गया। इस खुलासे से राज्य में बढ़ते संगठित अपराध की गंभीरता सामने आई है।
सोशल मीडिया और डिजिटल नेटवर्क का इस्तेमाल
अमन ने पुलिस पूछताछ में बताया कि गिरोह का संचालन आधुनिक डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के जरिए होता था। फेसबुक, टेलीग्राम और जंगी ऐप का इस्तेमाल आदेश देने, धमकी भरे संदेश भेजने और पैसों के लेन-देन के लिए किया जाता था। गिरोह के सदस्य इन नेटवर्क्स के माध्यम से पूरे झारखंड में रंगदारी की कार्रवाई करते थे।
पढ़ा-लिखा अकाउंटेंट और गिरोह का फाइनेंस मैनेजर
पलामू जिले के चैनपुर का रहने वाला अमन एक स्नातक छात्र है। 2021-22 में डालटनगंज में किराये के मकान में रहते हुए वह पहले सुजीत सिन्हा गैंग से जुड़ा। शुरुआत में उसे लेवी वसूली, पैसों के ट्रांसफर और लॉजिस्टिक सपोर्ट की जिम्मेदारी दी गई। बाद में पढ़ाई के कारण उसे अकाउंट्स और ट्रांजेक्शन मैनेजमेंट का काम भी सौंपा गया।
अमन के मुताबिक, प्रिंस खान और सुजीत सिन्हा के संपर्क में आने के बाद पूरे झारखंड में रंगदारी का नेटवर्क खड़ा किया गया। इसमें व्यवसायियों, ठेकेदारों, कोयला कंपनियों, डॉक्टरों और वकीलों से ‘छोटे सरकार टैक्स’ के नाम पर वसूली शामिल थी।
लाखों की रंगदारी और फंड ट्रांसफर
पुलिस जांच में यह पता चला कि पिछले दो महीनों में पलामू में एक रिसॉर्ट कर्मचारी के जरिए लगभग 30 लाख रुपये की वसूली की गई। ये राशि विभिन्न बैंक खातों और यूपीआई के माध्यम से ट्रांसफर की गई। अमन ने कई बार खुद पैसों को खातों में जमा करने और ट्रांसफर कराने की बात भी स्वीकार की। इस नेटवर्क में व्यवसायियों के नंबर उपलब्ध कराने, धमकी देने और रंगदारी वसूलने में कई लोग शामिल थे।
हथियार सप्लाई और अंतरराज्यीय कनेक्शन
अमन ने यह भी बताया कि पहले पंजाब के अमृतसर से हथियार लाने की कोशिश की गई, लेकिन असफल रहने पर मध्य प्रदेश के बुरहानपुर से तीन पिस्टल मंगवाई गईं। इन हथियारों का इस्तेमाल रांची, धनबाद, बोकारो, हजारीबाग और पलामू में हुई घटनाओं में किया गया।
जांच में यह सामने आया कि गिरोह का सरगना प्रिंस खान कथित तौर पर फर्जी पाकिस्तानी दस्तावेजों के सहारे पाकिस्तान में छिपा हुआ है। पुलिस इस दावे की भी जांच कर रही है। इसके अलावा, गिरोह द्वारा धनबाद में एक और बड़ी वारदात की योजना बनाने की जानकारी मिली है।
जेल से संचालन और महिलाओं की संलिप्तता
जांच में यह भी पता चला कि कुछ सदस्य जेल से गिरोह का संचालन कर रहे थे। इसके अलावा महिलाओं की भी संलिप्तता सामने आई। यह सब झारखंड में बढ़ते संगठित अपराध की गंभीरता और नेटवर्क की व्यापकता को दर्शाता है।
पुलिस की कार्रवाई और भविष्य की योजना
Jharkhand पुलिस ने बताया कि पूरे नेटवर्क को खत्म करने के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर हैं और राज्यवासियों से अनुरोध किया गया है कि वे किसी भी धमकी या संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत पुलिस को दें।
अमन के खुलासों ने न सिर्फ झारखंड में रंगदारी नेटवर्क की जटिलता को उजागर किया है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन और डिजिटल नेटवर्क के माध्यम से अपराध के फैलाव को भी सामने लाया है।

विशेष संवाददाता | Khabar Mantra
विकाश कुमार झारखंड के रांची के रहने वाले और यहीं जन्मे पत्रकार एवं डिजिटल मीडिया प्रोफेशनल हैं। झारखंड में लंबे समय से रहने और काम करने के कारण उन्हें राज्य के गांवों, शहरों, स्थानीय समाज, प्रशासन और जमीनी मुद्दों की गहरी समझ है।
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