Jharkhand Politics: झारखंड में पूर्व मंत्री और कांग्रेस नेता योगेंद्र साव के घर पर बीते गुरुवार को बुलडोजर चला। जिसके बाद शुक्रवार को कांग्रेस पार्टी ने उन्हें निष्कासित कर दिया। अब इस मामले ने झारखंड की राजनीति में नई विवाद की शुरूआत कर दी है। पहले सोशल मीडिया पर इस मामले को लेकर जमकर आरोप प्रत्यारोप देखने को मिले। जिसके बाद खुद योगेंद्र साव ने मीडिया पर अपनी बातों को रखा और आज उनकी पूत्री अंबा प्रसाद ने अपने ही गठबंधन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने साफ कहा कि अब वो सिर्फ ओर सिर्फ अपने स्तर से मामले का निपटारा करेंगी। लेकिन इसमें अब भाजपा की एंट्री ने कई सवाल खड़े कर दिए है।
Jharkhand Politics: कांग्रेस का ओबीसी विरोधी चेहरा हुआ बेनकाब
भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने कहा कि झारखंड की राजनीति में आज जो घटनाक्रम सामने आया है, वह कांग्रेस पार्टी की दिशा और नीयत दोनों पर गंभीर सवाल खड़े करता है। सत्ता में बने रहने और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को खुश करने के लिए कांग्रेस अब अपने ही समर्पित कार्यकर्ताओं की बलि लेने लगी हुई है। प्रतुल ने कहा कि पूर्व मंत्री योगेंद्र साव खांटी कांग्रेसी रहे हैं। भारतीय जनता पार्टी उनके आंदोलन के तरीकों और कार्यशैली से सहमत नहीं रही है, लेकिन यह अत्यंत चिंताजनक है कि जिनका पूरा परिवार कांग्रेस समर्थक रहा, उसी कांग्रेस समर्थित सरकार में उनका घर कोर्ट में मामला लंबित होने के बावजूद तोड़ दिया गया।
Jharkhand Politics: कांग्रेस के भीतर फूट
प्रतुल ने कहा कि यह केवल एक व्यक्ति के साथ अन्याय नहीं है, बल्कि यह दर्शाता है कि सरकार ने सुनना और बोलना दोनों बंद कर दिया है। कांग्रेस की पूर्व विधायक सुश्री अंबा प्रसाद द्वारा उठाई गई आपत्ति इस बात का प्रमाण है कि अब असंतोष कांग्रेस के भीतर से ही फूट रहा है।
अबुआ नहीं बबुआ सरकार
प्रतुल शाहदेव ने कहा कि भाजपा तो शुरू से कहती रही है कि यह “अबुआ नहीं, बबुआ सरकार” है, लेकिन अब कांग्रेस के अंदर के नेता भी इस सच्चाई को स्वीकार करने लगे हैं।उन्होंने कहा कि योगेंद्र साव को बिना किसी नोटिस के पार्टी से निष्कासित कर दिया गया।जबकि कांग्रेस के कई नेताओं ने खुलेआम पार्टी विरोधी बयान दिए और गतिविधियों में शामिल रहे, लेकिन उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई। तत्कालीन विधायक इरफान अंसारी के द्वारा तत्कालीन मंत्री बन्ना गुप्ता को अनपढ़ बताया गया।वहीं के एन त्रिपाठी जैसे नेताओं ने निकाय चुनाव से पहले ही सरकार को लेकर आपत्तिजनक बयान दिए, लेकिन कांग्रेस नेतृत्व मौन बना रहा।
उन्होंने कहा कि योगेंद्र साव ओबीसी समुदाय से आते हैं और उनके साथ हुआ व्यवहार कांग्रेस की ओबीसी विरोधी मानसिकता को उजागर करता है।इतिहास गवाह है कि कांग्रेस ने पिछड़ों को शक्ति देने वाले मंडल कमीशन की रिपोर्ट को 10 वर्षों तक तक दबाए रखा।











