Tamilnadu की राजनीति में इस वक्त सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर सरकार किसकी बनेगी? विधानसभा चुनाव में अभिनेता Vijay की पार्टी Tamilaga Vettri Kazhagam (TVK) ने 108 सीटें जीतकर सबको चौंका दिया, लेकिन बहुमत के जादुई आंकड़े 118 से 10 सीट पीछे रह गई। इसके बाद राज्य की राजनीति पूरी तरह गठबंधन और जोड़तोड़ के दौर में पहुंच गई है।
मौजूदा समीकरण क्या कहते हैं?
| पार्टी/गठबंधन | सीटें |
| TVK | 108 |
| DMK गठबंधन | अनुमानित 62 |
| AIADMK गठबंधन | अनुमानित 58 |
| कांग्रेस | 9 |
| वाम दल/अन्य | कुछ सीटें |
यानी अकेले किसी के पास बहुमत नहीं है। अब पूरा खेल समर्थन और गठबंधन पर टिक गया है।
सबसे बड़ा सवाल: क्या DMK और AIADMK साथ आ सकते हैं?
तमिलनाडु की राजनीति में Dravida Munnetra Kazhagam (DMK) और All India Anna Dravida Munnetra Kazhagam (AIADMK) दशकों से कट्टर विरोधी रहे हैं। लेकिन इस बार राजनीतिक हालात ऐसे बन गए हैं कि दोनों के बीच “रणनीतिक गठबंधन” की चर्चा तेज हो गई है।
DMK की शर्तें
सूत्रों के मुताबिक DMK ने AIADMK के सामने तीन बड़ी शर्तें रखी हैं—
- भाजपा से पूरी तरह नाता तोड़ना
- सेकुलर गठबंधन की सार्वजनिक घोषणा
- छोटे सहयोगी दलों खासकर VCK को सरकार में हिस्सेदारी
अगर AIADMK यह मान लेती है तो दोनों मिलकर 120+ सीटों का आंकड़ा पार कर सकते हैं।
विजय क्यों बने हुए हैं सबसे बड़ा फैक्टर?
Vijay पहली बार चुनाव लड़कर सीधे सत्ता के दरवाजे तक पहुंच गए। 108 सीटें जीतना बताता है कि युवाओं, पहली बार वोट देने वालों और एंटी-इंकम्बेंसी वोटरों ने उन्हें बड़े पैमाने पर समर्थन दिया।
लेकिन समस्या यह है कि—
- उनके पास बहुमत नहीं
- स्थिर सहयोगी नहीं
- राज्यपाल के साथ टकराव
- कांग्रेस और वाम दलों का समर्थन भी पूरी तरह भरोसेमंद नहीं
यानी TVK सबसे बड़ी पार्टी जरूर है, लेकिन सरकार बनाना अभी भी आसान नहीं है।
कांग्रेस ने क्यों बदला पाला?
Indian National Congress ने DMK से दूरी बनाकर विजय को समर्थन देने का फैसला किया। इसकी सबसे बड़ी वजह मानी जा रही है DMK का AIADMK के साथ संभावित समीकरण।
कांग्रेस अब खुद को “भाजपा विरोधी असली सेकुलर धड़ा” दिखाना चाहती है। कांग्रेस नेता मणिक्कम टैगोर ने खुलकर DMK पर “सेकुलर राजनीति से समझौता” करने का आरोप लगाया है।
वाम दलों की स्थिति क्यों अहम?
वाम दल किंगमेकर की भूमिका में आ सकते हैं।
लेकिन उनकी सबसे बड़ी दुविधा यह है—
- DMK-AIADMK गठबंधन को समर्थन दें?
- विजय के साथ जाएं?
- या तटस्थ रहें?
अगर वाम दल विजय के साथ जाते हैं तो TVK गठबंधन बहुमत के करीब पहुंच सकता है। लेकिन अगर वे तटस्थ रहे तो राजनीतिक अस्थिरता बढ़ सकती है।
कौन हो सकता है अगला मुख्यमंत्री?
1. विजय — सबसे मजबूत दावेदार
अगर कांग्रेस + वाम दल + छोटे दल खुलकर समर्थन देते हैं, तो विजय मुख्यमंत्री बन सकते हैं।
यह “नई राजनीति बनाम पुरानी द्रविड़ राजनीति” का नैरेटिव होगा।
विजय के पक्ष में
- सबसे बड़ी पार्टी
- जनता का नया चेहरा
- युवा वोट बैंक
- एंटी-एस्टैब्लिशमेंट लहर
कमजोरी
- अनुभव की कमी
- गठबंधन प्रबंधन चुनौती
- स्थिर बहुमत नहीं
2. DMK-AIADMK का समझौता मॉडल
अगर दोनों दल साथ आते हैं तो सरकार बेहद स्थिर हो सकती है। लेकिन तब सबसे बड़ा सवाल होगा CM कौन बनेगा?
संभावनाएं:
- रोटेशन फॉर्मूला
- AIADMK का CM, DMK का डिप्टी CM
- बाहरी समर्थन मॉडल
हालांकि जमीनी स्तर पर दोनों दलों के कार्यकर्ताओं के बीच भारी विरोध भी हो सकता है।
3. राष्ट्रपति शासन या दोबारा चुनाव?
अगर कोई स्पष्ट गठबंधन नहीं बनता तो राज्य में राजनीतिक अस्थिरता बढ़ सकती है। ऐसी स्थिति में:
- राष्ट्रपति शासन
या - दोबारा चुनाव
की संभावना भी बन सकती है।
फिलहाल सबसे मजबूत संभावना क्या दिख रही?
वर्तमान राजनीतिक संकेत बताते हैं:
- TVK नैतिक रूप से सबसे बड़ी ताकत बन चुकी है।
- लेकिन नंबर गेम अभी भी DMK-AIADMK के पास जा सकता है।
- कांग्रेस के पाला बदलने से DMK दबाव में है।
- भाजपा की भूमिका “बैक चैनल फैक्टर” बन सकती है।
तमिलनाडु की राजनीति इस समय अपने सबसे बड़े संक्रमण दौर में है।
द्रविड़ राजनीति की पुरानी धुरी टूटती दिख रही है और विजय एक नए पावर सेंटर के रूप में उभरे हैं। लेकिन सिर्फ सबसे बड़ी पार्टी होना सरकार बनाने की गारंटी नहीं है।
इस वक्त तीन संभावनाएं सबसे मजबूत हैं:
- विजय के नेतृत्व में गठबंधन सरकार
- DMK-AIADMK का चौंकाने वाला गठबंधन
- राजनीतिक गतिरोध और अस्थिरता
लेकिन मौजूदा माहौल में अगर कोई चेहरा सबसे ज्यादा चर्चा में है, तो वह विजय हैं — और यही वजह है कि तमिलनाडु की अगली राजनीति अब “स्टार पावर बनाम द्रविड़ मॉडल” की लड़ाई बन चुकी है।







