अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव और युद्ध का असर अब पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर साफ दिखाई देने लगा है। पहले से आर्थिक संकट झेल रहे पाकिस्तान में अब तेल की कीमतों ने आम लोगों की कमर तोड़ दी है।
सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए लग्जरी गाड़ियों में इस्तेमाल होने वाले हाई-ऑक्टेन फ्यूल पर लेवी बढ़ाकर 300 रुपये प्रति लीटर कर दी है, जिससे देश में हड़कंप मच गया है।
Petrol पंपों पर लंबी कतारें, लोगों में अफरा-तफरी
कीमत बढ़ने की खबर फैलते ही देश के कई शहरों में पेट्रोल पंपों पर लंबी-लंबी कतारें लग गईं। लोग पुराने रेट पर तेल भरवाने के लिए घंटों लाइन में खड़े नजर आए। कई जगहों पर अफरा-तफरी जैसी स्थिति बन गई।
प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ का बड़ा फैसला
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की अध्यक्षता में हुई बैठक में यह निर्णय लिया गया। पहले हाई-ऑक्टेन फ्यूल पर 100 रुपये प्रति लीटर लेवी थी, जिसे बढ़ाकर 200 रुपये किया गया और अब कुल मिलाकर यह 300 रुपये प्रति लीटर पहुंच गई है।
सरकार का कहना है कि इस फैसले से हर महीने करीब 9 अरब रुपये की बचत होगी, जिसका उपयोग जनता को राहत देने में किया जाएगा।
पहले भी बढ़ चुके हैं दाम, बढ़ती जा रही परेशानी
गौरतलब है कि इसी महीने 6 मार्च को भी पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 55 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई थी। लगातार बढ़ती कीमतों ने आम जनता पर भारी दबाव डाल दिया है।
सरकारी खर्च में कटौती, कर्मचारियों पर असर
तेल संकट से निपटने के लिए सरकार ने कई सख्त कदम उठाए हैं—
- मंत्रियों और सरकारी अधिकारियों के वेतन में कटौती
- सरकारी गाड़ियों के फ्यूल भत्ते में 50% कमी
- हफ्ते में 4 दिन कार्य व्यवस्था लागू
- 50% कर्मचारियों को वर्क फ्रॉम होम का निर्देश
आम जनता को फिलहाल राहत
हालांकि राहत की बात यह है कि आम गाड़ियों में इस्तेमाल होने वाले पेट्रोल और डीजल की कीमतों में फिलहाल कोई बदलाव नहीं किया गया है। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि अगर हालात ऐसे ही बने रहे तो इसका असर जल्द ही आम जनता पर भी पड़ सकता है।
ईरान युद्ध का असर सिर्फ मध्य-पूर्व तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पाकिस्तान जैसे देशों की अर्थव्यवस्था को भी हिला रहा है। आने वाले दिनों में तेल संकट और गहराने की आशंका जताई जा रही है।













