Ranchi: सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम एशिया में चल रहे संकट और युद्ध को लेकर लोकसभा में अपना बयान दिया। 24 दिनों बाद संसद में दिए प्रतिक्रिया पर झामुमो ने तीखी आलोचना की है। केंद्रीय महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री ने काफी देरी से इस मुद्दे पर अपनी चुप्पी तोड़ी। देश इस संकट की घड़ी में सरकार से स्पष्ट रणनीति और ठोस कदमों की अपेक्षा कर रहा है, लेकिन अब तक पीएम ने कोई ठोस दिशा नहीं दिखाई है।
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Jharkhand News: बाकी भारतीयों को कब लाएगी सरकार
जिस प्रकार संसद में प्रधानमंत्री ने बताया कि विदेशों में फंसे 1000 छात्रों को वापस लाया गया है। इस पर विपक्ष ने सवाल खड़े करते हुए पूछा कि छात्र युद्ध से पहले ही संस्थान बंद होने के कारण लौटे थे, इसमें सरकार की कोई भूमिका नहीं है। अगर सरकार यह दावा कर रही है कि उन्होंने 1000 छात्रों को वापस लाया है, तो बाकि बचे छात्रों और नागरिकों को सरकर कब ला रही है वापस।
Jharkhand News: अमेरिका-इजराइल पर रुख साफ क्यों नहीं?
इसके साथ ही प्रेस वार्ता में सुप्रियों भट्टाचार्य ने केंद्र पर आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार ने अब तक अमेरिका और इजराइल की भूमिका में कोई स्पष्ट रुख नहीं अपनाया है। इन देशों कि वजह से भारत के कई होटल-रेस्टोरेंट बंद हो रहे है, छात्र गैस की समस्या के कारण पढ़ाई छोड़ घर लौटने को मजबूर है। पीएम मोदी ने सदन में यह तक कह दिया कि देश लंबी अवधि के लिए तैयार रहे, क्या सरकार किसी लंबी अवधि के संकट के लिए देश को तैयार करना चाहती है। अगर ऐसा है तो सरकार जनता के सामने पारदर्शी रूप से अपनी रणनीति रखे, ताकि लोगों का भरोसा सरकार पर बना रहे।











