मध्य पूर्व में एक बार फिर हालात बेहद तनावपूर्ण हो गए हैं। Donald Trump ने Iran को लेकर कड़ा रुख अपनाते हुए उसके नागरिक बुनियादी ढांचे को निशाना बनाने की खुली धमकी दी है। इस संभावित सैन्य कार्रवाई को “इंफ्रास्ट्रक्चर डे” नाम दिया गया है, जिसने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता और असमंजस दोनों बढ़ा दिए हैं।
डेडलाइन का दबाव और बढ़ती अनिश्चितता
स्थिति को और गंभीर बनाते हुए ट्रंप ने साफ कर दिया है कि मंगलवार रात 8 बजे तक का समय निर्णायक होगा। उनका कहना है कि अगर Iran Strait of Hormuz को नहीं खोलता या किसी ठोस समझौते पर नहीं पहुंचता, तो अमेरिका कड़े कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगा। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज वैश्विक तेल आपूर्ति का एक अहम रास्ता है, और इसका बंद होना पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर गहरा असर डाल सकता है।
ट्रंप ने अपने बयान में यह तक कह दिया कि एक ही रात में Iran के पुल और पावर प्लांट तबाह कर दिए जाएंगे और देश को “स्टोन एज” में धकेल दिया जाएगा। इस तरह के तीखे बयान ने वैश्विक कूटनीति को भी हिलाकर रख दिया है।
हमले की तैयारियों की खबरें तेज
अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से सामने आई रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि अगर आदेश मिलता है, तो अमेरिका और Israel मिलकर बड़े पैमाने पर हवाई हमले कर सकते हैं। इस अभियान का फोकस ईरान के ऊर्जा ढांचे—जैसे पावर प्लांट्स और पुल—पर रहेगा।
सूत्रों का दावा है कि इस ऑपरेशन की तैयारियां पूरी हो चुकी हैं और केवल अंतिम आदेश का इंतजार है। यही वजह है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस स्थिति को बेहद संवेदनशील मान रहा है।
कूटनीति की उम्मीद अब भी जिंदा
हालांकि, इस पूरे तनाव के बीच बातचीत के रास्ते पूरी तरह बंद नहीं हुए हैं। ट्रंप ने खुद संकेत दिए हैं कि अगर वार्ता सही दिशा में आगे बढ़ती है, तो संभावित हमलों को रोका जा सकता है।
अमेरिकी वार्ता टीम में शामिल JD Vance, Steve Witkoff और Jared Kushner जैसे नाम इस बात के पक्ष में हैं कि अगर समझौते की संभावना है, तो उसे हर हाल में तलाशा जाना चाहिए। यह रुख बताता है कि अमेरिका के भीतर भी इस मुद्दे पर अलग-अलग सोच मौजूद है।
सहयोगियों का सख्त रुख और दबाव
दूसरी ओर, अमेरिका के सहयोगी देश इस मुद्दे पर नरमी के पक्ष में नजर नहीं आ रहे हैं। Benjamin Netanyahu समेत कई क्षेत्रीय शक्तियां मानती हैं कि जब तक ईरान कोई बड़ी रियायत नहीं देता, तब तक सख्ती जरूरी है।
Saudi Arabia और United Arab Emirates भी इसी रुख के साथ खड़े दिखाई दे रहे हैं, जिससे अमेरिका पर दबाव और बढ़ गया है।
महायुद्ध या समझौता—अंतिम फैसला नजदीक
मौजूदा हालात को देखते हुए यह साफ है कि दुनिया एक बड़े मोड़ पर खड़ी है। एक तरफ कूटनीति का रास्ता है, जो इस टकराव को टाल सकता है, तो दूसरी तरफ सैन्य कार्रवाई का खतरा है, जो पूरे मध्य पूर्व को जंग की आग में झोंक सकता है।
अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या अंतिम समय में कोई समझौता निकलता है या फिर हालात एक बड़े और विनाशकारी संघर्ष की ओर बढ़ते हैं।













