झारखंड में मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण (SIR) को लेकर सियासत तेज हो गई है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष Aditya Sahu ने मुख्यमंत्री Hemant Soren पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि वे राज्य के मतदाताओं को दिग्भ्रमित और गुमराह कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री गरीब, आदिवासी और मूलवासी समाज का नाम लेकर अपने “हिडन एजेंडा” को आगे बढ़ा रहे हैं और राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश कर रहे हैं।
“फर्जी वोटरों को बचाने की कोशिश”—भाजपा का आरोप
आदित्य साहू ने मुख्यमंत्री के उस बयान को भ्रामक बताया, जिसमें भाजपा पर SIR के जरिए आदिवासी, पिछड़े और मूलवासियों को मताधिकार और सरकारी योजनाओं से वंचित करने का आरोप लगाया गया था।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री “पूरी तरह बौखलाए हुए हैं” और फर्जी तरीके से बनाए गए मतदाताओं के हटने के डर से अनाप-शनाप बयान दे रहे हैं।
SIR प्रक्रिया पर क्या बोले साहू?
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि SIR कोई नई प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह चुनाव सुधार का नियमित हिस्सा है।
- अब तक देश में 13 बार SIR हो चुका है
- आखिरी बार यह प्रक्रिया 2004 में हुई थी
- यह पूरी तरह चुनाव आयोग की निगरानी में होती है
उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि:
- कोई पात्र मतदाता छूटे नहीं
- कोई अपात्र या फर्जी व्यक्ति सूची में शामिल न हो
इसके लिए फॉर्म 6, 7 और 8 के जरिए नाम जोड़ने, हटाने और सुधार की व्यवस्था है।
“बिहार-बंगाल में नहीं कटा किसी असली वोटर का नाम”
साहू ने दावा किया कि बिहार और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में भी SIR के दौरान किसी वास्तविक मतदाता का नाम नहीं हटाया गया।
उन्होंने कहा कि झारखंड में भी असली मतदाताओं को डरने की जरूरत नहीं है और भ्रम सिर्फ विपक्ष फैला रहा है।
“घुसपैठियों के कारण बदली राज्य की डेमोग्राफी”
भाजपा नेता ने आरोप लगाया कि हेमंत सोरेन सरकार के कार्यकाल में झारखंड की जनसंख्या संरचना (डेमोग्राफी) में बदलाव हुआ है।
उन्होंने कहा कि विपक्षी दलों ने अपने वोट बैंक के लिए “घुसपैठियों” को बसाया है और अब SIR के जरिए उनकी पहचान हो रही है, इसलिए विरोध किया जा रहा है।
मतदाता वृद्धि के आंकड़ों पर भी सवाल
आदित्य साहू ने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा:
- 2014-2019 के बीच देश में मतदाता वृद्धि 3% रही, जबकि झारखंड में 6.2%
- 2019-2024 के बीच देश में 1% वृद्धि हुई, जबकि झारखंड में 16.7%
उन्होंने सवाल उठाया कि यह असामान्य वृद्धि किस वजह से हुई।
योजनाओं में गड़बड़ी के भी लगाए आरोप
साहू ने दावा किया कि कुछ क्षेत्रों में बिना वास्तविक आबादी के ही लाभ दिए गए:
- घाटशिला के एक पंचायत में मुस्लिम आबादी नहीं, फिर भी 174 महिलाओं को योजना का लाभ
- चाकुलिया के एक गांव में बिना परिवार के 3000 बच्चों के आधार कार्ड
उन्होंने इसे “व्यवस्थित गड़बड़ी” बताते हुए जांच की मांग की।
“लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए जरूरी है SIR”
अंत में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि SIR एक जरूरी “फिल्टर” है, जो लोकतांत्रिक प्रक्रिया को मजबूत करता है।
उन्होंने दावा किया कि इससे वास्तविक लाभुकों और अल्पसंख्यकों को भी फायदा होगा, क्योंकि उनके हिस्से का लाभ गलत लोगों तक नहीं जाएगा।
झारखंड में SIR को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो चुकी है। एक तरफ भाजपा इसे चुनाव सुधार का जरूरी कदम बता रही है, वहीं दूसरी ओर सरकार पर फर्जी वोटरों को बचाने के आरोप लगा रही है। आने वाले समय में यह मुद्दा राज्य की राजनीति में और गर्मा सकता है।

विशेष संवाददाता | Khabar Mantra
विकाश कुमार झारखंड के रांची के रहने वाले और यहीं जन्मे पत्रकार एवं डिजिटल मीडिया प्रोफेशनल हैं। झारखंड में लंबे समय से रहने और काम करने के कारण उन्हें राज्य के गांवों, शहरों, स्थानीय समाज, प्रशासन और जमीनी मुद्दों की गहरी समझ है।
5+ वर्षों के पत्रकारिता अनुभव के साथ उन्होंने Gandiva, Lagatar.in, News11 Digital और Prabhat Khabar Digital जैसे मीडिया संस्थानों में काम किया है। वर्तमान में Khabar Mantra Digital में Digital Media Manager-cum-Executive एवं विशेष संवाददाता के रूप में कार्यरत हैं।
वे विशेष रूप से कोयलांचल, BCCL, कोलियरियों, औद्योगिक क्षेत्रों, स्थानीय प्रशासन और जनहित के मुद्दों पर रिपोर्टिंग करते हैं।
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