Ranchi: राजधानी रांची में वन्यजीव तस्करी के एक अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ है। डेली मार्केट स्थित एक होटल में छापेमारी कर वन विभाग और वाइल्डलाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो (WCCB) की संयुक्त टीम ने भारी मात्रा में मॉनिटर लिजर्ड (Monitor Lizard) के अवशेष बरामद किए हैं। इस मामले में पुलिस ने तीन तस्करों को रंगे हाथ गिरफ्तार किया है।
30 अवशेष बरामद, छिपाकर रखा था माल
गुप्त सूचना के आधार पर की गई इस कार्रवाई में टीम ने जब होटल के कमरे में दबिश दी, तो वहां का नजारा देखकर अधिकारी भी हैरान रह गए। तलाशी के दौरान प्लास्टिक बैग में रखे गए मॉनिटर लिजर्ड के करीब 30 अवशेष मिले। अधिकारियों ने तुरंत कार्रवाई करते हुए मौके से तीनों आरोपियों को हिरासत में ले लिया।
क्यों होती है मॉनिटर लिजर्ड की तस्करी?
वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, मॉनिटर लिजर्ड (जिसे स्थानीय भाषा में ‘गोह’ भी कहा जाता है) वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत एक संरक्षित जीव है। शुरुआती जांच में तस्करी के पीछे के चौंकाने वाले कारण सामने आए हैं:
- अंधविश्वास और तंत्र-मंत्र: इन अवशेषों का उपयोग अक्सर तांत्रिक क्रियाओं में किया जाता है।
- कथित पारंपरिक दवाएं: कई राज्यों में इसके अंगों का इस्तेमाल अवैध रूप से पारंपरिक दवाएं बनाने में होता है।
- बड़ा नेटवर्क: यह तस्करी नेटवर्क कई राज्यों में फैला हुआ है, जिसकी कड़ियां अब खंगाली जा रही हैं।
वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत मामला दर्ज
गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम (Wildlife Protection Act) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। विभाग अब इस बात की जांच कर रहा है कि इन अवशेषों को कहाँ भेजा जाना था और इस सिंडिकेट के मुख्य सरगना कौन हैं।
वन्यजीवों का व्यापार न केवल अवैध है, बल्कि यह हमारे पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) के लिए भी बेहद खतरनाक है।








