Ranchi: देशभर में आज वट सावित्री व्रत (Vat Savitri Vrat) को लेकर श्रद्धा और आस्था का अद्भुत नजारा देखने को मिला। ज्येष्ठ अमावस्या के पावन अवसर पर सुबह से ही बड़ी संख्या में सुहागिन महिलाएं पारंपरिक वेशभूषा और सोलह श्रृंगार कर पूजा स्थल पर पहुंचने लगीं। हाथों में पूजा सामग्री की थाली सजाए महिलाओं ने विधि-विधान के साथ वट वृक्ष (बरगद के पेड़) की पूजा-अर्चना की।
महिलाओं ने अपने पति की लंबी उम्र, परिवार की सुख-समृद्धि और अखंड सौभाग्य की कामना करते हुए यह कठिन व्रत रखा। सुबह से ही पूजा स्थलों पर भारी भीड़ के कारण माहौल पूरी तरह भक्तिमय बना रहा और पूरे क्षेत्र में जबरदस्त धार्मिक उत्साह दिखाई दिया।
Vat Savitri Vrat 2026: पारंपरिक गीतों से गूंजा पूजा स्थल, महिलाओं ने सुनी सावित्री-सत्यवान की कथा
कई सुहागिन महिलाएं समूहों में पारंपरिक लोक गीत गाते हुए पूजा स्थल तक पहुंचीं, जिससे पूरा वातावरण आध्यात्मिक रंग में रंग गया।पूजा के दौरान महिलाओं ने बरगद के पेड़ पर जल, रोली, अक्षत अर्पित किए और पेड़ की परिक्रमा करते हुए उस पर कच्चा सूत (धागा) बांधा। इसके बाद सभी ने एक साथ बैठकर यमराज से पति के प्राण वापस लाने वाली सती सावित्री और सत्यवान की पौराणिक कथा सुनी। कई महिलाओं ने इस दिन निर्जला व्रत (बिना पानी के) रखकर अपने पति की दीर्घायु और परिवार की खुशहाली के लिए ईश्वर से प्रार्थना की।
बाजारों में रही रौनक, दिनभर बनी रही चहल-पहल
वट सावित्री पूजा को लेकर केवल पूजा स्थलों पर ही नहीं, बल्कि आसपास के बाजारों और पूरे इलाके में दिनभर चहल-पहल बनी रही। सुबह से ही फूल, फल, मिठाई, बांस के पंखे और अन्य पूजा सामग्री की दुकानों पर महिलाओं की भारी भीड़ देखी गई। स्थानीय लोगों ने बताया कि हर वर्ष यहां बड़ी संख्या में महिलाएं पूजा करने पहुंचती हैं और इस बार भी सुबह से लेकर दोपहर बाद तक पूजा-अर्चना का यह सिलसिला लगातार जारी रहा।
धार्मिक महत्व: दीर्घायु और स्थिरता का प्रतीक है वट वृक्ष
पूजा संपन्न करा रहे स्थानीय पंडित जी ने इस व्रत के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया: “हिंदू धर्म में वट वृक्ष (बरगद) को दीर्घायु, अमरत्व और स्थिरता का प्रतीक माना गया है। इसकी जड़ें बेहद मजबूत और गहरी होती हैं, जो वैवाहिक जीवन की स्थिरता को दर्शाती हैं। श्रद्धा और नियमपूर्वक किया गया वट सावित्री व्रत दांपत्य जीवन में सुख-शांति, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है।”
महिलाओं ने न केवल अपने निजी परिवार बल्कि समाज में खुशहाली, सुख-शांति और आपसी प्रेम बनाए रखने की भी सामूहिक कामना की। पूजा के बाद महिलाओं ने अपने से बड़ों का आशीर्वाद लिया और सुहाग सामग्री का दान कर व्रत संपन्न किया।








