Dhanbad: पश्चिम बंगाल-झारखंड सीमा पर नशे के कारोबार के खिलाफ सालानपुर थाना पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए करीब एक करोड़ रुपये कीमत की 500 ग्राम से अधिक ब्राउन शुगर बरामद की है। पुलिस ने मामले में दो कथित तस्करों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों में चिरकुंडा निवासी अमित कुमार साव और आसनसोल के हीरापुर निवासी नाजिम उद्दीन खान शामिल हैं।
पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि धांगुड़ी-काशीडांगा इलाके से झारखंड की ओर ब्राउन शुगर की खेप भेजी जा रही है। सूचना के आधार पर पुलिस ने नाकेबंदी कर वाहनों की जांच शुरू की। इसी दौरान झारखंड की ओर जा रही एक पिकअप वैन की तलाशी में भारी मात्रा में ब्राउन शुगर बरामद हुई। कार्रवाई के बाद दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया।
चिरकुंडा पहुंचने से पहले पकड़ी गई नशे की खेप
सबसे गंभीर सवाल यह है कि बरामद नशीला पदार्थ झारखंड के चिरकुंडा की ओर ले जाया जा रहा था। समय रहते पुलिस की कार्रवाई नहीं होती तो यह खेप चिरकुंडा और आसपास के इलाकों में पहुंच सकती थी। इसके बाद नशे के कारोबार का जाल और फैलने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
दोनों आरोपियों के खिलाफ NDPS एक्ट के तहत मामला दर्ज कर कोर्ट में पेश किया गया है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इतनी बड़ी मात्रा में ब्राउन शुगर आखिर किसके इशारे पर लाई जा रही थी और इसके पीछे कौन लोग सक्रिय हैं।
चिरकुंडा-कुमारधुबी में नेटवर्क के कनेक्शन की जांच जरूरी
सूत्रों के अनुसार, गिरफ्तार आरोपी के चिरकुंडा और कुमारधुबी इलाके में कई परिचित होने की बात सामने आ रही है। हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि पुलिस जांच के बाद ही हो सकेगी। अगर इन कड़ियों की पुष्टि होती है तो मामला महज दो तस्करों की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि चिरकुंडा-कुमारधुबी से लेकर बंगाल तक फैले संभावित अंतरराज्यीय ड्रग्स नेटवर्क का खुलासा हो सकता है।
एक करोड़ की खेप ने खोली नशे के कारोबार की पोल
एक करोड़ रुपये की ब्राउन शुगर की बरामदगी ने सीमा क्षेत्र में सक्रिय कथित ड्रग्स नेटवर्क को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आखिर इतनी बड़ी खेप किसके लिए थी? इसका असली सरगना कौन है? चिरकुंडा में इसके संपर्क कौन-कौन हैं और नशे का कारोबार कितने इलाकों तक फैला है? इन सवालों के जवाब पुलिस जांच में सामने आने बाकी हैं।
अब नजर पुलिस की अगली कार्रवाई पर है-क्या गिरफ्तार दो तस्करों के पीछे छिपे बड़े सरगना और चिरकुंडा-कुमारधुबी में उसके नेटवर्क तक पुलिस पहुंच पाती है, या मामला गिरफ्तारी तक ही सिमटकर रह जाएगा?
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