Ranchi: संत जेवियर्स कॉलेज, रांची के भूविज्ञान विभाग ने शनिवार को IQAC के सहयोग से राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस मनाया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को अंतरिक्ष विज्ञान, भू-स्थानिक प्रौद्योगिकी, पृथ्वी एवं ग्रह विज्ञान से जोड़ना और भारत की अंतरिक्ष उपलब्धियों की जानकारी देना था।
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन के साथ व विभागाध्यक्ष डॉ. मेबल एम. टोप्पो ने स्वागत संभाषण से हुआ| उन्होंने कहा कि अंतरिक्ष विज्ञान केवल ब्रह्मांड की खोज तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पृथ्वी के संसाधनों के सतत प्रबंधन, आपदा न्यूनीकरण, जलवायु परिवर्तन के अध्ययन तथा पर्यावरण संरक्षण में भी अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
प्राचार्य डॉ. फादर रॉबर्ट प्रदीप कुजूर, एस.जे. ने विद्यार्थियों से वैज्ञानिक जिज्ञासा, नवाचार एवं अनुसंधान की भावना विकसित करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि भारत की अंतरिक्ष उपलब्धियाँ युवाओं को विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने के लिए प्रेरित करती हैं। उन्होंने इस प्रकार के कार्यक्रमों को विद्यार्थियों के समग्र बौद्धिक विकास के लिए अत्यंत आवश्यक बताया।
चंद्रयान-3 और भविष्य के मिशनों पर चर्चा
मौके पर मुख्य अतिथि के तौर पर बीआईटी मेसरा रिमोट सेंसिंग एवं जियोइन्फॉर्मेटिक्स विभाग के प्रो. (डॉ.) अखौरी प्रमोद कृष्ण अंतरिक्ष कार्यक्रम की नवीनतम उपलब्धियों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने चंद्रयान-3 के वैज्ञानिक परिणामों की विस्तृत चर्चा करते हुए बताया कि प्रज्ञान रोवर के LIBS (Laser Induced Breakdown Spectroscope) उपकरण द्वारा चंद्रमा की सतह पर सल्फर (Sulphur) सहित एल्युमिनियम, कैल्शियम, लौह, टाइटेनियम, क्रोमियम एवं सिलिकॉन जैसे तत्वों की उपस्थिति की पुष्टि की गई। उन्होंने APXS (Alpha Particle X-ray Spectrometer) द्वारा शिव शक्ति लैंडिंग स्थल के आसपास की चट्टानों की रासायनिक संरचना के विश्लेषण की जानकारी भी दी।
उन्होंने विक्रम लैंडर के वैज्ञानिक उपकरणों-ChaSTE, ILSA, RAMBHA-LP तथा Laser Retroreflector Array (LRA) की कार्यप्रणाली एवं वैज्ञानिक महत्त्व को सरल भाषा में समझाया। उन्होंने बताया कि इन उपकरणों के माध्यम से चंद्र सतह के तापीय गुण, चंद्र भूकंपीय गतिविधियाँ, निकट-सतही प्लाज़्मा तथा पृथ्वी-चंद्रमा गुरुत्वीय गतिशीलता का अध्ययन संभव हुआ है। प्रो. कृष्ण ने स्पेस (स्पेक्ट्रो-पोलारीमेट्री ऑफ हैबिटेबल प्लेनेट अर्थ) पेलोड द्वारा पृथ्वी के स्पेक्ट्रल सिग्नेचर के अध्ययन तथा भविष्य में बाह्य ग्रहों (एक्सोप्लैनेट्स) पर जीवन की खोज में इसकी उपयोगिता पर भी चर्चा की।
उन्होंने भारतीय अंतरिक्ष नीति 2023 के प्रमुख प्रावधानों को स्पष्ट करते हुए बताया कि नई नीति के अंतर्गत इसरो, इन-स्पेस तथा एनएसआईएल की भूमिकाओं का पुनर्गठन किया गया है, जिससे निजी उद्योगों, स्टार्टअप्स एवं गैर-सरकारी संस्थाओं की अंतरिक्ष क्षेत्र में सहभागिता को बढ़ावा मिलेगा तथा भारत वैश्विक अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था में अग्रणी भूमिका निभा सकेगा।
व्याख्यान के दौरान उन्होंने राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस 2026 की आधिकारिक थीम-“विकसित भारत की ओर-इनोवेशन, सहयोग और ग्लोबल स्पेस लीडरशिप की आकांक्षा”-पर विशेष प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि इस वर्ष की थीम का उद्देश्य स्वदेशी नवाचार, संस्थागत सहयोग, वैश्विक नेतृत्व तथा युवाओं को अंतरिक्ष विज्ञान एवं STEM शिक्षा से जोड़कर विकसित भारत के निर्माण में उनकी भागीदारी सुनिश्चित करना है। उन्होंने भारत के भावी मिशनों जैसे नेक्स्ट जेनरेशन लॉन्च व्हीकल (NGLV), गगनयान, भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन, चंद्रयान-4 तथा लूनर मिशन 2040 की रूपरेखा भी प्रस्तुत की।
अंतरिक्ष विज्ञान एवं भूविज्ञान आधारित मॉडल प्रदर्शनी का अवलोकन
मुख्य अतिथि ने विद्यार्थियों द्वारा तैयार किए गए अंतरिक्ष विज्ञान एवं भूविज्ञान आधारित मॉडल प्रदर्शनी का अवलोकन किया तथा उनके वैज्ञानिक दृष्टिकोण, रचनात्मकता एवं प्रस्तुतीकरण की सराहना की। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि जिज्ञासा, अनुसंधान और नवाचार ही विज्ञान की वास्तविक शक्ति हैं।
इस अवसर पर उप-प्राचार्य रेव. डॉ. फा. अजय ए. मिंज, एस.जे. तथा कुलसचिव (रजिस्ट्रार) डॉ. फा. प्रभात केनेडी सोरेंग ने भी अपने प्रेरणादायी संदेश में विद्यार्थियों को वैज्ञानिक दृष्टिकोण, नवाचार एवं अनुसंधान की संस्कृति को अपनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि विज्ञान केवल ज्ञान अर्जित करने का माध्यम नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के सतत विकास का आधार है। उन्होंने विद्यार्थियों से जिज्ञासु, रचनात्मक एवं उत्तरदायी वैज्ञानिक नागरिक बनने का आह्वान किया।
इस अवसर पर आयोजित अंतरिक्ष विज्ञान प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता एवं मॉडल निर्माण प्रतियोगिता के विजेताओं को महाविद्यालय के प्राचार्य, मुख्य अतिथि एवं विभागाध्यक्ष द्वारा प्रमाण-पत्र एवं पदक प्रदान कर सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम का सफल संचालन छात्र-छात्राओं द्वारा किया गया तथा अंत में डॉ. मेल्विन ए. एक्का ने धन्यवाद ज्ञापन किया। मौके पर कॉलेज के प्रो. विनोद कुमार तिर्की, डॉ. सोमेश सेनगुप्ता, डॉ. मेल्विन ए. एक्का, विकी शर्मा, मनीषा बास्के सहित छात्र-छात्राएं उपस्थित थे|

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