Krishna Janmashtami 2026: भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव को लेकर झारखंड में भक्ति का माहौल बन चुका है। रांची से लेकर देवघर तक मंदिरों में अलग-अलग परंपराओं के साथ जन्माष्टमी मनाई जाती है। कहीं ठाकुर जी को झूला झुलाया जाता है, कहीं पूरी रात भजन-कीर्तन होता है, तो कहीं राधा-कृष्ण के बाल स्वरूप में सजे बच्चों की झांकियां लोगों का मन मोह लेती हैं।
जन्माष्टमी का पर्व भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। इस वर्ष 4 सितंबर को होने वाले आयोजन को लेकर रांची के कई मंदिरों में विशेष तैयारियां की गई हैं। व्रत, पूजा, भोग और मध्यरात्रि में जन्मोत्सव की परंपरा के साथ झारखंड में इस पर्व का अपना खास सांस्कृतिक रंग दिखाई देता है।
रांची के पुंदाग में झूलन उत्सव और भजन-जागरण
रांची के पुंदाग स्थित श्री राधा कृष्ण प्रणामी मंदिर में जन्माष्टमी के मौके पर भव्य आयोजन की तैयारी है। यहां मंदिर का विशेष श्रृंगार किया जाता है और ठाकुर जी के लिए झूलन उत्सव आयोजित होता है।
धार्मिक कार्यक्रमों के साथ नृत्य-नाटिका, भजन-जागरण और महाप्रसाद वितरण जैसी गतिविधियां भी जन्माष्टमी के उत्सव को खास बनाती हैं। यह आयोजन सिर्फ पूजा तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसमें भक्ति और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का सुंदर संगम देखने को मिलता है।
डोरंडा और रांची के दूसरे मंदिरों में भी खास तैयारी
रांची में जन्माष्टमी की परंपरा अलग-अलग इलाकों में अलग रूप में दिखाई देती है। डोरंडा के राधा-कृष्ण मंदिर में भी पिछले वर्षों में जन्मोत्सव के भव्य आयोजन होते रहे हैं।
कृष्णा नगर कॉलोनी के राधा-कृष्ण मंदिर में जन्माष्टमी के दौरान गीता पाठ, भजन और भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए जाते रहे हैं।
यही वजह है कि रांची में जन्माष्टमी केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि बच्चों, युवाओं और बुजुर्गों को जोड़ने वाला सांस्कृतिक आयोजन भी बन जाती है।
बाल गोपाल और राधा-कृष्ण की वेशभूषा का खास आकर्षण
इस बार भी जन्माष्टमी पर रांची में बच्चों को राधा-कृष्ण के स्वरूप में सजाने की परंपरा देखने को मिलेगी। श्री राधा-कृष्ण बाल रूप सज्जा प्रतियोगिता जैसे आयोजन बच्चों को भारतीय धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं से जोड़ने का माध्यम बनते हैं।
नन्हे बच्चों को कान्हा की तरह मोरपंख, मुकुट और बांसुरी से सजाया जाता है, जबकि बालिकाएं राधारानी के स्वरूप में तैयार होती हैं। मंदिर परिसरों में इन झांकियों का अलग ही आकर्षण रहता है।
मोरहाबादी से दही हांडी की धूम
रांची में जन्माष्टमी के अवसर पर दही हांडी की परंपरा भी उत्सव का महत्वपूर्ण हिस्सा रही है। मोरहाबादी मैदान में पूर्व वर्षों में श्रीकृष्ण जन्मोत्सव और दही हांडी प्रतियोगिता जैसे बड़े आयोजन हो चुके हैं।
शहर में अलग-अलग सामाजिक और धार्मिक संगठनों की ओर से मटकी फोड़ प्रतियोगिताएं भी आयोजित की जाती हैं। यह परंपरा भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं और माखन-चोरी की लोकप्रिय कथाओं से जुड़ी मानी जाती है।
देवघर में झूलनोत्सव की अलग परंपरा
झारखंड की धार्मिक राजधानी कहे जाने वाले देवघर में भी कृष्ण भक्ति का अलग रंग दिखाई देता है। बाबा मंदिर परिसर के भीतरखंड स्थित राधा-कृष्ण मंदिर समेत शहर के विभिन्न मंदिरों में झुलनोत्सव की परंपरा विशेष रूप से देखी जाती है।
हाल के झुलनोत्सव में राधा-कृष्ण को विशेष झूले पर विराजमान कर पूजा-अर्चना की गई और पांच दिवसीय उत्सव आयोजित किया गया। जन्माष्टमी से पहले होने वाले ऐसे धार्मिक आयोजनों के कारण देवघर में कृष्ण भक्ति का माहौल पहले से ही बनने लगता है।
आधी रात में होगा कृष्ण जन्मोत्सव
जन्माष्टमी की सबसे खास परंपरा आधी रात का जन्मोत्सव है। श्रद्धालु दिनभर व्रत रखते हैं और रात में भगवान कृष्ण के जन्म का इंतजार करते हैं। मंदिरों और घरों में लड्डू गोपाल का विशेष श्रृंगार किया जाता है।
मध्यरात्रि में पूजा, आरती, शंखनाद और जयकारों के साथ कृष्ण जन्मोत्सव मनाया जाता है। इसके बाद पंचामृत, माखन-मिश्री और अन्य प्रसाद का भोग लगाया जाता है। जन्माष्टमी की पूजा में क्षेत्रीय और पारिवारिक परंपराओं के अनुसार कुछ अंतर भी देखने को मिलता है।
Krishna Janmashtami 2026: झारखंड की जन्माष्टमी में क्या है खास?
झारखंड में जन्माष्टमी का सबसे खास पहलू यह है कि यहां धार्मिक आस्था के साथ स्थानीय सांस्कृतिक रंग भी जुड़ जाता है। रांची में झूलन उत्सव, भजन-कीर्तन और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां होती हैं, वहीं दही हांडी और मटकी फोड़ जैसे आयोजन युवाओं को आकर्षित करते हैं।
दूसरी ओर, देवघर में मंदिर परंपरा और झूलनोत्सव कृष्ण भक्ति को एक अलग स्वरूप देते हैं। यही विविधता झारखंड की जन्माष्टमी को खास बनाती है।
नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की… के जयकारों के बीच रांची से देवघर तक इस बार भी जन्माष्टमी पर मंदिरों में भक्ति और उत्सव का अनोखा संगम देखने को मिलेगा।
कंटेंट राइटर एवं रिपोर्टर, खबर मन्त्र। झारखंड के स्थानीय समाचार, महिला विकास, कला और लाइफस्टाइल खबरों की विशेष रिपोर्टिंग।








