रांची: राजधानी रांची के पॉश इलाके अशोक नगर (रोड नंबर-1) में आम रास्ते के विवाद ने एक बेहद गंभीर और तूल पकड़ते विवाद का रूप ले लिया है। मामला राज्य के एक बेहद प्रभावशाली पद पर तैनात वरिष्ठ पुलिस अधिकारी से जुड़ा होने के कारण शहर भर में चर्चा का विषय बना हुआ है। इस पूरे विवाद में झारखंड कैडर के senior IPS अधिकारी व DIG Rail आलोक प्रियदर्शी और पिछले पांच दशकों से वहां रह रहे वरिष्ठ पत्रकार सैयद शरीफ इब्राहिम आमने-सामने आ गए हैं।
क्या है पूरा मामला? (Dispute Overview)
विवाद का मुख्य कारण अशोक नगर रोड नंबर-1 स्थित एक प्लॉट है, जिसे हाल ही में आईपीएस आलोक प्रियदर्शी ने खरीदा है। यह प्लॉट पत्रकार शरीफ इब्राहिम के पैतृक घर के ठीक बगल में स्थित है, जहां उनका संयुक्त परिवार पिछले लगभग 50 वर्षों से निवास कर रहा है।
पीड़ित परिवार का दावा है कि अशोक नगर सोसाइटी के स्वीकृत (approved) नक्शे के अनुसार, वहां 40 फीट wide पहुंच मार्ग (Access Road) दर्ज है। इसी आम रास्ते का उपयोग इब्राहिम परिवार सहित आसपास रहने वाले 5 अन्य परिवार वर्षों से अपने आवागमन के लिए करते आ रहे हैं।

कैसे बढ़ा विवाद: गाड़ी खड़ी करने से लेकर नोकझोंक तक
मामला तब गंभीर हो गया जब आईपीएस अधिकारी द्वारा कथित तौर पर पीड़ित परिवार के मुख्य प्रवेश द्वार (Main Gate) के ठीक सामने अपनी गाड़ी (JH01CC 2556) खड़ी कर दी गई, जिससे आम रास्ता पूरी तरह बाधित हो गया।
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रास्ता रोकने का आरोप: वाहन पार्क होने के कारण परिवार का बाहर निकलना बंद हो गया।
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सोशल मीडिया पर वीडियो हुआ वायरल: जब निवासियों ने गाड़ी हटाने का अनुरोध किया, तो दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस हो गई। इस बहस का वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (ट्विटर) पर तेजी से वायरल हो गया।
मुख्यमंत्री से लिखित शिकायत और संगीन आरोप
मामले की गंभीरता को देखते हुए पीड़ित परिवार ने इस संबंध में सीधे झारखंड के मुख्यमंत्री और स्थानीय अरगोड़ा थाना प्रभारी को लिखित आवेदन देकर निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की गुहार लगाई है।
लिखित शिकायत पत्र (Complaint Details) में आईपीएस अधिकारी पर निम्नलिखित आरोप लगाए गए हैं:
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दबंगई और धमकी: आरोप है कि अधिकारी ने अपने बॉडीगार्ड्स के जरिए स्थानीय निवासियों को डराने-धमकाने की कोशिश की और कथित तौर पर बॉडीगार्ड्स को बंदूक का खौफ दिखाने का निर्देश दिया।
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झूठे मुकदमों में फंसाने का डर: पीड़ित परिवार का कहना है कि उन्हें और उनके बच्चों को पुलिसिया धौंस दिखाकर फर्जी केस में फंसाने व जेल भेजने की धमकियां दी गईं।
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आपत्तिजनक टिप्पणियां: शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि विवाद के दौरान परिवार की धार्मिक पहचान को लेकर भी आपत्तिजनक और अमर्यादित बातें कही गईं।
निवासियों की मांग: सुरक्षा और भूमि रिकॉर्ड्स की उच्च स्तरीय जांच
अशोक नगर के इस हिस्से में रहने वाले 5 से 6 परिवारों ने अपनी सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता जताई है। पीड़ित परिवार ने प्रशासन और राज्य सरकार से मांग की है कि:
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तत्काल पुलिस सुरक्षा प्रदान की जाए: भयमुक्त वातावरण में रहने के लिए निवासियों ने सुरक्षा की मांग की है।
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निष्पक्ष प्रशासनिक जांच: विवादित भूमि के कागजात (Land Documents), स्वीकृत भवन नक्शे (Approved Building Maps) और सोसाइटी के मूल मास्टर प्लान की एक उच्च-स्तरीय, तटस्थ प्रशासनिक टीम द्वारा गहन जांच कराई जाए, ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके।

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