Breaking News: भारतीय मूल की न्यायविद नवनीतम ‘नवी’ पिल्लै को 2026 का नोबेल शांति पुरस्कार देने की घोषणा की गई है। नॉर्वे की नोबेल समिति ने उन्हें शांति और अंतरराष्ट्रीय कानून को मजबूत करने के प्रयासों के लिए सम्मानित किया है। नवी पिल्लै का जन्म दक्षिण अफ्रीका में हुआ था।
समिति के अनुसार, उन्होंने युद्ध अपराध, मानवता के खिलाफ अपराध और नरसंहार के मामलों में जवाबदेही तय करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
नावी पिल्लै का जन्म दक्षिण अफ्रीका के डरबन में भारतीय तमिल मूल के परिवार में हुआ था। रंगभेद के दौर में उन्होंने वकील के रूप में उन लोगों का बचाव किया, जो नस्लीय भेदभाव के खिलाफ आवाज उठा रहे थे। उनके लंबे कानूनी करियर में मानवाधिकारों और पीड़ितों को न्याय दिलाने का मुद्दा प्रमुख रहा।
रवांडा नरसंहार के मुकदमों में अहम भूमिका
पिल्लै के करियर का महत्वपूर्ण पड़ाव रवांडा के नरसंहार से जुड़े मामलों की सुनवाई रहा। वह अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायाधिकरण में न्यायाधीश रहीं और 1999 से 2003 तक इसकी अध्यक्षता की। इन मुकदमों में यौन हिंसा को नरसंहार के अपराध से जोड़कर देखने की दिशा में महत्वपूर्ण कानूनी मिसालें सामने आईं।
संयुक्त राष्ट्र में भी किया काम
वर्ष 2008 से 2014 तक नावी पिल्लै ने संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार उच्चायुक्त के रूप में काम किया। इस दौरान उन्होंने मानवाधिकार उल्लंघनों और दोषियों की जवाबदेही के मुद्दों पर जोर दिया।
उनका सम्मान अंतरराष्ट्रीय न्याय व्यवस्था और मानवाधिकार संरक्षण में कानून की भूमिका को वैश्विक पहचान देता है। नोबेल शांति पुरस्कार प्रदान करने का समारोह 10 दिसंबर को ओस्लो में होगा।

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