नई दिल्ली: आईआरसीटीसी (IRCTC) से जुड़े कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के प्रमुख और पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव की याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। लालू यादव ने ट्रायल कोर्ट की ओर से आरोप तय करने के आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी है।
मामले की सुनवाई जस्टिस सचिन दत्ता की पीठ ने की। इस दौरान अदालत ने कहा कि लालू यादव चाहें तो ट्रायल कोर्ट में आवेदन देकर सुनवाई की अगली तारीख बढ़ाने का अनुरोध कर सकते हैं। निचली अदालत में मामले की सुनवाई 30 अक्टूबर को निर्धारित है। वहीं, हाईकोर्ट ने याचिका पर अगली सुनवाई के लिए 3 दिसंबर की तारीख तय की है।
सितंबर में ट्रायल कोर्ट ने दिया था आरोप तय करने का आदेश
इस मामले में 10 सितंबर 2026 को दिल्ली की राऊज एवेन्यू कोर्ट के विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने ने लालू प्रसाद यादव, उनकी पत्नी राबड़ी देवी, बेटे तेजस्वी यादव और अन्य आरोपियों के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग से संबंधित आरोप तय करने का आदेश दिया था।
इससे पहले अक्टूबर 2025 में अदालत ने संबंधित भ्रष्टाचार मामले में भ्रष्टाचार, आपराधिक साजिश और धोखाधड़ी से जुड़े आरोप तय किए थे।
क्या है IRCTC होटल टेंडर मामला?
यह मामला वर्ष 2004 से 2009 के बीच का है, जब लालू प्रसाद यादव केंद्र सरकार में रेल मंत्री थे।
सीबीआई और ईडी का आरोप है कि इस अवधि में रांची और पुरी स्थित रेलवे के दो होटलों के संचालन का ठेका निजी कंपनी सुजाता होटल्स को देने की प्रक्रिया में कथित अनियमितताएं हुई थीं।
जांच एजेंसियों के मुताबिक, टेंडर प्रक्रिया में कथित हेरफेर के बदले लालू परिवार से जुड़ी कंपनियों और सहयोगियों को बाजार मूल्य से कम कीमत पर जमीन और संपत्ति से जुड़े लाभ पहुंचाए गए।
हालांकि, ये जांच एजेंसियों के आरोप हैं और मामले में अंतिम न्यायिक फैसला आना बाकी है।
लालू यादव ने आरोपों को बताया राजनीति से प्रेरित
लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार ने आरोपों से इनकार किया है। उनका कहना है कि मामला राजनीतिक कारणों से उठाया गया है और उनके खिलाफ ठोस सबूत नहीं हैं।
दिल्ली हाईकोर्ट में लालू यादव की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल और मणिंदर सिंह ने पक्ष रखा। उनके साथ अधिवक्ता वरुण जैन, नवीन कुमार, सुमित सिंह, सतीश कुमार और खुशबू सिंह भी शामिल रहे।
फिलहाल हाईकोर्ट ने ईडी से जवाब मांगा है। अदालत ने अभी आरोप तय करने के आदेश को रद्द नहीं किया है। अब इस मामले में 3 दिसंबर की सुनवाई महत्वपूर्ण होगी।

विशेष संवाददाता | Khabar Mantra
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