तेहरान/वॉशिंगटन: अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच सोमवार, 2 नवंबर की देर रात ईरान के केश्म द्वीप पर कम से कम पांच जोरदार धमाके हुए। इसके अलावा बंदर लेंगेह शहर में भी विस्फोट की खबर सामने आई। यह घटनाक्रम ऐसे समय हुआ है, जब अमेरिका में मंगलवार, 3 नवंबर को मिडटर्म चुनाव के लिए मतदान होना है।
अमेरिकी अखबार द वॉल स्ट्रीट जर्नल ने अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से दावा किया है कि केश्म द्वीप पर हमला अमेरिका ने किया। अधिकारियों के मुताबिक, हाल के हफ्तों में ईरान के खिलाफ सीमित सैन्य कार्रवाई की गई है। हालांकि, अमेरिकी प्रशासन की ओर से इन हमलों का विस्तृत आधिकारिक ब्योरा सार्वजनिक नहीं किया गया है।
ईरानी सरकारी समाचार एजेंसी IRNA ने केश्म द्वीप पर पांच धमाकों की सूचना दी। वहीं ईरान की समाचार एजेंसी फार्स के मुताबिक, बंदर लेंगेह में समुद्र की दिशा से विस्फोटों की आवाज सुनी गई। ईरानी मीडिया ने हमले के लिए अमेरिका या इजराइल की जिम्मेदारी की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। दूसरी ओर, ईरान ने अमेरिकी निगरानी ड्रोन मार गिराने का दावा किया है। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
अमेरिका के निशाने पर क्यों है केश्म द्वीप?
केश्म द्वीप फारस की खाड़ी और होर्मुज स्ट्रेट के पास स्थित ईरान का सबसे बड़ा द्वीप है। करीब 1,445 वर्ग किलोमीटर में फैला यह द्वीप समुद्री व्यापार और सैन्य रणनीति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है।
होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे अहम तेल परिवहन मार्गों में शामिल है। इस रास्ते से बड़ी मात्रा में वैश्विक तेल और गैस का व्यापार होता है। ऐसे में यहां ईरान की सैन्य मौजूदगी अमेरिका और उसके सहयोगी देशों के लिए रणनीतिक चिंता का विषय रही है।
अंडरग्राउंड सैन्य ठिकाने: रिपोर्टों के मुताबिक, केश्म द्वीप पर भूमिगत सुरंगों और सैन्य ठिकानों का नेटवर्क है। यहां मिसाइल प्रणालियों और सैन्य उपकरणों को सुरक्षित रखने की व्यवस्था होने की बात सामने आती रही है।
होर्मुज स्ट्रेट पर रणनीतिक पकड़: इस द्वीप की भौगोलिक स्थिति ईरान को समुद्री गतिविधियों पर नजर रखने और जरूरत पड़ने पर जहाजों की आवाजाही प्रभावित करने की क्षमता देती है।
वैश्विक तेल सप्लाई पर असर: होर्मुज स्ट्रेट में तनाव बढ़ने का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार और समुद्री व्यापार पर पड़ सकता है। भारत समेत कई देश इस समुद्री मार्ग से होने वाली ऊर्जा आपूर्ति पर निर्भर हैं।
ट्रंप बोले- ईरान से समझौता संभव
धमाकों की खबर से पहले सोमवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ समझौते की उम्मीद जताई थी। पत्रकारों ने उनसे पूछा कि क्या अमेरिका मिडटर्म चुनाव के बाद ईरान पर फिर हमला करने की योजना बना रहा है? इस पर ट्रंप ने जवाब दिया- नहीं।
ट्रंप ने कहा कि तेहरान के साथ समझौता हो सकता है। उन्होंने सोशल मीडिया पर दावा किया कि बड़े युद्ध की आशंका कम होने से तेल की कीमतों में गिरावट आई है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोमवार को तेल की कीमतों में 7 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई। इसे अमेरिका और ईरान के बीच संभावित समझौते की उम्मीद से जोड़कर देखा गया।
अमेरिका-ईरान युद्ध की पूरी टाइमलाइन
- 28 फरवरी 2026: अमेरिका और इजराइल का ईरान पर हमला
अमेरिका ने ऑपरेशन एपिक फ्यूरी और इजराइल ने ऑपरेशन रोरिंग लायन के तहत ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान शुरू किया। परमाणु ठिकानों, मिसाइल प्रणालियों और सैन्य प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया गया। हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई समेत कई वरिष्ठ अधिकारी मारे गए।
- ईरान का पलटवार: खाड़ी देशों तक पहुंचा संघर्ष
अमेरिकी और इजराइली हमलों के जवाब में ईरान ने मिसाइल और ड्रोन हमले शुरू किए। इजराइल के अलावा खाड़ी क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को भी निशाना बनाया गया। बहरीन, कतर, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और कुवैत में तनाव बढ़ा।
- होर्मुज स्ट्रेट पर संकट: प्रभावित हुई तेल सप्लाई
ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों की आवाजाही को सीमित करने की कार्रवाई की। इसके जवाब में अमेरिका ने ईरानी समुद्री व्यापार और बंदरगाहों पर नाकाबंदी की। इससे अंतरराष्ट्रीय तेल आपूर्ति और समुद्री व्यापार प्रभावित हुआ।
- अप्रैल 2026: युद्धविराम और शांति वार्ता
पाकिस्तान की मध्यस्थता से 8 अप्रैल को अमेरिका और ईरान के बीच दो सप्ताह के युद्धविराम पर सहमति बनी। इसके बाद 11-12 अप्रैल को इस्लामाबाद में दोनों देशों के प्रतिनिधियों के बीच बातचीत हुई, लेकिन परमाणु कार्यक्रम और समुद्री सुरक्षा जैसे मुद्दों पर सहमति नहीं बन सकी।
- जून 2026: समझौते की कोशिश, फिर बढ़ा तनाव
जून में दोनों देशों के बीच समझौता ज्ञापन (MoU) तैयार हुआ। इसका उद्देश्य अगले 60 दिनों में व्यापक समझौते की दिशा में बातचीत करना था। हालांकि, कई मुद्दों पर मतभेद बने रहे और अगस्त तक यह व्यवस्था प्रभावी नहीं रह सकी।
- अक्टूबर-नवंबर 2026: 47 अरब डॉलर से ज्यादा खर्च, फिर बढ़े सैन्य तनाव
अमेरिकी सैन्य अनुमान के मुताबिक, ईरान युद्ध में अमेरिका का खर्च 16 अक्टूबर 2026 तक बढ़कर करीब 47.1 अरब डॉलर हो गया था। इसमें हथियारों और सैन्य उपकरणों को बदलने का खर्च भी शामिल है।
इस बीच अमेरिका और ईरान के बीच कूटनीतिक बातचीत की कोशिशें जारी हैं। कतर मध्यस्थता की भूमिका निभा रहा है। लेकिन होर्मुज स्ट्रेट, अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी और ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर मतभेद बने हुए हैं।
अब केश्म द्वीप पर हुए ताजा धमाकों ने एक बार फिर क्षेत्र में सैन्य तनाव बढ़ने की आशंका पैदा कर दी है।

विशेष संवाददाता | Khabar Mantra
विकाश कुमार झारखंड के रांची के रहने वाले और यहीं जन्मे पत्रकार एवं डिजिटल मीडिया प्रोफेशनल हैं। झारखंड में लंबे समय से रहने और काम करने के कारण उन्हें राज्य के गांवों, शहरों, स्थानीय समाज, प्रशासन और जमीनी मुद्दों की गहरी समझ है।
5+ वर्षों के पत्रकारिता अनुभव के साथ उन्होंने Gandiva, Lagatar.in, News11 Digital और Prabhat Khabar Digital जैसे मीडिया संस्थानों में काम किया है। वर्तमान में Khabar Mantra Digital में Digital Media Manager-cum-Executive एवं विशेष संवाददाता के रूप में कार्यरत हैं।
वे विशेष रूप से कोयलांचल, BCCL, कोलियरियों, औद्योगिक क्षेत्रों, स्थानीय प्रशासन और जनहित के मुद्दों पर रिपोर्टिंग करते हैं।
Expertise: Journalism • Digital Media • Ground Reporting • Content & Social Media • Video Production • News Analysis









