झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा नेता चंपई सोरेन की प्रेस कॉन्फ्रेंस को लेकर प्रदेश की राजनीति में नया घमासान शुरू हो गया है. कांग्रेस पार्टी ने इस प्रेस वार्ता को “हताशा में दिया गया एक घिसा-पिटा राजनीतिक ड्रामा” करार दिया है, जिसमें जनहित या राज्य के भविष्य की कोई चर्चा नहीं थी.
कांग्रेस के मीडिया चेयरमैन सतीश पौल मुजनी ने तीखा हमला बोलते हुए कहा कि चंपई सोरेन अब झूठ और ज़हर फैलाने की राजनीति पर उतर आए हैं. उन्होंने कहा, “सत्ता से बाहर होते ही भाजपा नेता अफवाह और भय फैलाने की राजनीति करने लगे हैं. आदिवासी महिला से छेड़खानी जैसे गंभीर विषय को राजनीतिक रंग देना शर्मनाक है.”
भाजपा की दोहरी नीति पर सवाल
सतीश पौल मुजनी ने भाजपा पर दोहरी नीति अपनाने का आरोप लगाया. उन्होंने पूछा, “जब दिल्ली में आदिवासी महिला के साथ बलात्कार होता है, तब भाजपा नेताओं की जुबान क्यों सिल जाती है? मणिपुर की घटनाओं पर प्रधानमंत्री चुप क्यों रहते हैं?” उन्होंने कहा कि भाजपा को महिलाओं के अधिकारों पर बोलने से पहले अपने कर्मों का आईना देखना चाहिए.
उन्होंने यह भी उजागर किया कि 2021 से 2024 के बीच अनुसूचित जातियों की 47,000 से अधिक शिकायतें राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (NCSC) में दर्ज की गई हैं, जिनमें अधिकतर मामले भाजपा शासित राज्यों जैसे उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और ओडिशा से हैं. इन शिकायतों में जातीय हिंसा, भूमि विवाद और सरकारी योजनाओं में भेदभाव जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं.
“बांग्लादेशी घुसपैठी” मुद्दा सिर्फ चुनावी हथकंडा
कांग्रेस नेता ने भाजपा द्वारा बार-बार उठाए जा रहे “बांग्लादेशी घुसपैठियों” के मुद्दे को भी मनगढ़ंत और साम्प्रदायिक एजेंडा बताया. उन्होंने कहा, उन्होंने कहा कि यह भाजपा का पुराना चुनावी हथकंडा है, जिसे चुनाव के समय हवा में उछाल दिया जाता है.
“पूर्व मुख्यमंत्री का बदला हुआ रुख”
मुजनी ने कहा कि जब चंपई सोरेन मुख्यमंत्री थे, तब न तो उन्हें घुसपैठियों की चिंता थी, न धर्मांतरण की. अब भाजपा का दामन थामते ही वे वही बातें दोहरा रहे हैं, जो भाजपा का शीर्ष नेतृत्व सुनना चाहता है.












