poocpills: विज्ञान और चिकित्सा के क्षेत्र में एक अनोखा और चौंकाने वाला प्रयोग सामने आया है। ब्रिटिश डॉक्टर मरीजों को ‘पू पिल्स’ यानी इंसानी मल से बनी कैप्सूल खाने की सलाह दे रहे हैं। यह सुनकर आपको भले ही अजीब लगे, लेकिन शोधकर्ताओं का दावा है कि यह उपचार गंभीर बीमारियों जैसे कैंसर, लिवर रोग और एंटीबायोटिक-रेसिस्टेंट इंफेक्शन (सुपरबग्स) से लड़ने में बेहद कारगर साबित हो रहा है।
क्या होती हैं ‘पू पिल्स’?
‘पू पिल्स’ को वैज्ञानिक भाषा में फीकल माइक्रोबायोटा ट्रांसप्लांट (FMT) कहा जाता है। ये कैप्सूल हेल्दी डोनर्स के मल को फ्रीज-ड्राई करके तैयार की जाती हैं। न्यूयॉर्क पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, ये कैप्सूल अब गंभीर बीमारियों के उपचार में नई उम्मीद बनकर उभर रही हैं।
सुपरबग्स को मात दे रहीं पू-पिल्स
ब्रिटेन में हुए एक क्लिनिकल ट्रायल के दौरान हाल ही में 41 मरीजों पर यह परीक्षण किया गया। मरीजों को दो समूहों में बांटा गया – एक को पू-पिल्स दी गईं और दूसरे को प्लेसीबो। तीन दिन के सेवन के बाद और एक महीने की निगरानी में यह देखा गया कि पू-पिल्स लेने वाले मरीजों के पेट में हेल्दी बैक्टीरिया बस गए थे और हानिकारक सुपरबग्स गायब हो चुके थे।
शोधकर्ताओं की राय
लंदन के गाइज और सेंट थॉमस अस्पताल के प्रमुख शोधकर्ता डॉ. ब्लेयर मेरिक का कहना है कि, “यह एक रोमांचक खोज है। अब हम यह समझने लगे हैं कि सभी बैक्टीरिया खराब नहीं होते – कुछ हमारे स्वास्थ्य के लिए बेहद जरूरी होते हैं।”
माइक्रोबायोम एक्सपर्ट क्रिसी सेर्गाकी कहती हैं, “भविष्य में यह संभव है कि एंटीबायोटिक्स के बजाय हम पू-पिल्स का ही सहारा लें। यह थेरेपी पूरी मेडिकल इंडस्ट्री में क्रांति ला सकती है।”
क्यों बन सकती है यह थेरेपी भविष्य की जरूरत?
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, एंटीबायोटिक-रेसिस्टेंट इंफेक्शन यानी सुपरबग्स के कारण 2050 तक करीब 3.9 करोड़ लोगों की मौत हो सकती है। ऐसे में पू-पिल्स एक ऐसा विकल्प बन सकता है जो एंटीबायोटिक्स का एक सुरक्षित और प्रभावी विकल्प हो।
हालांकि यह चिकित्सा पद्धति थोड़ी अजीब जरूर लगती है, लेकिन वैज्ञानिक और चिकित्सकीय परिणाम इसे भविष्य की एक कारगर दवा बनाने की ओर इशारा करते हैं। अब देखना यह है कि आने वाले वर्षों में यह थेरेपी कितना व्यापक रूप से अपनाई जाती है।

विशेष संवाददाता | Khabar Mantra
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