Ranchi: मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के ‘नशा मुक्त झारखंड’ के संकल्प को साकार करने के लिए राज्यभर में 10 जून से 26 जून 2025 तक नशा मुक्ति अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान के तहत मंगलवार को प्रोजेक्ट भवन में एक राज्यस्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया, जिसमें स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने भाग लिया और अभियान की शुरुआत जागरूकता रथ को हरी झंडी दिखाकर की।
अभियान के प्रमुख बिंदु:
- 10,134 मेडिकल स्टोर में से 4000 से अधिक में CCTV इंस्टॉल, शेष में कार्य जारी।
- मोरहाबादी मैदान में 26 जून को होगा भव्य समापन।
- जागरूकता रथ सभी जिलों में घूमकर नशे के दुष्परिणाम के बारे में जनता को करेगा जागरूक।
- अफीम की खेती के खिलाफ अब तक 27,015 एकड़ भूमि पर विनिष्टीकरण, ड्रग माफियाओं की संपत्ति जब्त।
- रिनपास और CIP में नशे के आदी युवाओं के लिए चल रहा है इलाज।
- स्कूल-कॉलेजों में चलेंगे विशेष अवेयरनेस प्रोग्राम।
क्या बोले स्वास्थ्य मंत्री?
डॉ. अंसारी ने कहा कि नशा एक सामाजिक, मानसिक और आर्थिक बीमारी है, जिससे झारखंड के युवाओं को मुक्त करना सरकार की प्राथमिकता है। “गुटखा, शराब और अफीम जैसी बुरी लतों से बचाव के लिए व्यापक जागरूकता ज़रूरी है,” उन्होंने कहा। साथ ही उन्होंने घोषणा की कि जल्द ही झारखंड को रिम्स 2, छह नए मेडिकल कॉलेज और दो टेस्टिंग लैब की सौगात मिलेगी।
अफीम की खेती करने वालों पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी
डीजीपी अनुराग गुप्ता ने बताया कि झारखंड अब अफीम का बड़ा केंद्र बनता जा रहा है। शहरी क्षेत्रों में ब्राउन शुगर और हेरोइन की पहुंच तेजी से बढ़ रही है। “अब अफीम की खेती करने वालों और ड्रग्स कारोबारियों को जेल भेजा जाएगा। सप्लाई चेन तोड़ना हमारी प्राथमिकता है।”
स्कूल-कॉलेजों में विशेष कार्यक्रम
प्रधान सचिव (उच्च शिक्षा) राहुल पुरवार ने कहा कि ड्रग्स की शुरुआत की जड़ें अक्सर स्कूल और कॉलेजों से होती हैं। इसके लिए बिहेवियर स्टडी, तकनीकी रोकथाम और स्कूलों के आसपास कड़ी निगरानी की ज़रूरत है। साथ ही उन्होंने नशे के खिलाफ सभी विभागों को मिलकर अभियान चलाने की आवश्यकता बताई।
झारखंड की उपलब्धियां और केंद्र की सराहना
एनसीबी रांची जोनल डायरेक्टर अभिषेक आनंद ने बताया कि अफीम के विनिष्टीकरण में झारखंड देशभर में अग्रणी है और केंद्र सरकार ने इसकी 20% सफलता के लिए राज्य की सराहना की है।












