Koderma News: कोडरमा में डोमचांच प्रखंड के ढाब थाना क्षेत्र अंतर्गत मेनपहाड़ी जंगल स्थित अवैध ढिबरा खदान में शुक्रवार को चाल धंसने से एक मजदूर की मौत का मामला प्रकाश में आ रहा है। मृतक की पहचान मसनोडीह निवासी शंभू मेहता के रूप में हुई है। घटना के बाद से इलाके में सनसनी फैल गई है। वहीं ढिबरा तस्करों की सक्रियता और प्रशासन की निष्क्रियता पर भी सवाल खड़े हो गए हैं।
अचानक चाल धंसने से दो मजदूर मलबे के नीचे दबे
जानकारी के अनुसार शुक्रवार को मेनपहाड़ी जंगल में संचालित एक अवैध ढिबरा खदान में कई मजदूर काम कर रहे थे। इसी दौरान अचानक चाल धंस गई, जिससे दो मजदूर मलबे के नीचे दब गए। घटना के बाद खदान में मौजूद अन्य मजदूरों और स्थानीय खनन तस्करों ने किसी तरह दोनों को बाहर निकाला। इनमें शंभू मेहता गंभीर रूप से घायल हो गया था। उसकी कमर की हड्डी पूरी तरह टूट चुकी थी, जबकि दूसरे मजदूर को मामूली चोटें आई थीं।
घायल मजदूरों को गुपचुप तरीके से इलाज के लिए भेजा गया
घटना की जानकारी पुलिस या प्रशासन को देने के बजाय अवैध तरीके से ढिबरा का खनन करने वाले तस्करों ने घायल मजदूरों को गुपचुप तरीके से इलाज के लिए भेज दिया। गंभीर रूप से घायल शंभू को पहले कोडरमा लाया गया, जहां से चिकित्सकों ने उसे बेहतर इलाज के लिए धनबाद रेफर कर दिया। वही रविवार को धनबाद में इलाज के दौरान उसने दम तोड़ दिया। इधर, चर्चा यह है कि खनन तस्करों ने घटना को दबाने के लिए मृतक के परिजनों को मोटी रकम दी है। बताया जा रहा है कि पैसे लेने के बाद परिजनों ने भी खदान धंसने की घटना से इनकार कर दिया है। वहीं, पूरे मामले में प्रशासनिक लापरवाही साफ झलक रही है। ढाब थाना प्रभारी बमबम कुमार ने इस संबंध में कहा कि उन्हें इस घटना की कोई आधिकारिक जानकारी नहीं है। मामले की जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
डोमचांच और ढाब इलाके में खुलेआम ढिबरा का खनन हो रहा है। इलाके में लंबे समय से अवैध ढिबरा खनन का कारोबार फल-फूल रहा है, लेकिन स्थानीय पुलिस और खनन विभाग की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि, मेनपहाड़ी और आस-पास के इलाकों में दर्जनों अवैध खदानें चल रही हैं, जहां मजदूरों की सुरक्षा की कोई व्यवस्था नहीं है। बिना किसी सुरक्षा उपकरण के मजदूरों से काम कराया जाता है, जिससे आए दिन हादसे होते रहते हैं।
अवैध खनन पर रोक लगाने की मांग
ग्रामीणों ने प्रशासन से ऐसे अवैध खदानों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति नहीं हो। हादसे का शिकार शंभू मेहता अपने पीछे पत्नी और दो छोटे बच्चों को छोड़ गया है। परिवार के लोगों का रो-रोकर बुरा हाल है। वहीं, इलाके में यह चर्चा का विषय बना हुआ है कि आखिर प्रशासन और खनन विभाग की नाक के नीचे इतने बड़े पैमाने पर ढिबरा का अवैध खनन कैसे हो रहा है।













