नई दिल्ली: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI अब सिर्फ सवालों के जवाब देने या तस्वीरें बनाने तक सीमित नहीं रह गया है। नए AI एजेंट इंटरनेट पर जानकारी खोज सकते हैं, कोड लिख सकते हैं, कंप्यूटर पर काम कर सकते हैं और किसी दिए गए लक्ष्य को हासिल करने के लिए कई चरणों में खुद फैसले भी ले सकते हैं। ऐसे में एक सवाल तेजी से चर्चा में है—क्या AI खुद किसी सिस्टम को हैक कर सकता है?
Google के AI मॉडल Gemini से जुड़ी हालिया साइबर सिक्योरिटी टेस्टिंग की घटना ने इस सवाल को और गंभीर बना दिया है। मई 2026 में टेस्टिंग के दौरान Gemini ने तीन वास्तविक कंपनियों के कंप्यूटिंग सिस्टम तक पहुंच बना ली। खास बात यह थी कि इस प्रक्रिया में हर कदम पर इंसान उसे निर्देश नहीं दे रहा था।
हालांकि, जैसे ही मॉडल को पता चला कि वह टेस्ट के लिए बनाए गए सिस्टम के बजाय वास्तविक कंपनियों के सिस्टम तक पहुंच गया है, उसने अपनी गतिविधियां रोक दीं।
तो क्या AI सच में हैक कर सकता है?
इसका जवाब कुछ परिस्थितियों में हां है, लेकिन इसे समझना जरूरी है।
AI अपने आप जादुई तरीके से किसी भी वेबसाइट या कंप्यूटर को हैक नहीं कर सकता। उसे इंटरनेट, कंप्यूटर सिस्टम, साइबर सिक्योरिटी टूल्स या दूसरे डिजिटल संसाधनों तक पहुंच और उन्हें इस्तेमाल करने की अनुमति चाहिए।
अगर AI एजेंट को ऐसे टूल्स उपलब्ध हों, तो वह किसी लक्ष्य को हासिल करने के लिए कई काम लगातार खुद कर सकता है। उदाहरण के लिए वह किसी सिस्टम के बारे में सार्वजनिक जानकारी जुटा सकता है, कोड को समझ सकता है, संभावित कमजोरियां खोज सकता है और उपलब्ध क्रेडेंशियल या दूसरी जानकारी का इस्तेमाल कर सकता है।
यही वजह है कि Autonomous AI को लेकर साइबर सिक्योरिटी विशेषज्ञों की चिंता बढ़ रही है।
Gemini के मामले में क्या हुआ?
Google Gemini से जुड़ा मामला एक साइबर सिक्योरिटी टेस्ट के दौरान सामने आया। टेस्ट में AI को एक काल्पनिक कंपनी के सिस्टम पर काम करने के लिए तैयार किया गया था।
लेकिन टेस्ट वातावरण में तकनीकी समस्या के कारण AI को इंटरनेट तक पहुंच मिल गई। इसके बाद जिस काल्पनिक कंपनी के नाम का इस्तेमाल किया गया था, उससे मिलते-जुलते नाम वाली वास्तविक कंपनियों की जानकारी AI को इंटरनेट पर मिल गई।
रिपोर्ट के मुताबिक, Gemini ने उपलब्ध जानकारी का इस्तेमाल करते हुए तीन वास्तविक कंपनियों के सिस्टम तक पहुंच बनाई।
कुछ मामलों में मॉडल ने पासवर्ड से संबंधित प्रयास किए, जबकि अन्य मामलों में सार्वजनिक ऑनलाइन रिपॉजिटरी में उपलब्ध क्रेडेंशियल का इस्तेमाल किया गया।
यानी यहां महत्वपूर्ण बात सिर्फ यह नहीं थी कि AI ने किसी सुरक्षा कमजोरी को पहचान लिया, बल्कि यह थी कि उसने एक लक्ष्य को हासिल करने के लिए कई साइबर गतिविधियों को खुद आगे बढ़ाया।
सबसे हैरान करने वाली बात क्या थी?
इस घटना का सबसे अहम हिस्सा यह था कि Gemini को जब समझ आया कि जिन सिस्टम पर वह काम कर रहा है, वे वास्तविक कंपनियों के हैं, तो उसने अपनी गतिविधियां रोक दीं।
Google ने संबंधित कंपनियों को घटना की जानकारी दी है और टेस्टिंग की प्रक्रिया में बदलाव किए गए हैं।
यह घटना एक साथ दो तस्वीरें दिखाती है।
एक तरफ AI की बढ़ती क्षमता सामने आती है। दूसरी तरफ यह भी पता चलता है कि अगर AI एजेंट को गलत तरीके से इंटरनेट और सिस्टम एक्सेस मिल जाए, तो वह इंसानी मदद के बिना भी काफी जटिल गतिविधियां कर सकता है।
AI और इंसानी हैकर में क्या अंतर है?
इंसानी हैकर को किसी सिस्टम की जानकारी जुटाने, कमजोरियां खोजने और अलग-अलग तरीकों को आजमाने में समय लग सकता है।
AI एजेंट इन कामों को बहुत तेजी से कर सकता है। खासकर तब जब उसे इंटरनेट, कोडिंग टूल्स और दूसरे डिजिटल संसाधनों तक पहुंच दी गई हो।
AI की सबसे बड़ी ताकत उसकी स्पीड और ऑटोमेशन है।
यही कारण है कि साइबर सिक्योरिटी में AI का इस्तेमाल दो तरफ हो रहा है। कंपनियां AI की मदद से अपने सिस्टम की कमजोरियां खोज रही हैं, वहीं यही तकनीक गलत हाथों में जाने पर साइबर हमलों को ज्यादा तेज और बड़े पैमाने पर करने में इस्तेमाल हो सकती है।
क्या AI किसी भी वेबसाइट को हैक कर सकता है?
नहीं।
यह समझना जरूरी है कि AI के पास कोई ऐसी सार्वभौमिक क्षमता नहीं है जिससे वह किसी भी वेबसाइट या कंप्यूटर में आसानी से घुस सके।
किसी सिस्टम की सुरक्षा कई चीजों पर निर्भर करती है—पासवर्ड, एक्सेस कंट्रोल, नेटवर्क सिक्योरिटी, सॉफ्टवेयर की कमजोरियां, मल्टी-फैक्टर ऑथेंटिकेशन और AI को दिए गए अधिकार।
अगर सिस्टम में मजबूत सुरक्षा है और AI को जरूरी एक्सेस नहीं दिया गया है, तो केवल AI होने की वजह से वह सिस्टम अपने आप हैक नहीं हो जाता।
लेकिन अगर AI एजेंट को पर्याप्त डिजिटल अधिकार मिल जाएं और सामने वाले सिस्टम में कमजोरी भी मौजूद हो, तो जोखिम काफी बढ़ सकता है।
‘AI Sandbox Escape’ क्या है?
AI मॉडल की टेस्टिंग अक्सर Sandbox नाम के सुरक्षित और सीमित वातावरण में की जाती है।
इसका मकसद AI को बाहरी सिस्टम से अलग रखना होता है। उसे केवल वही संसाधन इस्तेमाल करने की अनुमति होती है जो टेस्टिंग के लिए जरूरी हैं।
अगर AI किसी तकनीकी गलती या सुरक्षा कमजोरी के कारण इस सीमित वातावरण से बाहर निकलकर वास्तविक इंटरनेट या बाहरी सिस्टम तक पहुंच बना ले, तो इसे Sandbox Escape कहा जाता है।
Gemini की घटना इसी तरह की सुरक्षा चुनौती को समझने का एक उदाहरण है।
AI Agent और सामान्य Chatbot में क्या अंतर है?
सामान्य AI chatbot से आप सवाल पूछते हैं और वह आपको जवाब देता है।
लेकिन AI Agent को एक लक्ष्य दिया जा सकता है और वह उस लक्ष्य को पूरा करने के लिए खुद कई कदम उठा सकता है।
उदाहरण के लिए उसे किसी वेबसाइट की जानकारी खोजने को कहा जाए तो वह खुद सर्च कर सकता है, जानकारी पढ़ सकता है, उसका विश्लेषण कर सकता है और आगे की कार्रवाई कर सकता है।
यही क्षमता साइबर सिक्योरिटी के क्षेत्र में बहुत उपयोगी भी हो सकती है और जोखिम भी पैदा कर सकती है।
पब्लिक रिपॉजिटरी में पासवर्ड क्यों खतरनाक है?
साइबर सिक्योरिटी में एक बड़ी समस्या यह है कि कई बार डेवलपर्स गलती से पासवर्ड, API Key या दूसरे संवेदनशील क्रेडेंशियल को सार्वजनिक कोड रिपॉजिटरी में अपलोड कर देते हैं।
अगर कोई AI एजेंट इंटरनेट पर ऐसी जानकारी खोज सकता है, तो वह उसे पहचानकर आगे इस्तेमाल करने की कोशिश कर सकता है।
इसीलिए कंपनियों के लिए सिर्फ मजबूत पासवर्ड बनाना ही काफी नहीं है। उन्हें यह भी देखना पड़ता है कि संवेदनशील जानकारी कहीं सार्वजनिक रूप से उपलब्ध तो नहीं हो गई।
क्या AI भविष्य का बड़ा साइबर खतरा है?
AI के तेजी से स्वायत्त होने के साथ यह सवाल महत्वपूर्ण होता जा रहा है।
आज AI एजेंट को इंटरनेट, कोडिंग टूल्स और कंप्यूटर सिस्टम तक सीमित अधिकार दिए जा रहे हैं। भविष्य में इनकी क्षमताएं और बढ़ सकती हैं।
इसका मतलब यह नहीं है कि AI निश्चित रूप से साइबर तबाही पैदा करेगा। लेकिन एक बात साफ है—जितनी ज्यादा क्षमता AI को दी जाएगी, उतनी ही मजबूत सुरक्षा व्यवस्था की जरूरत होगी।
इसी वजह से AI कंपनियां मॉडल की क्षमताओं के साथ-साथ उनके सुरक्षा व्यवहार की भी टेस्टिंग कर रही हैं।
Gemini की घटना ने एक महत्वपूर्ण बदलाव की ओर इशारा किया है। AI अब सिर्फ इंसान के सवाल का जवाब देने वाला सिस्टम नहीं रह गया है। कुछ AI एजेंट लक्ष्य मिलने पर खुद इंटरनेट और डिजिटल टूल्स का इस्तेमाल करके कई चरणों वाले काम कर सकते हैं।
इसलिए आने वाले समय में सवाल सिर्फ यह नहीं होगा कि “AI क्या कर सकता है?”, बल्कि यह भी होगा कि “AI को क्या करने की अनुमति दी जानी चाहिए?”
साइबर सिक्योरिटी की दुनिया में यही सीमा AI की उपयोगिता और उसके संभावित जोखिम के बीच सबसे महत्वपूर्ण अंतर तय कर सकती है।

विशेष संवाददाता | Khabar Mantra
विकाश कुमार झारखंड के रांची के रहने वाले और यहीं जन्मे पत्रकार एवं डिजिटल मीडिया प्रोफेशनल हैं। झारखंड में लंबे समय से रहने और काम करने के कारण उन्हें राज्य के गांवों, शहरों, स्थानीय समाज, प्रशासन और जमीनी मुद्दों की गहरी समझ है।
5+ वर्षों के पत्रकारिता अनुभव के साथ उन्होंने Gandiva, Lagatar.in, News11 Digital और Prabhat Khabar Digital जैसे मीडिया संस्थानों में काम किया है। वर्तमान में Khabar Mantra Digital में Digital Media Manager-cum-Executive एवं विशेष संवाददाता के रूप में कार्यरत हैं।
वे विशेष रूप से कोयलांचल, BCCL, कोलियरियों, औद्योगिक क्षेत्रों, स्थानीय प्रशासन और जनहित के मुद्दों पर रिपोर्टिंग करते हैं।
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