रांची: झारखंड सरकार ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ाने के लिए पशुपालन और कुक्कुट पालन को बढ़ावा देने की दिशा में काम कर रही है। मुख्यमंत्री पशुधन विकास योजना के तहत बकरी, भेड़, लेयर मुर्गी, ब्रायलर मुर्गी और बत्तख पालन से जुड़े यूनिट उपलब्ध कराने का प्लान तैयार किया गया है।
हालांकि, योजना से जुड़ी कई बातें अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं हैं। खासकर लाभुकों के चयन, आवेदन की अंतिम प्रक्रिया, जरूरी दस्तावेज और यूनिट वितरण की तारीख को लेकर जिलेवार स्थिति अलग हो सकती है। इसलिए नीचे दी गई जानकारी को फिलहाल 2026-27 के प्रस्तावित प्लान और उपलब्ध प्रावधानों के तौर पर समझना चाहिए। अंतिम नियम संबंधित विभाग की आधिकारिक अधिसूचना के बाद ही स्पष्ट होंगे।
बकरी पालन में 10 पशुओं की यूनिट का प्रस्ताव
प्रस्तावित प्लान के मुताबिक बकरी पालन के लिए ब्लैक बंगाल नस्ल की बकरियों की यूनिट तैयार करने की योजना है।
एक यूनिट में कुल 10 बकरियां रखे जाने का प्रस्ताव है। इसमें 2 नर और 8 मादा बकरियां शामिल होंगी। इसके लिए करीब 42 हजार रुपये प्रति यूनिट का प्रावधान बताया गया है।
पूरे राज्य में ऐसी करीब 12,516 यूनिट का लक्ष्य प्रस्तावित है।
हालांकि, लाभुक को यह यूनिट किस आधार पर मिलेगी, सरकार की ओर से लाभुक का कितना अंश होगा और चयन की अंतिम प्रक्रिया क्या होगी, इसे लेकर आधिकारिक दिशा-निर्देश का इंतजार करना होगा।
भेड़ पालन के लिए भी अलग यूनिट
2026-27 के प्रस्तावित प्लान में भेड़ पालन को भी शामिल किया गया है। इसके तहत छोटानागपुरी और शाहावादी नस्ल की भेड़ों की यूनिट देने का प्रावधान बताया गया है।
एक यूनिट में 10 भेड़ रखने की योजना है। इसमें 2 नर और 8 मादा भेड़ शामिल होंगी। प्रति यूनिट करीब 42 हजार रुपये का बजट बताया गया है।
राज्य में ऐसी करीब 2,257 यूनिट का लक्ष्य रखा गया है।
यह प्रावधान पुराने प्लान की तुलना में एक महत्वपूर्ण बदलाव माना जा रहा है, क्योंकि इस बार भेड़ पालन के लिए अलग यूनिट का प्रावधान किया गया है।
420 लेयर चूजों की यूनिट
मुर्गी पालन में बैकयार्ड लेयर कुक्कुट योजना के तहत अंडा देने वाली मुर्गियों के चूजों की यूनिट का प्रावधान है।
प्रस्तावित योजना के अनुसार एक यूनिट में 420 लेयर चूजे होंगे। इसमें संभावित मृत्यु दर को ध्यान में रखते हुए संख्या तय किए जाने की बात कही गई है।
एक यूनिट की अनुमानित लागत 14,700 रुपये बताई गई है और राज्य में करीब 2,984 यूनिट का लक्ष्य प्रस्तावित है।
इस यूनिट का प्रावधान पिछले प्लान के समान ही बताया जा रहा है।
ब्रायलर मुर्गी की 525 चूजों वाली यूनिट
ब्रायलर पालन के लिए भी योजना में यूनिट का प्रावधान है। एक यूनिट में 525 ब्रायलर चूजे रखे जाने की योजना है।
प्रति यूनिट करीब 15,750 रुपये की लागत का प्रावधान बताया गया है। राज्यभर में करीब 5,407 यूनिट का लक्ष्य प्रस्तावित है।
लेयर की तरह ब्रायलर यूनिट में भी इस बार कोई बड़ा बदलाव प्रस्तावित नहीं दिखता।
बत्तख पालन में चूजों की संख्या बढ़ाने का प्लान
बत्तख पालन योजना में इस बार बदलाव प्रस्तावित है। उपलब्ध प्लान के मुताबिक एक लाभुक को 30 लो-इनपुट बत्तख चूजे, करीब 15 दिन की उम्र के, दिए जाने का प्रावधान है।
इसके लिए प्रति यूनिट करीब 3,060 रुपये का बजट बताया गया है।
राज्य में करीब 21,482 यूनिट का लक्ष्य प्रस्तावित है।
पिछले प्रावधान से तुलना करें तो बत्तख यूनिट में चूजों की संख्या 15 से बढ़ाकर 30 करने का प्लान बताया गया है।
पुराने प्लान से इस बार क्या बदल सकता है?
उपलब्ध जानकारी के मुताबिक 2026-27 के प्रस्तावित प्लान में सबसे बड़ा बदलाव बकरी और बत्तख यूनिट में दिखाई देता है।
| यूनिट | पुराने प्रावधान | 2026-27 का प्रस्तावित प्लान |
|---|---|---|
| बकरी | 5 बकरी, 1 नर + 4 मादा | 10 बकरी, 2 नर + 8 मादा |
| भेड़ | अलग यूनिट का स्पष्ट प्रावधान नहीं | 10 भेड़, 2 नर + 8 मादा |
| लेयर मुर्गी | 420 चूजे | 420 चूजे |
| ब्रायलर मुर्गी | 525 चूजे | 525 चूजे |
| बत्तख | 15 चूजे | 30 चूजे |
इस हिसाब से देखा जाए तो बकरी यूनिट का आकार दोगुना करने, बत्तख के चूजों की संख्या बढ़ाने और भेड़ पालन को अलग यूनिट के तौर पर शामिल करने का प्रस्ताव सामने आता है।
लेकिन इसे अंतिम नियम मानना अभी जल्दबाजी होगी। अंतिम व्यवस्था सरकारी आदेश और विभागीय गाइडलाइन जारी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।
लाभुक कौन होंगे?
योजना का उद्देश्य ग्रामीण परिवारों को पशुपालन और मुर्गी-बत्तख पालन के जरिए आय का अतिरिक्त साधन उपलब्ध कराना बताया जा रहा है।
हालांकि, 2026-27 के लिए लाभुक चयन की अंतिम शर्तें अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं हैं। पुराने प्रावधानों में ग्रामीण किसान, पशुपालक और कुछ प्राथमिकता वाली श्रेणियों के लोगों के लिए अलग व्यवस्था रही है।
इसलिए यह मान लेना सही नहीं होगा कि हर ग्रामीण परिवार को आवेदन करते ही यूनिट मिल जाएगी।
लाभुकों की अंतिम पात्रता, प्राथमिकता और चयन की प्रक्रिया विभाग की ओर से जारी दिशा-निर्देश के आधार पर ही तय होगी।
आवेदन कैसे होगा?
फिलहाल आवेदन की प्रक्रिया को लेकर भी पूरी तस्वीर साफ नहीं है।
उपलब्ध जानकारी के मुताबिक लाभुकों के चयन में ग्राम पंचायत, ग्राम सभा, प्रखंड और पशुपालन विभाग की भूमिका हो सकती है। लेकिन 2026-27 में आवेदन ऑनलाइन होगा या ऑफलाइन, किस कार्यालय में आवेदन जमा होगा और आवेदन की अंतिम तारीख क्या होगी, इसकी आधिकारिक पुष्टि का इंतजार करना जरूरी है।
इसलिए ग्रामीणों को सोशल मीडिया या अनौपचारिक माध्यम से मिले किसी भी आवेदन लिंक पर भरोसा करने के बजाय अपने प्रखंड या जिला पशुपालन कार्यालय से जानकारी लेने की सलाह दी जाती है।
कौन-कौन से दस्तावेज लग सकते हैं?
अभी अंतिम दस्तावेजों की सूची स्पष्ट नहीं है। हालांकि, ऐसी योजनाओं में आमतौर पर पहचान और बैंक खाते से जुड़े दस्तावेज मांगे जा सकते हैं।
संभावित तौर पर इनमें:
- आधार कार्ड
- बैंक पासबुक
- निवास प्रमाणपत्र
- पासपोर्ट साइज फोटो
- जाति प्रमाणपत्र, यदि लागू हो
- अन्य पहचान संबंधी दस्तावेज
शामिल हो सकते हैं।
यह अंतिम दस्तावेज सूची नहीं है। विभाग की आधिकारिक गाइडलाइन आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि कौन-कौन से दस्तावेज अनिवार्य होंगे।
अभी क्या करें ग्रामीण?
अगर आप मुख्यमंत्री पशुधन विकास योजना के तहत बकरी, भेड़, मुर्गी या बत्तख पालन यूनिट लेना चाहते हैं, तो अभी सबसे जरूरी है कि अपने प्रखंड पशुपालन कार्यालय, जिला पशुपालन कार्यालय या स्थानीय पंचायत से योजना की मौजूदा स्थिति की जानकारी लें।
आवेदन शुरू होने, पात्रता तय होने और लाभुकों की सूची जारी होने के बाद ही वास्तविक प्रक्रिया स्पष्ट होगी।
सबसे जरूरी बात
मुख्यमंत्री पशुधन विकास योजना के 2026-27 प्लान में बकरी, भेड़, लेयर, ब्रायलर और बत्तख पालन को लेकर कई प्रावधान प्रस्तावित बताए जा रहे हैं। लेकिन आवेदन, लाभुक चयन, दस्तावेज और वितरण की पूरी प्रक्रिया अभी स्पष्ट नहीं होने के कारण इसे अंतिम घोषणा मानना सही नहीं होगा।
सरकार की ओर से आधिकारिक गाइडलाइन या जिला स्तर पर सूचना जारी होने के बाद ही यह पता चलेगा कि कौन पात्र होगा, आवेदन कहां होगा, कितना लाभ मिलेगा और यूनिट कब बांटी जाएगी।
इसलिए फिलहाल इस योजना को “प्रस्तावित प्लान” के रूप में ही समझें और अंतिम जानकारी के लिए विभागीय घोषणा का इंतजार करें।

विशेष संवाददाता | Khabar Mantra
विकाश कुमार झारखंड के रांची के रहने वाले और यहीं जन्मे पत्रकार एवं डिजिटल मीडिया प्रोफेशनल हैं। झारखंड में लंबे समय से रहने और काम करने के कारण उन्हें राज्य के गांवों, शहरों, स्थानीय समाज, प्रशासन और जमीनी मुद्दों की गहरी समझ है।
5+ वर्षों के पत्रकारिता अनुभव के साथ उन्होंने Gandiva, Lagatar.in, News11 Digital और Prabhat Khabar Digital जैसे मीडिया संस्थानों में काम किया है। वर्तमान में Khabar Mantra Digital में Digital Media Manager-cum-Executive एवं विशेष संवाददाता के रूप में कार्यरत हैं।
वे विशेष रूप से कोयलांचल, BCCL, कोलियरियों, औद्योगिक क्षेत्रों, स्थानीय प्रशासन और जनहित के मुद्दों पर रिपोर्टिंग करते हैं।
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